फोटो : अमित टोपनो के फेसबुक वॉल से

झारखंड के युवा आदिवासी पत्रकार अमित तोपनो की कर दी गई कल 9 दिसंबर की रात हत्या, तपकारा (खूंटी) के निचितपुर गांव के रहने वाले अमित करते थे एक टीवी चैनल के लिए काम….

जनज्वार। गोदी मीडिया के दौर में सच लिखने, सच बोलने और सच दिखाने की कीमत सच्ची पत्रकारिता कर रहे कलम के सिपाहियों को अपनी जान देकर भी चुकानी पड़ रही है। अब तक सच्ची पत्रकारिता करने वाले कई पत्रकार अपनी जान गंवा चुका हैं। हालिया मामला है झारखंड के युवा पत्रकार अमित टोपनो की हत्या का, जिन्होंने पत्थलगड़ी आंदोलन में कई महत्वपूर्ण ​वीडियो बनाए थे, और जो बहुत एक्सक्लूसिव रहे।

उनके जानकारों का कहना है कि उनकी निडरता और साहस से डरकर उनकी ​हत्या कर दी गई होगी, इसमें कोई संशय नहीं है।

आदिवासी मसलों के जानकार और लेखक एके पंकज के फेसबुक से मिली जानकारी के मुताबिक आदिवासी युवा पत्रकार अमित तोपनो की झारखंड में हत्या कर दी गयी है। अमित तोपनो ने पत्थलगड़ी आंदोलन में कई महत्वपूर्ण ​वीडियो बनाए थे, जो एक्सक्लूसिव रहे।

एके पंकज के अनुसार झारखंड के युवा आदिवासी पत्रकार अमित तोपनो की कल 9 दिसंबर की रात हत्या कर दी गई है। तपकारा (खूंटी) के निचितपुर गांव का रहने वाला अमित एक टीवी चैनल के लिए काम करता था।

पत्थलगड़ी आंदोलन में अमित तोपनो साहसी पत्रकारिता का परिचय देते हुए कई एक्सक्लूसिव वीडियो सामने लाए थे। वह बहुत उत्साही और हिम्मती पत्रकार थे। अभी इस युवा और साहसी पत्रकार की हत्या के कारणों का पता नहीं चला है।

युवा पत्रकार की हत्या पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए पारितोष राज लाकरा कहते हैं, मेरी अमित तोपनो से दोस्ती इनके ओला कैब में सवारी करने के क्रम में हुई थी। ये स्वभाव से कट्टर झारखण्डी और आदिवासी मूलवासी एकता के कट्टर समर्थक थे। इनके विचारों से प्रभावित होकर मैंने ही फ़ेसबुक में इनसे दोस्ती का हाथ बढ़ाया था। इस हत्याकांड की उच्च स्तरीय जांच की मांग की जानी चाहिये। सोशल मीडिया द्वारा प्रशासन पर दबाब डाला जाए।

मीडिया में आ रही खबरों के मुताबिक अमित टोपनो ने कुछ दिन पहले पत्रकारिता छोड़कर ओला कैब चलाना शुरू कर दिया था। हालांकि अभी इस खबर की ठीक—ठीक पुष्टि नहीं हो पायी है। पुलिस हत्या के कारणों की जांच में जुट गई है।