Last Update On : 05 07 2018 07:40:24 PM

लखनऊ यूनिवर्सिटी में प्रवेश की मांग के लिए आंदोलनरत छात्रा पूजा शुक्ला को उनके एक दर्जन साथियों के साथ उठाकर शहर से करीब 25 किलोमीटर दूर गोंसाईगंज थाने में ले जाया गया। रास्ते में पूजा और उनके साथ गिरफ़्तारी देने वाली दो महिलाओं के साथ मारपीट की गयी और उन्हें देर रात तक थाने में रखा गया…

जनज्वार, लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय का सियासी पारा एक बार फिर बढ़ा हुआ है। विश्वविद्यालय में काउंसलिंग की प्रक्रिया रोक दी गयी और विश्वविद्यालय में साइन डाई लगा दी गयी है। बुधवार 4 जुलाई को परिसर में वीसी और प्रोक्टोरिअल बोर्ड के सदस्यों के साथ हाथापाई और मारपीट की घटना हुई है, जिसमें बताया जा रहा है कि प्रॉक्टर विनोद सिंह, डीएसडब्लू आरके सिंह समेत 12 शिक्षकों को चोटें आयीं हैं।

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने इस मामले का स्वत: संज्ञान लिया है। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस राजेश सिंह चौहान ने इस घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है और यूपी डीजीपी, लखनऊ एसपी, यूनिवर्सिटी के वीसी और रजिस्ट्रार को तलब किया है। लखनऊ विश्वविद्यालय की इस घटना से शासन प्रशासन में हड़कंप मचा हुआ है।

क्या है मामला
लखनऊ विश्वविद्यालय में ये मामला तब शुरू हुआ जब प्रवेश परीक्षा का परिणाम आया, जिसमें योगी आदित्यनाथ को पिछले वर्ष काले झंडे दिखाने वाली छात्र नेत्री पूजा शुक्ला का नाम नहीं था। इस बाबत पूजा शुक्ला 29 जून को वीसी से मिली थीं, जहाँ वीसी एसपी सिंह ने कहा कि “उनका मन नहीं है उन लोगों को एडमिशन देने का।’

यह पूछने पर की क्यों आपका मन नहीं है प्रवेश देने का, जवाब आया कि अराजक तत्व को प्रवेश नहीं है। पूजा शुक्ला ने वीसी एसपी सिंह से कहा कि विश्वविद्यालय के अकादमिक फंड को संघ के कार्यक्रम में लगाये जाने के विरोध में उन्होंने योगी आदित्यनाथ को पिछले वर्ष काले झंडे दिखाए थे, इसलिए उनके साथ ऐसा हो रहा है। वो इस फैसले का विरोध करेंगी।

2 जुलाई को पूजा भूख हड़ताल पर बैठ गयीं। पूजा का कहना था कि उन्होंने एक लोकतान्त्रिक प्रतिरोध किया था, जिसके लिए उन्होंने 26 दिन की जेल भी काटी थी। मामला अभी न्यायालय में है। पर वीसी मामले पर फैसला सुना रहे हैं, वो मेरा भविष्य ख़राब कर देना चाहते हैं। ये राजनीतिक प्रतिशोध है।

भूख हड़ताल में सिविल सोसाइटी का समर्थन
पूजा शुक्ला की भूख हड़ताल को सिविल सोसाइटी का समर्थन मिला। पूर्व कुलपति रूपरेखा वर्मा, साहित्यकार वीरेंद्र यादव, नरेश सक्सेना, प्रोफ़ेसर रमेश दीक्षित समेत लखनऊ भर के गणमान्य व्यक्ति पूजा के समर्थन में हड़ताल की जगह पर पहुंचने लगे। बुधवार 4 जुलाई को जब पूजा शुक्ला को गिरफ्तार किया गया, तब भी गोरखपुर आक्सीजन कांड में चर्चा में आये डॉ. कफील अहमद समर्थन देने आये थे।

बुधवार को क्या हुआ
पूजा शुक्ला को मिले सिविल सोसायटी सपोर्ट और सिम्पेथी मिलने के चलते आन्दोलन ने जोर पकड़ लिया तो अलग अलग मामले में निष्काषित किये अन्य छात्रों ने भी प्रवेश देने की मांग करना शुरू कर दिया। दोपहर करीब 12:30 बजे वीसी एसपी सिंह एकेडमिक स्टाफ कॉलेज की वर्कशॉप से लेक्चर देकर बाहर आये तो प्रशासनिक भवन के गेट पर आकाश लाला, विनय यादव, आशीष मिश्रा “बॉक्सर” समेत 10-15 लड़के अपने प्रवेश को बहाल करने की मांग करने लगे।

आकाश लाला वीसी एसपी सिंह की गाड़ी के सामने लेट गया और सवाल जवाब करने लगा। आकाश लाला ने वीसी साहब से कहा कि सर आपने मुझे भगाया, आप मेरा करियर ख़राब नहीं कर सकते सर! वीसी ने जवाब दिया भगाया था न, तो भाग जाओ। जाओ यहाँ से!

इस जवाब से छात्रों में आक्रोश आ गया और बात बिगड़ गयी। वीसी एसपी सिंह से हाथापाई की गयी तो पुलिस और पोक्टोरिअल बोर्ड के सदस्यों ने उन्हें गाडी में बैठाकर वहां से रवाना कर दिया, पर उसके बाद छात्रों ने प्रोक्टोरिअल बोर्ड को पीटा और लगभग 10 मिनट तक बवाल चलता रहा।

उसके बाद पांच थानों की पुलिस कैम्पस में तैनात कर दी गयी और पूजा शुक्ला को उनके एक दर्जन साथियों के साथ उठाकर शहर से करीब 25 किलोमीटर दूर गोंसाईगंज थाने में ले जाया गया। रास्ते में पूजा और उनके साथ गिरफ़्तारी देने वाली दो महिलाओं के साथ मारपीट की गयी और उन्हें देर रात तक थाने में रखा गया। पूजा शुक्ला ने क्योंकि बुधवार 4 जुलाई की दोपहर से पानी भी छोड़ दिया था, इसलिए उनकी तबियत बिगड़ने लगी तो पुलिस ने उन्हें देर रात सिविल अस्पताल में भर्ती कर दिया, जहाँ उन्हें ग्लूकोस चढ़ाया गया। पूजा शुक्ला ने पुलिस हिरासत में भी अनशन जारी रखा है।

सीसीटीवी फुटेज में दर्ज हैं उपद्रवी कार्यवाही की जाये
शिक्षकों के साथ मारपीट की घटना के बाद सभी ने इस तरह के कृत्य की निंदा की है। छात्र संगठनों और छात्र नेताओं ने एक स्वर में कहा है कि सीसीटीवी फुटेज से शिनाख्त किया जाए कि किसने हमला किया है। पूजा शुक्ला का कहना है “वो दो दिन से भूख हड़ताल पर थीं और उनके समर्थक उनके साथ ही थे, ये एक शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन को बदनाम करने की मंशा के किया गया काम है। सीसीटीवी फुटेज से शिनाख्त कर सही पहचान की जानी चाहिए।