Last Update On : 09 07 2018 01:42:45 PM

जहां डाक टिकट जारी ​कर सरकार ने क्रांतिवीर को सम्मानित करने का काम किया, वहीं उनके वंशजों को सबसे पिछली लाइन में बिठा एक तरह से उनका घोर अपमान भी किया गया…

रामदास तांबे की रिपोर्ट

पुणे, जनज्वार। पुणे के पिम्परी चिंचवड़ में क्रांतिवीर दामोदर हरि चाफेकर की स्मृति में लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन के हाथों डाक टिकट का अनावरण किया गया, मगर अफसोस कि जिस क्रांतिवीर के नाम पर डाक टिकट जारी किया गया उसके वंशजों को सबसे पिछली पंक्ति में बिठाया गया।

गौरतलब है क्रांतिवीर दामोदर हरि चाफेकर के नाम पर आयोजित समारोह में उनके वंशज भी उपस्थित थे। जहां डाक टिकट जारी ​कर क्रांतिवीर को सम्मानित करने का काम किया गया, वहीं उनके वंशजों को सबसे पिछली लाइन में बिठा एक तरह से उन्हें अपमानित भी किया गया।

समारोह में आयोजित लोगों का भी कहना था कि शासन—प्रशासन द्वारा आयोजित इस सम्मान समारोह में कम से कम क्रांतिवीर दामोदर हरि चाफेकर के एक वंशज को तो अगली पंक्ति में स्थान दिया ही जाना चाहिए था।

गौरतलब है कि इस समारोह में केंद्रीय गृह राज्यमंत्री हंसराज आहिर, पालकमंत्री गिरीष बापट, सांसद श्रीरंग आप्पा बारणे, सांसद शिवाजीराव आढलराव पाटील, राज्यसभा सांसद अमर साबले, विधायक गौतम चाबुकस्वार, मुख्य पोस्ट मास्टर जनरल महाराष्ट्र एवं गोवा हरिश अग्रवाल, पिम्परी चिंचवड़ के मेयर नितिन कालजे, पिम्परी चिंचवड़ आयुक्त श्रावण हर्डीकर, चाफेकर स्मारक समिति अध्यक्ष गिरीष प्रभुणे आदि जाने—माने लोग मौजूद थे।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने कहा, देश की स्वतंत्रता में 1857 की परम क्रांति के साथ, इसके बाद के 90 वर्षों के सतत संघर्ष का योगदान रहा। स्वराज के लिए क्रांति के लिए हर एक बलिदानी का, हर एक रक्त की बूंद का हमें अभिमान है। क्रांति के या अहिंसा के सभी क्रांतिकारियों और सत्याग्रहियों को मेरा नमन है।