Last Update On : 20 10 2018 07:53:11 PM
प्रतीकात्मक फोटो

पढ़ा—लिखा तबका भी इस खबर को बिना जांचे—परखे यह कहकर प्रसारित कर रहा है कि अंधविश्वास की इंतहा वाली घटना में एक परिवार ने अपने ही बेटे का सिर धड़ से अलग कर देवी को चढ़ा दिया….

जनज्वार। सोशल मीडिया पर बड़े पैमाने पर एक फोटो और वीडियो वायरल हो रही है, जिसमें एक बच्चे की कटी हुई गर्दन का फोटो और उसके साथ नारे लगाते लोग दिखाई दे रहे हैं। लोग सोशल मीडिया पर इसे तरह तरह से व्याख्यायित कर रहे हैं। मगर यह नरबलि का सोशल मीडिया का सबसे बड़ा झूठ है।

सबसे बड़ी बात तो यह कि पढ़ा—लिखा तबका भी इस खबर को बिना जांचे—परखे यह कहकर प्रसारित कर रहा है कि अंधविश्वास की इंतहा वाली घटना में एक परिवार ने अपने ही बेटे का सिर धड़ से अलग कर देवी को चढ़ा दिया

इसका सच उजागर करते हुए प्रसिद्ध दलित सामाजिक—राजनीतिक कार्यकर्ता भंवर मेघवंशी लिखते हैं, ‘भीलवाड़ा जिले के गंगापुर थाना क्षेत्र के खाखला गांव में कल एक बच्चे की बलि संबंधी जो खबर सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही है,वह सरासर झूठ है। यह गांव जादूगरी के करतब करने के लिए प्रसिद्ध है, जो विगत 100 बरसों से ऐसे करतब दिखाते रहते हैं।’

पत्रकार लखन सालवी कहते हैं, ‘मैं इस गांव से 15 किलोमीटर दूर ही रहता हूं, हर वर्ष दशहरे के दिन यह करतब भोपा लोग बताते हैं। यह गांव अंधविश्वास के लिए प्रसिद्ध है, मूलतः ये जादू है। इस फोटो में थाली में लड़के का सिर है तथा इसकी धड़ मंदिर में पड़ी है। भोपा लोग तालाब तक जाते हैं, शोभा यात्रा में हजारों लोग होते हैं, उसके बाद सभी वापस मंदिर पहुंचते हैं। थाली में रखा सिर वापस मंदिर में ले जाया जाता है और फिर मंदिर से सिर व धड़ वाला लड़का बाहर निकलता है। ऐसा बताया जाता है। लेकिन वास्तव में ये जादू है, एक नवार वाली चारपाई को ऐसे बनाया जाता है कि लड़के की धड़ नवार की दो परत के सुरक्षित सेट कर दी जाती है और थाली के बीच में छेद है। जादूगरी के लिए प्रसिद्ध है खांखला गांव, नरबलि की घटना बताना झूठ है।’

पत्रकार लखन सालवी के मुताबिक ‘यह गांव पाखंड और अंधविश्वास का गढ़ है। यह सिर्फ भोपा लोगों का जादू है, नरबलि जैसी कोई घटना नहीं।’