Last Update On : 07 01 2018 05:45:00 PM

4 साल की बेटी को साथ लेकर मैराथन में हिस्सा लेते हैं धर्मेश, रनैक्स स्पोर्ट्स ग्रुप द्वारा आयोजित किए जा रहे “टैक सीटी मैराथन” (ए रन फॉर वुमेन सेफ्टी) के हैं ब्रांड एम्बेसडर…

नोएडा, जनज्वार। ये हैं जयपुर के एक अनुभवी धावक धर्मेश वर्मा। बेटियाँ बोझ नहीं हैं” धर्मेश वर्मा का एक जागरूकता अभियान है, जिसे वे विभिन्न शहरों में फैला रहे हैं। मैराथन में धर्मेश अपनी 4 साल की बेटी “अारना” को वाकर में साथ लेकर दौड़ते हैं। 

उनके चलने का सफर लगभग 5 साल पहले जयपुर में हुई हाफ मैराथन से शुरू हुआ था। उसके बाद वे बड़ोदा, अहमदाबाद मैराथन में भी दौड़े। अगले वर्ष उनकी दौड़ रोक दी गई। परिवार चलाने के लिए कुछ कठिन परिस्थितियों के चलते वे एकदम टूट चुके थे। 2009 में पिंक सिटी मैराथन जयपुर में 50 किलोमीटर अल्ट्रा दौड़ का आयोजन हुआ। धर्मेश ने इस दौड़ में बिना किसी दूसरी सोच के हिस्सा लिया।

उन्होंने इसके लिए थोड़ा सा अभ्यास किया और लगभग 7 घंटे में धीमी गति से 50 किलोमीटर की अल्ट्रा दौड़ पूरी की। उसके बाद धर्मेश अपनी समस्याओं को दरकिनार करने हुए बहुत सी मैराथन का हिस्सा बने और पहले से कम टाइम में दौड़ को पूरा किया और कई सारी सफलताओं को चूमा।

धर्मेश अब “रनैक्स स्पोर्ट्स ग्रुप” द्वारा 11 मार्च 2018 को करवाई जा रही “टैक सीटी मैराथन”(ए रन फॉर वुमेन सेफ्टी) नामक रेस में 65 किलोमीटर में अपना पंजीकरण करवा चुके हैं और “रनैक्स स्पोर्ट्स ग्रुप” ने “टैक सीटी मैराथन” (ए रन फॉर वुमेन सेफ्टी) रेस में उन्हें अपनी रेस का अम्बेसडर भी बनाया है।

इस आधुनिक समाज में जो लोग अभी भी सोचते हैं कि “बेटियां बोझ हैं” वे उन लोगों को गलत साबित करना चाहते हैं। धर्मेश दो खूबसूरत बेटियों “अारना” और “मिस्टी” का पिता हैं। वे बेटियों को होते भेदभाव को लेकर समाज में जागरूकता फैलाना चाहते हैं और लोगों को बताना चाहते हैं कि “बेटी बोझ नहीं है”, इसी मुहिम के तहत वे लोगों के बीच जा रहे हैं।

इसी के तहत धर्मेश ने अपनी बेटी को लेकर देशभर में मैराथन दौड़ लगाने का अभियान शुरू किया है। फरवरी 2017 में आईडीबीआई नई दिल्ली हॉफ मैराथन दौड़ बेटी अारना के साथ धर्मेश ने 2 घंटे 3 मिनट में 21.097 किलोमीटर की दूरी पूरी की। इस बारे में बताते हुए उन्होंने कहा, “मेरी बेटियां किसी से भी कम नहीं हैं।’ उसी महीने धर्मेश ने माउंट आबू में अपना पहला इंटरनेशनल ट्रेल मैराथन पूरा किया।

धर्मेश अपने रोजाना अभ्यास के साथ ही शहर के चारों ओर और उसके आसपास के सभी छोटे और बड़े कार्यक्रमों में हिस्सा लेते हैं। जून महीने में 24 घंटे स्टेडियम रन के लिए किया था, उसके बाद “12 घंटे व्यक्तिगत स्टेडियम रन” उन्होंने 96.400 किलोमीटर दिए हुए वक़्त में पूरा किया।

अपने मित्र कृष्ण कुमार के साथ वह ग्रामीण भारत में शिक्षा जागरूकता के लिए देओली से बुनदी तक 58 किलोमीटर तक अभियान चलाते हैं। जब राजस्थान के इस गर्म मौसम में भी अभियान चलाने के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा कि उनकी मंजिल ऊंची है और मेरी बेटियाँ मेरी ऊर्जा हैं जो मेरी सहायता करते हैं।

धर्मेश ने 71वें स्वतंत्रता दिवस पर 71 किलोमीटर दौड़ने का फैसला किया और इसे भारतीय सशस्त्र बलों के लिए समर्पित किया। उन्होंने बड़ी कठोर मेहनत से 1260.4 किलोमीटर तक की दौड़ अभी तक पूरी की है और अब धर्मेश “रनैक्स स्पोर्ट्स ग्रुप” द्वारा 11 मार्च 2018 को करवाई जा रही “टैक सीटी मैराथन” (ए रन फॉर वुमेन सेफ्टी) नामक रेस में अपनी बेटी को साथ लेकर दौड़ेंगे। ये बाप—बेटी इस दौड़ के अम्बेसडर बनकर दौड़ में हिस्सा लेंगे।

“टैक सीटी मैराथन” (ए रन फॉर वुमेन सेफ्टी) नामक रेस का हिस्सा बनकर कोई भी धर्मेश और उनकी बेटी के साथ दौड़कर “बेटी बोझ नहीं” नाम के धर्मेश के अभियान में साझेदार हो सकते हैं।