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26 जनवरी की अगली सुबह पहले पेज पर दैनिक जागरण लिखता है, ‘एक समुदाय के लोगों ने लगाए पाकिस्तान के समर्थन में नारे, विरोध पर पथराव’

दैनिक जागरण की खबर के कारण अगले दो दिन जलता रहा कासगंज, खबर ऐसी छपी जैसे रिपोर्टर रहा हो वीएचपी का, पेज इंजार्च भाजपा का और संपादक संघ का

जनज्वार। उत्तर प्रदेश के सबसे ज्यादा पढ़े जाने वाले अखबार दैनिक जागरण की खबर का जनज्वार विश्लेषण करे, उससे बेहतर है आप खबर का प्रिंट शॉट पढ़कर खुद तय कर लें कि दंगाइयों की भाषा और अखबार की रिपोर्ट में फर्क क्या है? खबर पढ़ने से साफ हो जाता है कि इस 26 जनवरी के बाद जो कासगंज 27 और 28 को जलता रहा, उसका बड़ा दैनिक जागरण की यह खबर है।

27 जनवरी को पहले पेज पर प्रमुखता से छपी खबर ‘उत्तर प्रदेश में तिरंगा यात्रा के दौरान सांप्रदायिक बवाल, एक की मौत’ इस तरह से इकतरफा हो लिखी गयी है जैसे दंगा, गुंडई, आगजनी आदि के जिम्मेदार मुस्लिम समुदाय के लोग हैं।

जबकि अब तक इस खबर की कहीं कोई पुष्टि नहीं हो सकी है कि वहां मुस्लिमों ने पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाए हों। या फिर एबीवीपी और वीएचपी के लोगों पर कोई हमला किया हो। अलबत्ता एक वीडियो सामने आया है जिसमें तिरंगा फहराने का कार्यक्रम कर रहे मुस्लिम समुदाय के लोगों के साथ हिंदू संगठनों और उनके समर्थकों की भीड़ जरूर गुंडई करती दिखाई दे रही है।

पर इस अखबार ने बवाल के पहले ही दिन लिख दिया कि एबीवीपी के लोगों की 2 दर्जन बाइकें फूंक दी गयीं।

दैनिक जागरण की रपट एबीवीपी और हिंदु संगठनों की भगवा यात्रा, जो अब साफ हो चुका है एक गुंडागर्दी यात्रा थी, को ऐसे पेश कर रहा है जैसे उन्होंने कोई शांति मार्च निकाला हो। रपट की पूरी भाषा हिंदुओं को उकसाने वाली है और यही वजह है कि जो बवाल 26 को ही खत्म हो जाता, उसे इस खबर ने एक्सटेंशन दे दिया।

दैनिक जागरण की खबर कमोबेश कासगंज इलाके के सांसद और कल्याण सिंह के बेटे राजवीर सिंह से मिलती है, जिसमें वह भीड़ को संबोधित करते हुए इस भाषा में बोल रहे हैं मानो वह भारत की जनता के नहीं, हिंदुओं के नेता हैं।

पढ़िए, दैनिक जागरण के संस्करणों की फ्रंट पेज खबर