Last Update On : 11 09 2018 09:24:14 AM

दूरदर्शन के एक लाइव शो में रीता जितेंद्र साझा कर रही थीं अपने जीवन के तमाम उतार चढ़ावों को, उसी दौरान पड़ गया दिल का दौरा

जनज्वार। लाइव शो के दौरान ही किसी की मौत हो जाना, ऐसा अक्सर कहानियों—फिल्मों में पढ़ते—देखते हैं। मगर ऐसा ही कुछ हुआ डोगरी भाषा की मशहूर लेखिका सामाजिक कार्यकर्ता और मशहूर शिक्षाविद के बतौर ख्यात रीता जितेंद्र के साथ।

गौरतलब है कि कल सुबह 85 वर्षीय रीता जितेंद्र जब दूरदर्शन के कश्मीर चैनल पर अपनी जीवन यात्रा को दर्शकों के साथ साझा कर रही थी, तभी उन्हें अचानक दिल क दौरा पड़ गया और वह बेहोश होकर गिर गयीं।

रीता न सिर्फ लेखिका और सामाजिक कार्यकर्ता बल्कि बतौर कलाकार और शिक्षाविद भी जानी जाती थीं। जम्मू में रहने वाली रीता जितेंद्र कल दूरदर्शन के कश्मीर चैनल में ‘गुड मॉर्निंग कश्मीर’ शो में अतिथि के बतौर अपनी बात रख रही थीं।

जब रीता एक लेखक के तौर पर अपनी यात्रा का जिक्र कर रही थीं तभी उनकी आवाज अचानक रुक गईं और वह कुर्सी पर ही बेहोश होकर लुढ़क गईं। जब अचानक उनकी सांसें तेज हो गयीं तो शो में मौजूद लोग घबरा गए।

रीता जितेंद्र को तुरंत एसएमएचएस अस्पताल ले जाया गया, जहां उन्हें डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। उनका पार्थिव शरीर अंतिम संस्कार के लिए जम्मू पहुंचाया गया।

रीता जितेंद्र के अंतिम पल जो हो गए लाइव

उनकी मौत पर जम्मू कश्मीर के राज्यपाल सत्य पाल मलिक ने शोक व्यक्त किया और कहा कि मशहूर लेखिका की आत्मा की शांति और शोकसंतप्त परिवार को यह दुख सहने की ताकत देने की प्रार्थना की।

रीता जितेन्द्र परेड महिला कॉलेज से प्रिंसिपल पद से सेवानिवृत्त हुई थीं। उसके बाद वे अप्रैल 1993 से 1995 तक जम्मू-कश्मीर कला संस्कृति और भाषा अकादमी में सचिव पद पर रहीं। सेवानिवृत्त होने के बाद साहित्य जगत में उनकी सक्रियता बढ़ गई। अभी वे राज्य कल्चर अकादमी में हिन्दी एड्वाइजरी बोर्ड की सदस्य भी थीं।

गौरतलब है कि रीता जितेन्द्र ने फिमेल एक्टिविस्ट के तौर पर महिलाओं के न्याय के लिए काफी संघर्ष किया है। जब देश आजाद हुआ था तो वह 8 साल की थीं, तब उन्होंने चाइल्ड आर्टिस्ट के तौर पर लाहौर रेडियो स्टेशन में ऑडिशन दिया था। कई किताबें लिख चुकीं रीता ने समाज के उस वर्ग को आवाज दी, जिसे बहुत कम लोग समझ पाते हैं। इसके अलावा उन्होंने जम्मू-कश्मीर रेडियो स्टेशन में कई ड्रामाओं में अपनी आवाज दी।