Last Update On : 21 03 2018 05:29:00 PM

मास्टर साहब चेत जाओ, जमाना बदल गया और लड़कियों को पता है कि उत्पीड़न और आशीर्वाद का फर्क क्या होता है…

जनज्वार। पिछले कुछ वर्षों में कॉलेजों—विश्वविद्यालयों की छात्राएं तो बदल गयी हैं, अपने सम्मान और अधिकारों के प्रति सजग हो गयी हैं, वे अब किसी भी तरह के उत्पीड़न और शोषण को लिहाज और शर्म के नाम पर छुपाना नहीं चाहती हैं, पर लगता है अभी कैंपसों के शिक्षक, प्रोफेसर और प्रबंधकों के लंपट चरित्र में कोई बदलाव नहीं आया है।

मौजूदा मामला केरल के एक कॉलेज से जुड़ा है, जहां के प्रोफेसर ने लड़कियों पर फब्तियां कसते हुए कहा कि तुम्हारे स्तन तरबूज जैसे हैं। वह लड़कियों के पहनावे को लेकर लगातार छींटाकशी और अभद्र टिप्पणियां करता रहता था। 

कॉलेजों—विश्वविद्यालयों के शिक्षकों को लगता है कि लड़की को यूं ही छू देने, कुछ राह चलते बोल देेने, ज्ञान के नाम पर लाइन मारने, थिसिस पूरा करने के बहाने जांघ पर हाथ रगड़ने और मौका मिलते ही उसका स्तन किसी न किसी बहाने टच करने को वह गुरूजी का आशीर्वाद ही मानेगी और सोचेगी कि इसका खुलासा करने से गुरू जी का क्या बिगड़ेगा, बिगड़ेगा तो मेरा।

तो मास्टर साहब चेत जाओ, जमाना बदल गया और लड़कियों को पता है कि उत्पीड़न और आशीर्वाद का फर्क क्या होता है?

अभी जेएनयू के यौन उत्पीड़क गुरू जौहरी का मामला शांत भी नहीं हुआ था कि कल केरल में लड़कियों ने अपने स्तन पर तरबूज लगाकर प्रदर्शन किया। केरल की लड़कियों को ऐसा इसलिए करना पड़ा, क्योंकि गुरू जी रोज—रोज अलग—अलग लड़कियों की छाती को तरबूज से तुलना कर तरह—तरह की राय दिया करते थे, ज्ञान ठेला करते थे।

गुरुजी के स्तन को लेकर की जाने वाली टिप्पणियों से आजिज आकर लड़कियों ने टॉपलैस होकर स्तनों की जगह तरबूज लगा प्रदर्शन किया। यह घटना केरल के कोझिकोड़ के फारूख कॉलेज की है, जहां के प्रोफेसर जौहर मुनव्वर अकसर लड़कियों के स्तनों पर टीका—टिप्पणी करते थे।

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प्रोफेसर कहता था कि, ‘मैं एक कॉलेज का शिक्षक हूं जहां 80 फीसदी लड़कियां हैं ओर उनमें से अधिकतर मुस्लिम। वो लड़कियां धार्मिक परंपरा के आधार पर कपड़े नहीं पहनतीं। लड़कियां अपने स्तनों को हिजाब से नहीं ढकतीं, बल्कि लाल तरबूज के टुकड़े की तरह दिखाती हैं। सीना महिलाओं का ऐसा हिस्सा है जो पुरूषों को आकर्षित करता है।’

प्रोफेसर की इस टिप्पणी के बाद लड़कियों ने टॉपलैस फोटो सोशल मीडिया पर घटना के साथ शेयर करनी शुरू कर दी। अपने स्तनों की जगह तरबूज लगाकर छात्राओं ने तरबूज मार्च भी निकाला।