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सिर्फ साइकिल-मोटरसाइकिल मिलाकर ही हर रोज हो रहा 7000 क्विंटल कोयले का धड़ल्ले से अवैध कारोबार जिसकी ​कीमत अवैध बाजार में ही है तकरीबन 35 लाख

जनज्वार। झारखंड के देवघर स्थित चितरा कोलियरी से भारी मात्रा में कोयला चोरी होने की खबरें सामने आई हैं। प्रभात खबर में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक कोयला चोरी का यह अवैध कारोबार हर साल 125 करोड़ के पार पहुंच गया है, जिससे सरकार को करोड़ों रुपये का प्रतिवर्ष चूना लग रहा है।

मीडिया में यह खबर चितरा के एक स्थानीय युवा विवेक सिंह की शिकायत के बाद सामने आई है जिसने कोयला चोरी के संबंध में कोल मंत्रालय को ​लिखा है कि चितरा कोलियरी में खाकी—खादी के संरक्षण में कोयला चोरी किस हद तक चरम पर पहुंच चुकी है।

विवेक सिंह की शिकायत के मुताबिक यहां से हर रोज लगभग 1000—1200 मोटरसाइकिलों की मार्फत अवैध कोयला बाहर ले जाया जा रहा है। एक अंदाजे के मुताबिक हर मोटरसाइकिल पर लगभग 3 क्विंटल अवैध कोयला ढोया जाता है। यही नहीं अवैध कोयला यहां से बाहर ले जाने का जरिया साइकिलें भी है।

हर रोज करीब 4000 साइकिलों से भी अवैध रूप से कोयला ढोया जा रहा है। कोयला ढोने वालों के मुताबिक वे लोग कोयला वजन से नहीं खरीदते, कोयले के ढेर खरीदे जाते हैं। एक ढेर में लगभग तीन से साढ़े तीन क्विंटल कोयला रहता है।

ये लोग एक ढेर मतलब तीन—साढे तीन क्विंटल कोयले की कीमत डेढ़ से दो हजार रुपये चुकाते हैं। इस हिसाब से गणित लगाया जाये तो हर रोज मात्र मोटरसाइकिलों से ही 2,40,000 रुपये का कोयला अवैध तौर पर बिकता है। यानी हर माह लगभग 7.20 करोड़ रुपये के अवैध कोयले का व्यापार चितरा से धड़ल्ले से सिर्फ बाइकों से किया जा रहा है। इसमें साइकिल, पिकअप वैन व ट्रक से कोयला चोरी के आंकड़ा मिलाएं तो चितरा कोलियरी से प्रतिवर्ष अंदाजन 125 करोड़ का अवैध कोयला व्यापार हो रहा है।

यही नहीं इसके साथ पुलिस की अवैध वसूली का धंधा भी फल—फूल रहा है। साइकिल वाले से पुलिस के नाम पर 100 रुपये तो बाइक वाले से करीब 300 रुपये की अवैध वसूली की जाती है।

गौरतलब है कि कोयले से लदे वाहन भी आए दिन चोरी होने की खबरें आती रहती हैं, तो दिन में सामान ढोने वाले पिकअप पर अवैध कोयला ढोया जाता है।

प्रभात खबर में छपी खबर के मुताबिक ही चितरा थाना क्षेत्र में अवैध कोयला डिपो का संचालन होता रहा है। इस अवैध कारोबार में बिहार, झारखंड व पश्चिम बंगाल तक के कोयला माफिया संलिप्त हैं। अवैध कोयला कारोबारियों को खादी—खाकी का संरक्षण प्राप्त है, इसीलिए कोयला ढोने वालों से खाकी के नाम पर अवैध वसूली की जाती है।

चितरा कोलियरी से ट्रक समेत कोयला गायब होने के मामले में पूर्व स्पीकर शशांक शेखर भोक्ता ने भी आपत्ति जताते हुए फेसबुक पर पोस्ट लिखी कि ‘बड़ी-बड़ी मछलियां जाल फाड़कर निकल गयीं, पोंठी मछली पर एफआईआर। सिक्युरिटी इंस्पेक्टर पिस्तौल से गाड़ी नहीं राेक सके और डंडा वाले गरीब गार्ड पर गाज गिरी। इस घटना के बाद जीएम और एजेंट बीमार होकर कोलियरी क्यों छोड़ गये, एजेंट का नाम क्यों नहीं।  सिक्युरिटी इंस्पेक्टर और सीआईए एफ पर एफआइआर क्यों नहीं? ये धंधा तो महीनों से चल रहा था। बड़े पदाधिकारियों ने अपना दामन बचाने के लिए साधारण कर्मचारी को जिम्मेदार बनाया और अपने पाप को छुपाने के लिए निरीह आदमी को बलि का बकरा बनाया।’

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