Last Update On : 29 08 2018 10:15:01 PM

माओवादियों से संबंध के शक में गिरफ्तारी के बाद नजरबंद मानवाधिकार कार्यकर्ताओं में शामिल मानवाधिकार वकील और शिक्षक सुधा भारद्वाज बोलीं दलितों एवं आदिवासियों के लिए लड़ने वाले लोगों को बना रही है मोदी सरकार निशाना

जनज्वार। वकील, शिक्षक और मानवाधिकार कार्यकर्ता सुधा भारद्वाज, ख्यात कवि और बुद्धिजीवी वरवर राव, मानवाधिकार कार्यकर्ता गौतम नवलखा, जिनेस आॅर्गनाइजेशन के वर्णन गोंजा​लविस और लेखक और सामाजिक कार्यकर्ता अरुण फरेरा को छापेमारी के बाद पुलिस ने कल गिरफ्तार किया था। इस पर सुनवाई करते हुए आज सुप्रीम कोर्ट ने इन्हें एक हफ्ते 6 सितंबर तक हाउस अरेस्ट का फैसला दिया है।

इस मामले में अपना पक्ष रखते हुए पुणे पुलिस ने दावा किया है कि इन 5 लोगों की गिरफ्तारी हमने नए सबूतों के आधार पर की है। हमारे पास ऐसे सबूत हैं जिनसे साबित हो जाएगा कि ये लोग एक बड़ी साजिश रच रहे थे। 

वहीं पुणे पुलिस ने यह भी आरोप लगाया कि माओवादियों से संबंध रखने के संदेह में गिरफ्तार किए गए कार्यकर्ताओं ने राजनीतिक व्यवस्था में गहरी असहिष्णुता दिखाई है।

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गौरतलब है कि भीमा-कोरेगांव हिंसा के सिलसिले में देश के अलग-अलग हिस्सों से पांच सामाजिक कार्यकर्ताओं की कल की गई गिरफ्तारी को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने के बाद पुणे पुलिस ने यह दावा किया है। पुलिस ने 5 लोगों जिनमें वकील, पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल की गिरफ्तारी की, वहीं 12 लोगों के घर पर छापेमारी की।

कोर्ट के आदेश के बाद मानवाधिकार वकील सुधा भारद्वाज को फरीदाबाद में उनके आवास पर पुलिस अधिकारियों की निगरानी में रखा गया है और उन्हें केवल उनके वकीलों से मिलने की अनुमति दी गई है।

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कोर्ट के नजरबंदी के आदेश के बाद सुधा भारद्वाज ने मीडिया से कहा कि ‘मुझे लगता है जो भी वर्तमान शासन के खिलाफ है, चाहे वह दलित अधिकारों, जनजातीय अधिकारों या मानवाधिकारों की बात हो, विरोध में आवाज उठाने वाले प्रत्येक व्यक्ति के साथ इसी तरह व्यवहार किया जा रहा है।’ सुधा ने कहा, ‘मेरा मोबाइल, लैपटॉप और पेन ड्राइव जब्त कर लिए गए हैं। मेरे जीमेल और ट्विटर अकाउंट के पासवर्ड भी ले लिए गए हैं।’

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वहीं हाउस अरेस्ट किए गए और जिनके घर छापे पड़े उन मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने कहा कि ये छापे लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला हैं और आपातकाल की यादें ताजा करते हैं।

सुधा भारद्वाज की बेटी अनु भारद्वाज के मुताबिक जब उनकी मां सुधा भारद्वाज को गिरफ्तार करने पुलिस आई तो उस दल में दस लोग शामिल थे। उनमें से हरियाणा पुलिस से केवल एक महिला कांस्टेबल थी, अन्य महाराष्ट्र पुलिस से थे। जब सुधा भारद्वाज ने उनसे तलाशी वारंट दिखाने को कहा तो उन्होंने कहा कि वारंट उनके पास नहीं है।’

अनु भारद्वाज ने मीडिया को बताया ‘पुलिस टीम के पास कुछ अन्य दस्तावेज थे, इसलिए मां ने उन्हें अंदर आने की अनुमति दी। मुझे आरोपों के बारे में कोई जानकारी नहीं है, लेकिन मां ने कहा कि वे पुणे में गिरफ्तारियों के सिलसिले में आये हैं।’

गौरतलब है कि मानवाधिकार वकील सुधा भारद्वाज छत्तीसगढ़ में अपने काम के लिए जानी जाती हैं। वह 29 साल तक वहां रही हैं और दिवंगत शंकर गुहा नियोगी के छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा की सदस्य के तौर पर भिलाई में खनन श्रमिकों के अधिकारों के लिए लड़ाई लड़ चुकी हैं। जब वह आईआईटी कानपुर की छात्रा थीं तब पश्चिम बंगाल, बिहार और उत्तर प्रदेश में बिताए दिनों में श्रमिकों की दयनीय स्थिति देखने के बाद उन्होंने छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा के साथ 1986 में काम करना शुरू किया था।

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नागरिक अधिकार कार्यकर्ता एवं वकील सुधा जमीन अधिग्रहण के खिलाफ भी लड़ाई लड़ती रही हैं। फिलहाल सुधा पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज (पीयूसीएल) की छत्तीसगढ़ इकाई की महासचिव हैं।

कल 28 अगस्त की सुबह 6 बजे सबसे पहले छापे की खबर झारखंड की राजधानी रांची से आई। महाराष्ट्र पुलिस ने आदिवासी भूमि अधिकारों के लिए चलाए जा रहे आंदोलन ‘पत्थलगड़ी’ में सक्रिय स्टैन स्वामी के आवास पर छापा मारा। महाराष्ट्र की पुणे पुलिस ने इसी के साथ भीमा कोरेगांव मामले में अरुण फरेरा के पुणे स्थित आवास पर छापेमारी की, जबकि सुसान अब्राहम और वर्णन गोंजाल्विस के मुंबई आवास पर पुलिस ने रेड मारी।

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मानवाधिकार कार्यकर्ता गौतम नवलखा के दिल्ली आवास, वकील और ट्रेड यूनियन नेता सुधा भारद्वाज के हरियाणा स्थित फरीदाबाद के आवास, आईआईटी प्रोफेसर और लेखक आनंद तेलतुंबड़े के गोवा स्थित आवास पर छापेमारी हुई। चर्चित जनकवि और माओवादी संबंधों के मामलों में ख्यात आंध्र प्रदेश के वरवर राव, सामाजिक—राजनीतिक कार्यकर्ता नसीम, नमस्ते तेलंगाना के पत्रकार क्रांति टेकुला के हैदराबाद स्थि​त आवास, वरवर राव की बेटी अनाला के घर और हिंदू के पत्रकार केवी कुमारनाथ के यहां भी पुलिस ने भी छापे मारे।