प्रतीकात्मक फोटो

12 सितंबर 2018 को फोर्स के सिपाहियों ने एक आदिवासी महिला का बलात्कार किया, पीड़ित आदिवासी महिला ने बताया सबसे पहले सेना के जवानों द्वारा उसे नंगा किया गया, फिर उसके स्तनों को खींचा गया, गुप्तांग मे जवानों ने उंगली लगाई। महिला रो रही थी, चीख रही थी, बचाने वाला कोई नहीं…

लिंगाराम कोडोपी की रिपोर्ट

बस्तर में लोकतंत्र और शांति तलाश करने से आपको न लोकतंत्र मिलेगा और न ही शांति। शहरों में कुछ हद तक लोकतंत्र और शान्ति है, जहां संवैधानिक अधिकारों और नागरिक अधिकारों की बात सुनी जाती है, लेकिन बस्तर संभाग के अंदरूनी इलाकों में तो सैन्य नीतियां चलती हैं। जहां एक तरफ माओवादी हैं, वहीं दूसरी तरफ CRPF फोर्स, कोबरा फोर्स, बस्तर बटालियन व पुलिस प्रशासन की गैरकानूनी गतिविधियाँ व आदिवासियों के साथ नक्सल के नाम पर क्रूरता का व्यवहार चलाया जाता है।

मैं, सोनी सोरी, बेलाभाटिया, पुष्पा रोकड़े, तमालिका और संजय पंत हम सभी छत्तीसगढ़ राज्य के बस्तर संभाग बीजापुर जिला, बासागुड़ा क्षेत्र के कोरसेगुड़ा गाँव में 3 जनवरी, 2019 को गये थे। कोरसेगुड़ा गाँव से हमें लगातार फोन आ रहा था कि गाँव में फोर्स के जवानों द्वारा कई घटनाएं करी गई हैं, आप लोग जाँच करने आइये। हम कोरसेगुड़ा गाँव पहुंचे। जिला दंतेवाड़ा के गीदम से बीजापुर जिला जाते समय कही चेकिंग नहीं हुई, लेकिन बीजापुर जिला से हम बासागुड़ा क्षेत्र के कोरसेगुड़ा गाँव के लिए निकले तो बहुत सी जगहों पर वाहन नम्बर और वाहन चालक का नाम लिखवाना पड़ा।

हर CRPF कैम्प में एक जवान गाड़ी के अंदर झांककर देखने के लिए गाड़ी के नजदीक आता और देख कर चला जाता। हम सारकेगुड़ा गाँव के नजदीक पहुंचे, वहां एक CRPF कैम्प है। हमें रोक लिया गया और CRPF के जवान ने कार्ड दिखाने को कहा, हम सभी के पास अपना परिचय कार्ड था। कुछ मीडिया साथी भी हमारे साथ थे। साथ ही सोनी सोरी का अंगरंक्षक भी मौजूद था।

CRPF के जवान ने सोनी के अंगरक्षक को कहा कि यह गाँव बहुत बदमाश हैं, संभल कर चलना। सोनी के अंगरक्षक ने जवाब दिया कि मैं अकेला हूं, क्या संभालूंगा? हम आगे बढ़े जैसे ही गाँव पहुंचे रास्ते में एक बैनर विधानसभा चुनाव के विरोध का मिला जिसमें फर्जी चुनाव का ज़िक्र था। हम गाँव पहुंचे तब हमें देख पूरे गाँव के लोग हमारे सामने अपनी व्यथा सुनाने के लिए इकट्ठा हो गये।

गाँव वालों में एक महिला थी, जिसके साथ 12 सितंबर 2018 को फोर्स के सिपाहियों ने बलात्कार किया था। वह महिला सोनी सोरी को स्थानीय गोंडी भाषा में बता रही थी। महिला ने बताया कि सबसे पहले उसे नंगा किया गया, फिर उसके स्तनों को खींचा गया, गुप्तांग मे जवानों ने उंगली लगाई। महिला रो रही थी, चीख रही थी, बचाने वाला कोई नहीं।

महिला के बताये अनुसार जब जवान यह करतूत कर रहे थे तब साथ-साथ अन्य सिपाहियों द्वारा इस महिला का वीडियो भी बनाया जा रहा था। उस महिला के साथ तीन जवानों ने बारी-बारी से बलात्कार किया। क्या ये हैं मेरे भारत देश के रक्षक? यह जवान आदिवासियों की सुरक्षा के लिए आये हुए हैं या कमजोर आदिवासी महिलाओं का पोर्नोग्राफिक वीडियो बनाने?

दूसरी महिला सोनी को बताती हैं कि वह महिला धान को कोठार में बैठी हुई थी, फोर्स के जवान उस कोठार के पास आये, महिला ने उन फोर्स के जवानों से बस इतना कहाँ कि जूते पहन कर धान के कोठार में प्रवेश मत कीजिए। उस महिला का फोर्स के जवानों को इतना कहना ही गुनाह हो गया। फोर्स के दो जवान महिला को पकड़ लिए, महिला के गले में रस्सी बाँध दी। महिला गर्भवती थी। फोर्स के जवानों ने दोनों तरफ से रस्सी को खींचा, महिला फड़फड़ाई तो फोर्स के जवानो ने छोड़ दिया। महिला हमें रोते हुए बता रही थी कि सुरक्षा में आये हुए जवान हमारे साथ इस प्रकार का व्यवहार करेगें तो हम कैसे जिएंगे?

