प्रतीकात्मक फोटो

अमेरिका के नेतृत्व में पूंजीवादी देशों ने सभी धर्मों की कट्टरपंथी ताकतों के साथ गठजोड़ बना लिया और वामपंथी उसके जवाब में सभी धर्मों के प्रगतिशील तत्वों के साथ गठजोड़ करने में बुरी तरह से असफल रहे, जिसकी एक बड़ी वजह कम्युनिस्टों की धर्म सम्बन्धी गलत अवधारणा है

अभिषेक आज़ाद का विश्लेषण

कोई भी समाज, धर्म या समुदाय प्रगतिशील या कट्टरपंथी नहीं होता। सभी धर्मों, समुदायों और समाजों में प्रगतिशील और कट्टरपंथी तत्व सदैव मौजूद रहते हैं। किसी भी धर्म, समुदाय या समाज को कट्टरपंथी या उदारवादी नहीं कहा जा सकता।

किसी भी धर्म, समुदाय या समाज का पूरी तरह से धार्मिक उन्माद या कट्टरपंथ की चपेट में आना कोई सहज, स्वाभाविक या प्राकृतिक घटना नहीं है। कुछ ताकतें अपने निहित स्वार्थों की पूर्ति के लिए संकीर्णता, कट्टरपंथ और धार्मिक उन्माद को बढ़ावा देती है। संकीर्णता, कट्टरता और धार्मिक उन्माद को बढ़ावा देने वाली ताक़तों की पहचान करके उनकी जिम्मेदारी तय करना अत्यंत आवश्यक है।

अमेरिका के नेतृत्व में पूंजीवादी देशों ने जनान्दोलनों को असफल करने के लिए पूरी दुनिया में कट्टरपंथी आतंकियों को हथियार, आर्थिक और सैनिक मदद पहुँचाई है। आज विश्व स्तर पर जिस तथाकथित इस्लामिक आतंक की चर्चा ज़ोरों पर है, उसे अमेरिका ने ही पैदा किया है। यह समूचा मामला पूंजीवाद बनाम समाजवाद की लड़ाई से सीधे सीधे जुड़ा है।

दुनिया के सबसे बड़े इस्लामिक देश इंडोनेशिया में कम्युनिस्टों का वर्चस्व था। अमेरिका ने वहां के कट्टरपंथी इस्लामिक तत्वों को मदद पहुँचाई। 1965-66 के दौरान इंडोनेशियाई नरसंहार के नाम से कुख्यात इस कांड में 30 लाख कम्युनिस्टों की हत्या कट्टरपंथी इस्लामिक गिरहों की मदद से की गई।

अफगानिस्तान में वामपंथी पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) ने निरंकुश दाऊद शाह का तख्ता पलटा था और अफगानिस्तान में एक समाजवादी गणराज्य की स्थापना की थी। अमेरिका ने वहां कट्टरपंथी तत्वों को जुटाया, उन्हें आर्थिक मदद दी, ओसामा बिन लादेन को पैदा किया और तालिबान का गठन किया।

फिलीपींस में कम्युनिस्टों की न्यू पीपल्स आर्मी के खिलाफ मुस्लिम बहुल क्षेत्र में अब्बू सैयफ नामक एक आतंकी को अमेरिका ने खड़ा किया और उसके जरिये फिलीपींस के कम्युनिस्टों के नरसंहार की कोशिश की। समूचे अरब देश में जहां-जहां भी प्रगतिशील इस्लाम के समर्थक सत्ता में थे उनका बहुत सुनियोजित ढंग से सफाया किया गया और कट्टरपंथी इस्लामिक तत्त्वों को सत्ता तक पहुँचाया गया। कट्टरपंथी तत्वों को मदद पहुँचकर प्रगतिशील तत्वों और वामपंथियों का सफाया करने का अमेरिकी प्रयोग सफल रहा।

पूंजीवाद सदैव अपने निहित स्वार्थों की पूर्ति के लिए कट्टरपंथ को बढ़ावा देता है और कट्टरपंथ पूंजीवाद पर आश्रित होने के कारण पूंजीपतियों की लूट का खुला समर्थन करता है। हमे पूंजीवाद और कट्टरपंथ के गठजोड़ को समझना होगा। ईराक़ में अमेरिकी नेतृत्व में पूंजीवादी देशों के साम्राज्यवादी हमले के बाद इस्लामिक स्टेट जैसा बड़ा आतंकी संगठन पैदा हुआ। पूरी दुनिया के कट्टरपंथ के तार अमेरिका से जुड़े हुए हैं। भारत में चाहे खालिस्तानी आतंकी हो या भगवा कट्टरपंथी सभी को अमेरिकी समर्थन व संरक्षण प्राप्त है।

कम्युनिस्ट कट्टरपंथ के उभार को रोकने में रणनीतिक रूप से विफल रहे हैं, जिसके परिणाम स्वरूप आज धार्मिक उन्माद सम्पूर्ण विश्व में चर्मोत्कर्ष पर है। ये फासीवाद विरोधी मोर्चा बनाते रहे और साम्प्रदायिकता की खोखली आलोचना करते रहे। ये प्रगतिशील तत्वों को उस तरह की ठोस मदद नहीं पहुंचा सके, जैसे अमेरिका ने कट्टरपंथी तत्वों को पहुँचाई।

अमेरिका के नेतृत्व में पूंजीवादी देशों ने सभी धर्मों की कट्टरपंथी ताकतों के साथ गठजोड़ बना लिया और वामपंथी उसके जवाब में सभी धर्मों के प्रगतिशील तत्वों के साथ गठजोड़ करने में बुरी तरह से असफल रहे, जिसकी एक बड़ी वजह कम्युनिस्टों की धर्म सम्बन्धी गलत अवधारणा है। ये लोग धार्मिक प्रगतिशील तत्वों को भी त्याज्य समझते हैं।

ये धर्म की अफीम बताकर आलोचना किये जाते हैं और धार्मिक उन्माद, कट्टरपंथ, अंधविश्वास बढ़ता जाता है। अगर ये लोग एक रणनीति के तहत काम करें और धर्म के सभी प्रगतिशील तत्वों को अपने साथ जोड़ ले तो धार्मिक उन्माद, कट्टरता और अंधविश्वास को बड़ी आसानी से खत्म किया जा सकता है। एक बात तय है कि धार्मिक प्रगतिवादियों को साथ लिए बिना कोई भी सकारात्मक बदलाव नहीं किया जा सकता। यदि आप धर्म का उन्मूलन भी करना चाहें तो धार्मिक समुदाय के एक बड़े प्रगतिशील तबके के सहयोग से ही यह संभव होगा।

कट्टरपंथ का सामना प्रगतिशील तत्वों की मदद से ही किया जा सकता है। हमें कट्टरपंथ के खिलाफ संघर्ष में प्रगतिशील तत्वों को हर संभव मदद पहुँचानी चाहिए। अन्याय, शोषण और कट्टरपंथ के विरुद्ध चल रहे सभी संघर्षों का समर्थन करना चाहिए और सभी प्रगतिशील तत्वों के साथ एकजुटता प्रदर्शित करनी चाहिए। कम्युनिस्ट अगर अपनी पुरानी गलतियों से सबक ले एक ठोस रणनीति बनाएं तो अन्याय, शोषण और कट्टरपंथ के खिलाफ एक नए संघर्ष की शुरुआत की जा सकती है।

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