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मगर जमीन पर काम कर रहा कांग्रेस कार्यकर्ता नहीं है आप के साथ गठबंधन का पक्षधर, दूसरी तरफ केजरीवाल को इल्म है कि एक बार दिल्ली हाथ से निकल गई तो फिर दोबारा सत्ता हासिल करना हो जाएगा लगभग नामुमकिन…

दिल्ली से स्वतंत्र कुमार की रिपोर्ट

जनज्वार। आपको शायद हैरानी हो रही होगी की कांग्रेस के बार बार मना करने के बाद भी आम आदमी पार्टी के मुखिया और दिल्ली के मुख्यमंत्री क्यों कांग्रेस के साथ गठबंधन करने के लिए गिड़गिड़ा रहे हैं। दरअसल उन्हें इस बात का इल्म है कि 2019 में होने जा रहे लोकसभा चुनाव में न तो उन्हें पंजाब और न हरियाणा से एक भी सीट जीतने की उम्मीद है, जबकि 2014 के लोकसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी के पूरे देश में सिर्फ पंजाब से ही 4 सांसद जीत कर आये थे।

राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो इस बार आप के प्रत्याशियों की पंजाब में जमानत भी बच जाये वही बड़ी बात होगी, जबकि देशभर में तो इससे भी बुरी गत होने जा रही है। अरविन्द केजरीवाल को सिर्फ दिल्ली से उम्मीद है और यहाँ भी तभी कोई सीट आ सकती है जब आप का कांग्रेस के साथ गठबंधन होता है।

भले ही कांग्रेस के साथ आप के गठबंधन को लेकर सोशल मीडिया पर अरविन्द केजरीवाल का भद्दा मजाक उड़ाया जा रहा हो, लेकिन केजरीवाल को ये बात अच्छे से पता है कि यदि कांग्रेस के साथ दिल्ली में गठबंधन नहीं हुआ तो उनकी पार्टी के अस्तित्व पर संकट खड़ा हो जायेगा। हालाँकि अरविन्द केजरीवाल तो पंजाब और हरियाणा में भी कांग्रेस के साथ गठबंधन चाहते हैं, लेकिन दिल्ली की तरह पंजाब और हरियाणा कांग्रेस की लोकल यूनिट ने आप के साथ गठबंधन को लेकर साफ़ इंकार कर दिया है।

दरअसल लोकसभा चुनाव संपन्न होने के बाद इसी वर्ष अक्टूबर, 2019 में हरियाणा विधानसभा के चुनाव होने हैं, दिल्ली और पंजाब के बाद अरविन्द केजरीवाल ने हरियाणा पर भी फोकस किया हुआ है, केजरीवाल लगातार हरियाणा में सभाएं कर रहे हैं। पार्टी ने हरियाणा में प्रचार-प्रसार पर भी काफी पैसा खर्च कर दिया है।

हरियाणा में आम आदमी पार्टी से जुड़े एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि केजरीवाल को पता है हरियाणा से दिल्ली काफी निकट है, इसलिए हरियाणा में मेहनत करने से कुछ सीट आ सकती हैं, लेकिन यदि पार्टी लोकसभा चुनाव में एक भी सीट दर्ज़ नहीं कर पाई तो हरियाणा के विधानसभा चुनाव में पार्टी की संभावना शून्य हो जाएगी।

हरियाणा में बनी नई पार्टी जननायक जनता पार्टी (JJP) के साथ भविष्य में विधानसभा चुनाव में आप की गठबंधन की कोशिश भी शून्य हो जाएगी।

आप सुप्रीमो केजरीवाल को इस बात का इल्म भी है कि पहले लोकसभा चुनाव में शिकस्त मिलने पर फिर हरियाणा के विधानसभा चुनाव में बुरी गत होने के सिर्फ 3 महीने के बाद दिल्ली विधानसभा के चुनाव होने हैं और दिल्ली भी हाथ से निकल गई तो फिर पार्टी के अस्तित्व पर न केवल खतरा मंडराएगा, बल्कि पार्टी खत्म भी हो सकती है।

अरविन्द केजरीवाल को पता है कि एक बार दिल्ली से सत्ता हाथ से निकल गई तो फिर दोबारा सत्ता हासिल करना लगभग नामुमकिन हो जायेगा। यही वजह है कि केजरीवाल अपने डमी कैंडिडेट उतार कर कांग्रेस के दफ्तर पर प्रोटेस्ट करके गठबंधन करने के लिए हर कोशिश में लगे हुए हैं, क्योंकि आम आदमी पार्टी ने अभी तक अपने जितने भी 6 उम्मीदवार उतारे हैं, वे अपने दम पर 1 लाख वोट भी हासिल कर लें, तो बड़ी बात होगी।

अरविन्द केजरीवाल खुले तौर पर लगभग गिड़गिड़ाने की स्थिति तक कांग्रेस और राहुल गाँधी से दिल्ली में गठबंधन की कोशिश कर रहे हैं। यह बात बनेगी की नहीं ये तो आने वाला समय ही बताएगा, लेकिन कभी अरविन्द केजरीवाल के साथी रहे कुमार विश्वास और कपिल मिश्रा, पत्रकार आशुतोष जैसे लोग खुले तौर पर कांग्रेस से गठबंधन के लिए लालायित केजरीवाल की हंसी उड़ा रहे हैं, मगर केजरीवाल को पता है कि उनका गठबंधन नहीं हुआ तो पार्टी खत्म हो जाएगी।


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