Last Update On : 01 08 2018 09:19:46 PM

गंगा साफ न हुई तो कूदकर जान दे दूंगी वाली केंद्रीय मंत्री तो ऐसे गायब हैं जैसे गधे के सिर से सिंह, लेकिन ‘घुमक्कड़ यात्री’ मोदी कहाँ हैं जो गंगा को माँ कहके जग को लूट ले गए….

जनज्वार, हरिद्वार। गंगा को बचाने के नाम पर आमजन की भावनाओं से खिलवाड़ पर आए नेता सत्ता में बैठकर गंगा को भूल गए हैं, मगर  आईआईटी प्रोफेसर जीडी अग्रवाल ने गंगा को बचाने के लिए आमरण अनशन शुरू कर दिया है। शायद उनके अनशन से गंगा को मां कहकर लोगों की भावनाओं को वोट में कैश करने वाले प्रधानमंत्री मोदी और गंगा साफ नहीं हुई तो कूदकर जान दे दूंगी कहने वाली साध्वी और केंद्रीय मंत्री उमा भारती को अपने वादें याद आएं।

गौरतलब है कि तरुण भारत संघ के उपाध्यक्ष प्रो. जीडी अग्रवाल (स्वामी सानंद) जो कि आज दुनिया के नदी के सबसे बड़े विशेषज्ञों में एक माने जाते हैं, गंगा के लिए पिछले 40 दिनों से गंगा के किनारे हरिद्वार में आमरण अनशन कर रहे हैं। वे 22 जून से अनशन पर हैं। गंगा की अविरलता व निर्मलता सुनिश्चित करने वाला कानून चाहते हैं, जिसका प्रारूप पिछले 06 वर्षों से भारत सरकार में दरदर की ठोकर खा रहा है।

उन्होंने पहले भी भागीरथी नदी को शुद्ध, सदानीरा बनवाने में सफलता प्राप्त की थी। अभी वो इस तरह का काम अलकनंदा और मंदाकिनी नदी हेतु भी चाहते हैं।

सम्पूर्ण गंगा जी अविरल, निर्मल बनाने के लिए भारत सरकार ने एक बहुत बड़ी कार्य योजना भारत के सात प्रौद्योगिकी के संस्थानों द्वारा बनवाई थी, लेकिन अब उस योजना के अनुसार गंगा जी में काम नहीं हो रहा है। इसलिए प्रो. जीडी अग्रवाल दुःखी होकर आमरण अनशन पर बैठे हैं।

भारत सरकार की जल संसाधन मंत्री उमा भारती व गंगा पुनर्जीवन मंत्रालय के मंत्री नितिन गडकरी ने उनका आमरण अनशन रोकने हेतु पत्र लिखे हैं, परन्तु उन पत्रों से प्रो. जीडी अग्रवाल की संतुष्टि न होने के कारण उनका अनशन जारी है।

प्रो. जीडी अग्रवाल का स्वास्थ्य दिनोंदिन बिगड़ रहा है। किटोन जा रहे हैं। उन्होंने अपने चिकित्सकों को जबरजस्ती भोजन के लिए मना कर दिया है। वे औषधि ग्रहण नहीं कर रहे हैं। उनका स्वास्थ्य न बिगड़े और वे स्वास्थ्य रहे इस हेतु जलपुरुष राजेन्द्र सिंह ने तरुण भारत संघ में आज देशभर के 19 राज्यों से आए नदी प्रेमियों व पूरी दुनिया में काम करने वाले नदी विशेषज्ञों के साथ उनके स्वास्थ्य हेतु प्रार्थना की और भारत सरकार से प्रो. जीडी अग्रवाल के सत्याग्रह को सफल बनाने का अग्रह किया।

जलपुरुष ने मांग की कि भारत सरकार जल्दी से जल्दी गंगा की अविरलता व निर्मलता सुनिश्चित करने वाला कानून बनाए और न केवल एक जल ऋषि बल्कि पूर्ण भारत की संस्कृति की रक्षा के लिए पहल करें।

इस अवसर पर महाराष्ट्र से डॉ नीलेश हेड़ा, विनोद बोधनकर, हरियाणा से जगदीश चौधरी, तमिलनाडु से कोधई सलवन, कामाक्षी स्वामीनाथन, बालाजी रमार्जन, इंग्लेण्ड से लूईस विंघम, डेविड, गुजरात से नीलम पटेल, भोया हिसाल, पंजाब से गुरजिन्द्र सिंह व सरबजीत सिंह, उत्तर प्रदेश से गिरजेश पाण्डे, सजीव कुमार, पंकज, जीतेन्द्र सिंह, बिहार से अवधबिहारी, अमर कुमार, दिल्ली से सौरभ शर्मा, प्रकाश किरकिरे सहित पूरे भारत वर्ष से सैकड़ो लोगों ने हिस्सा लिया।