जहाँ फोर्स के जवानों को आदिवासी संस्कृति का सम्मान करना चाहिए, वहाँ फोर्स गुंडागर्दी कर रही हैं। उसी बीच उसी गाँव के ऊपर से दो हेलीकाप्टर गुजरे, कोरसेगुड़ा गाँव के ग्रामीण हमें कहने लगे कि तर्रेम कैम्प में फोर्स के लिए राशन जा रहा हैं। तर्रेम गाँव के ग्रामीण भी हमसे मिलने आये हुए थे, और बता रहे थे की फोर्स पूरे तर्रेम गाँव के आसपास फैली हुई हैं। हम गाँव वालों को बोले की फ़ोर्स कुछ नहीं करेगी, आप लोग अपनी व्यथा बताइये।

गाँव वाले हमें सुनाने लगे। गाँव की घटनाओं को सुनते-सुनते 3 बज गये। मैं कोरसेगुड़ा और तर्रेम गाँव के युवाओं के साथ अलग बैठकर बातचीत कर रहा था। एक युवा दौड़ते हुए हमारे पास आया और बोला कि फोर्स के जवान इसी तरफ आ रहे हैं भागो। युवा लगभग 50 से 60 थे। मैं युवाओं को बोला कि मत भागो, लेकिन युवाओं ने मुझसे कहा हमारे पास भागने के अलावा कोई रास्ता नहीं हैं। नहीं भागे तो फोर्स हमें नक्सल के नाम पर पकड़ेगी और फर्जी मामलों में जेल भेज देगी।

हमें थाने से या जेल से छुड़वाने के लिए हमारे परिवारों के पास पैसे नहीं हैं। इतना कहकर जंगल की ओर युवा भाग गये। मैं अकेला रह गया, फोर्स को मेरी ओर आता देख मै अपनी टीम के अन्य सदस्यों के पास आ गया। फोर्स भी उसी जगह पर पहुंची। युवाओं को भागता देख धडधड़ा के फोर्स के जवान और उनका अधिकारी हमारे पास आया और कहने लगा कि इन सभी का वीडियो और फोटो ले लो। हम चुपचाप खड़े रहे। कोरसेगुड़ा गाँव के ग्रामीण कुछ घटनाओं के बारे में सोनी सोरी और पुष्पा रोकड़े को बता चुके थे।

सोनी और पुष्पा ने फोर्स के अधिकारी से कहा की आप लोगों ने गाँव में क्या किया हैं? फोर्स के अधिकारी का जवाब था हमने क्या किया है? आप लोगों को किसने बताया? पुष्पा रोकड़े ने कहा कि सरपंच व गाँव के ग्रामीणों ने। फोर्स के अधिकारी ने गाँव के ग्रामीणों को गुस्से से देखा और कहा की इनको कल देख लेंगे।

कोरसेगुड़ा गाँव के ग्रामीण हमें आगे 23 दिसंबर 2018 की घटना बताते हैं कि सुबह के 4 बजे थे गाँव के युवा खेती व धान मिंजाई के लिए अपने-अपने कोठारो में जा रहे थे। उसी बीच फोर्स ने गाँव में दबिश दी और गाँव के 13 युवाओं को पकड़कर बासागुड़ा थाना लेकर आये। उन युवाओं के नाम हैं सेमला छन्नू/ सिखा, सेमला रामा/ड़ोग्गा, सेमलालच्छू/ड़ोग्गा, सेमला भीमा/सुक्कू, सेमला आयतू/ सुकलू, पुनेम सुक्कू/आयतू, पुनेम सुकराम / बिच्छेम, मोड़ियाम हुँगा / पाण्ड़ू, सेमला आयतू /लक्कू, सेमला सुक्कू /सन्नू, सेमला सोनू/बुधराम।

कोरसेगुड़ा गाँव से पहले भी नक्सल प्रकरण में जेल गये थे। उनके नाम हैं- कंकेम लच्छू/ सुकलू, पदम बिच्चेम/ पाण्ड़ू, इन दो युवाओं को दुबारा फर्जी नक्सल प्रकरण बनाकर जेल भेज दिया गया। गाँव के सारे ग्रामीण युवाओं को छुड़ाने के लिए थाना आये, ग्रमीणों के अनुसार बासागुड़ा थाना के थानेदार ने ग्रामीणों से युवाओं को छोड़ने के बदले में दो युवाओं से पंद्रह-पंद्रह हजार और दो युवाओं से बीस-बीस कुल रकम 70,000 रुपये लिये और छोड़ दिया।

ऐसी कई घटनाएं हैं जो कि पुलिस प्रशासन की गैरकानूनी गतिविधियों को दर्शाती हैं। क्या इस प्रकार के सुरक्षा कर्मियों द्वारा आदिवासियों के साथ व्यवहार से बस्तर में शांति संभव है? सवाल हमारा है, जवाब सरकार को देना हैं। छत्तीसगढ़ राज्य के कांग्रेस सरकार से आदिवासी क्या उम्मीद कर सकते हैं बताइए?

(यह रिपोर्ट और वीडियो लिंगाराम कोडोपी के फेसबुक से)


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