Last Update On : 05 10 2018 10:11:29 AM

दिल्ली सरकार की सज़ा समीक्षा बोर्ड ने नहीं घटाई सजा, बोर्ड में शामिल थे शासन—प्रशासन के कई प्रभावशाली लोग

वरिष्ठ पत्रकार जेपी सिंह की रिपोर्ट

जनज्वार। दिल्ली के तीन हाईप्रोफाइल मामलों में जेल की सलाखों में कैद मनु शर्मा, सुशील शर्मा और संतोष सिंह को समय से पहले रिहा करने पर सजा की समीक्षा करने के लिए गठित दिल्ली सरकार के बोर्ड ने निर्णय दिया है कि ये तीनों अभी जेल में ही रहेंगे।

गौरतलब है कि ये तीनों हत्याकांड हाई प्रोफाइल रहे हैं। इनमें से मनु शर्मा ने जहां मॉडल जेसिका लाल की हत्या की थी, वहीं सुशील शर्मा ने अपनी पत्नी नैना साहनी और संतोष सिंह ने प्रियदर्शिनी मट्टू का मर्डर किया था।

सजा समीक्षा बोर्ड ने इन तीनों दोषियों की सजा घटना से इनकार कर दिया है। दिल्ली में आज कैदियों की सज़ा पर समीक्षा करने वाले बोर्ड की बैठक में यह फैसला लिया गया है। पहले कयास लगाये जा रहे थे कि इन प्रभावशाली लोगों को सज़ा में रियायत मिल जाएगी।

दिल्ली सरकार के सजा की समीक्षा करने वाले बोर्ड में दिल्ली के गृह मंत्री सत्येंद्र जैन, गृह सचिव, डीजी जेल, लॉ सेक्रेटरी, जॉइंट कमिश्नर ऑफ पुलिस (क्राइम), डिस्ट्रिक जज के अलावा सरकार की तरफ से नियुक्त किए गए चीफ प्रोबेशन ऑफिसर भी शामिल है. बोर्ड ने इन तीनों को राहत देने से इनकार कर दिया।

दक्षिणी दिल्ली में अप्रैल 1999 को एक रेस्‍टोरेंट में मशहूर मॉडल जेसिका लाल की हत्‍या कर दी गई थी। इस मामले में पुलिस ने कांग्रेस नेता विनोद शर्मा के बेटे मनु शर्मा को गिरफ्तार किया। निचली अदालत में मामले की सुनवाई के दौरान कई गवाह अपने बयान से मुकर गए, जिसके बाद फरवरी 2006 में अदालत ने 12 में से नौ आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया।

इस मामले में दिल्‍ली हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई की और दिसंबर 2006 को मनु शर्मा को उम्रकैद की सजा सुनाई। इसके बाद 2010 में उच्चतम न्यायालय ने मनु शर्मा की उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा।

आईपीएस अधिकारी जेपी सिंह के बेटे संतोष सिंह ने वर्ष 1996 में थर्ड ईयर की लॉ स्‍टूडेंट प्रियदर्शनी मट्टू का रेप करने के बाद हत्‍या कर दी थी। इस मामले में संतोष सिंह को पुलिस ने गिरफ्तार किया, लेकिन 1999 में दिल्‍ली की निचली अदालत ने आरोपी को साक्ष्‍यों के अभाव में बरी कर दिया। इसके बाद दिल्‍ली हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए साल 2006 में संतोष सिंह को फांसी की सजा सुनाई।

हालांकि उच्चतम न्यायालय ने इस मामले में संतोष सिंह की सजा को मृत्‍युदंड से बदलकर उम्रकैद कर दिया। इस मामले में संतोष सिंह वर्ष 2006 से जेल में बंद है। नैना साहनी की 2 जुलाई, 1995 को हत्या कर दी गई थी। हत्या के बाद उसके शव को कई टुकड़े किए और अशोक यात्री निवास के बगिया रेस्टोरेंट के तंदूर में जला दिए।

उसी दौरान पैट्रोल ड्यूटी पर लगे दिल्ली पुलिस के जवानों को तंदूर से धुआं उठता दिखा और बदबू से कुछ शक हुआ। तंदूर को देखा गया तो उसमें शव के टुकड़े थे। इसके बाद सुशील शर्मा मौके पर फरार हो गया और बाद में पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया। ट्रायल कोर्ट ने 2003 में सुशील शर्मा को दोषी पाया और फांसी की सजा सुनाई।

इस मामले में नैना की गोली मारकर हत्या करने और उसके शव को ठिकाने लगाने की साजिश में सुशील शर्मा दोषी साबित हुआ था। सुशील को शक था कि पार्टी के एक अन्य वर्कर से उसकी बीवी नैना के संबंध हैं। इस हत्या के लिए मौत की सजा पाए सुशील शर्मा की सजा को हाईकोर्ट ने भी सही माना था, लेकिन उच्चतम न्यायालय ने 2013 में फांसी की सजा से राहत देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई।

उच्चतम न्यायालय ने अपने फैसले में कहा कि यह हत्या संबंधों में कड़वाहट के चलते की गई और इससे समाज के खिलाफ कोई अपराध साबित नहीं होता।