Last Update On : 05 07 2018 06:13:59 PM

भूमि अधिग्रहण कानून में संशोधन के खिलाफ विपक्षी दलों के झारखंड बंद का रांची सहित आसपास के जिलों में खासा असर दिखा…

जनज्वार। आज सुबह से ही कांग्रेस, झाविमो, माले और जेएमएम के कार्यकर्ता अपनी-अपनी पार्टियों के झंडे के साथ प्रदर्शन कर रहे थे। हजारों के संख्या में पूरे राज्य भर के प्रदर्शनों में शामिल लोगों ने मांग रखी कि जब तक भूमि अधिग्रहण कानून में संशोधन कानून का सरकार वापस नहीं लेती, तब तक संघर्ष जारी रहेगा।

भूमि अधिग्रहण कानून में संशोधन कि खिलाफ बुलाया गया झारखंड बंद काफी असरदार रहा। राज्‍य से अब तक जो आंकड़े मिले हैं उसके अनुसार लगभग 10 हजार बंद समर्थकों को गिरफ्तार किया गया है। जानकारी के अनुसार रांची में 447, जमशेदपुर में 2304, धनबाद में कुल 1212 लोग लिये गये हिरासत में, चाईबासा में 184, सरायकेला में 436 बंद समर्थक गिरफ्तार किए गए हैं।

पर झारखंड पुलिस प्रवक्ता और एजीजी आॅरशंस आरके मलिक के मुताबिक पुलिस ने सिर्फ 500 लोगों को गिरफ्तार​ किया है और प्रदर्शनकारी सिर्फ एक जगह रेल रोकने में सफल रहे थे।

झारखंड बंद को माओवादियों ने भी समर्थन किया है। प्रतिबंधित संगठन भाकपा माओवादी ने झारखंड रिजनल कमेटी के प्रवक्ता अमन ने बुधवार को प्रेस बयान जारी कर कहा कि जब तक झारखंड में झारखंडी जनता का राज स्थापित नहीं होगा, तब तक संघर्ष चलाने का संकल्प लेना होगा। कमेटी ने आम मजदूर, किसान, महिला, छात्र–युवा आदि से बंद को पूर्ण रूप से सफल बनाने के लिए आगे आने का अाह्वान किया है।

प्रदेश के मुख्यमंत्री रघुवर दास ने भी बंद को असफल बताया और कहा कि विपक्ष की एकता विकास विरोधी है। वहीं भाजपा प्रवक्ता दीपक प्रकाश ने प्रेस कॉन्‍फ्रेंस कर कहा कि विपक्ष अखबार और चैनलों में छाये रहने के लिए झारखंड बंद बुलाना पड़ा है, पर विपक्ष की इस नौटंकी को राज्‍य की जनता ने नकार दिया और बंद बेअसर रहा है।

पुलिस ने बोर्ड लगा रखा था कि आज झारखंडी जनता एक ‘नाजायज मजमा’ है। इस बारे में आदिवासी मसलों के लेखक एके पंकज लिखते हैं, ‘आज भले ही पुलिस ने इस आंदोलन का नाजायज मजमा कहा हो, लेकिन इसी नाजायज मजमे के आगे आने वाले दिनों में भाजपा सरकार को गिड़गिड़ाना है।’