Last Update On : 05 11 2018 11:36:39 AM
मुख्यमंत्री के हाथों सम्मानित होते डिपुटी कमिश्नर राहुल कुमार सिन्हा

उपायुक्त ने बाकायदा 5 सितंबर को चिट्ठी लिखकर मुख्यमंत्री से शिकायत की है कि देवघर से प्रकाशित प्रभात खबर अखबार नकारात्मक खबरें छापता है और इससे सरकार की छवि खराब हो रही है। क्या अखबार और मीडिया सरकार और सत्ता के पॉजिटिव-नेगेटिव रिमार्क्स के आधार पर निकलेंगे….

जनज्वार, देवघर। पहले से ही गोदी मीडिया में तब्दील हो चुके मीडिया के थोड़ी—बहुत बची पत्रकारिता को भी खत्म करने का काम भाजपा सरकार में शुरू हो चुका है। इसकी बानगी है झारखंड के देवघर के उपायुक्त द्वारा मुख्यमंत्री के नाम लिखा गया खत, जिसमें उन्होंने मीडिया द्वारा नकारात्मक खबरें छापने पर सरकार की धूमिल हो रही छवि के मद्देनजर आवश्यक कार्रवाई की मांग तक कर डाली है।

झारखंड के मुख्यमंत्री के खास माने जाने वाले देवघर के उपायुक्त (डिपुटी कमीश्नर) राहुल कुमार सिन्हा ने बाकायदा 5 सितंबर को चिट्ठी लिखकर मुख्यमंत्री से शिकायत की है कि देवघर से प्रकाशित प्रभात खबर अखबार नकारात्मक खबरें छापता है और इससे सरकार की छवि खराब हो रही है। ऐसे में सवाल है कि क्या अखबार और मीडिया सरकार और सत्ता के पॉजिटिव-नेगेटिव रिमार्क्स के आधार पर निकलेंगे।

झारखंड सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को उपायुक्त देवघर की तरफ से लिखे गए पत्र में लिखा है कि ‘माननीय मुख्यमंत्री झारखंड द्वारा भी श्रावणी मास के प्रत्येक सोमवार को कांवरिया श्रद्धालुओं के साथ सीधा संवाद स्थापित करते हुए उनको मिल रही सुविधाओं का स्वयं हाल जाना। सभी श्रद्धालुओं ने राज्य सरकार और जिला प्रशासन की ओर से की गई व्यवस्थाओं की भूरि भूरि प्रशंसा की। मेला पूरी तरह सफल रहा एवं सभी कांवरिया श्रद्धालु एक सुखद अनुभव लेकर अपने गंतव्य की ओर प्रस्थान किए।’

पत्र में आगे लिखा गया है, ‘विश्वस्तरीय इस प्रकार के मेले में लाखों श्रद्धालु जहां नित्य जलार्पण करते हैं, उसके सफल संचालन एवं राज्य के बाहर एक सकारात्मक संदेश प्रेषित करने में मीडिया की अहम भूमिका होती है। इस संदर्भ में सभी इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया द्वारा राज्य सरकार एवं जिला प्रशासन का भरपूर सहयोग किया गया। परंतु देवघर से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र प्रभात खबर की ओर से श्रावणी मेले की तैयारी से लेकर पूरे श्रावण मास तक लगातार नकारात्मक खबरों का प्रकाशन किया गया। अब श्रावण मास बीत जाने के बाद भी इनकी नकारात्मक रिपोर्टिंग समाप्त नहीं हुई है। भादो मेला में भी इनकी ओर से नकारात्मक रिपोर्टिंग की जा रही है। इससे न केवल जिला प्रशासन की बल्कि राज्य सरकार की प्रतिष्ठा भी धूमिल हो रही है।’

पत्र में आगे लिखा गया है, ‘जहां पूरा प्रशासनिक महकमा सरकार की छवि को और बेहतर एवं राज्य की प्रसिद्धि को बाहर तक फैलाने तक फैलाने का प्रयास कर रहा है, वहीं प्रभात खबर की ओर से की जा रही ऐसी रिपोर्टिंग से जिला प्रशासन एवं राज्य सरकार की छवि धूमिल हो रही है। यह जिला प्रशासन एवं राज्य सरकार के लिए अत्यंत ही गंभीर विषय है। अत: अनुरोध है कि उपर्युक्त के संदर्भ में आवश्यक कार्रवाई की जाए।’

उपायुक्त द्वारा लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को नियंत्रित करने की कोशिश को मीडिया की स्वतंत्रता में दखलअंदाजी ठहराते हुए प्रेस एसोशिएसन के अध्यक्ष और वरिष्ठ पत्रकार जयशंकर गुप्त कहते हैं, अगर डीएम को किसी खबर पर एतराज है या किसी खबर से सरकार की छवि खराब होने जैसी बात होती है तो उसके लिए उचित माध्यमों का इस्तेमाल किया जा सकता है, मगर इस तरह की हरकत मीडिया अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला है। अगर अखबार की किसी खबर से नाराजगी या असंतोष है या लगता है कि गलत खबर लिखी गयी है तो संपादक के नाम खत लिखा जा सकता है, प्रेस काउंसिल का दरवाजा खटखटा सकते हैं या फिर अदालत की शरण ले सकते हैं। मगर इस तरह की कायराना हरकत सरासर गलत है जिसकी हम निंदा करते हैं और बात बढ़ेगी तो इसके खिलाफ आंदोलन भी करेंगे।’

डिपुटी कमिश्नर राहुल कुमार सिन्हा का प्रभात खबर की नैगेटिव न्यूज के खिलाफ लिखा गया पत्र

जयशंकर गुप्त आगे कहते हैं, सरकार के पॉजिटिव—नेगेटिव रिमार्क के आधार पर मीडिया को नियंत्रित करने का काम सरकार का नही है। कोई भी अखबार—टीवी चैनल या अन्य माध्यम सरकार के भोंपू नहीं हैं। उसका भोंपू बजाने के लिए सूचना और प्रसारण विभाग समेत अन्य सरकारी महकमे हैं। मीडिया सच को बयां करने का माध्यम है। मीडिया बहुलता में आज गोदी मीडिया में तब्दील हो चुका है, बावजूद उसके बचे—खुचे अखबारों—चैनलों या अन्य माध्यमों को नियंत्रित करने का काम कर सरकार असहमति के स्वरों को एकदम दबाने का काम कर रही है। सरकार के किसी भी गलत फैसलों, कार्यक्रमों का विरोध करना या सच बयां करना ही मीडिया का काम है।