Last Update On : 28 10 2018 03:36:45 PM

विधायक महेंद्र सिंह भाटी की दिसंबर 1992 में दादरी रेलवे क्रासिंग पर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस हत्याकांड में डीपी यादव समेत पाल सिंह, करन यादव और प्रनीत भाटी को भी सजा हुई थी….

वरिष्ठ पत्रकार जे.पी.सिंह की रिपोर्ट

बहुचर्चित विधायक महेंद्र सिंह भाटी हत्याकांड में यूपी के बाहुबली नेता डीपी यादव पर शिकंजा कस गया है। उच्चतम न्यायालय ने उम्रकैद में सजायाफ्ता बाहुबली नेता डीपी यादव को 16 नवंबर को देहरादून जेल में सरेंडर करने के निर्देश दिए हैं।

मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई और जस्टिस एसके कौल की पीठ ने डॉक्टरों की रिपोर्ट के आधार पर कहा कि 19 अक्तूबर को उसकी सर्जरी हो चुकी है और तीन नवंबर को अस्पताल से छुट्टी मिल जाएगी। पीठ ने कहा कि इसके बाद दो सप्ताह तक वो घर रह सकता है, फिर 16 नवंबर को देहरादून की जेल में सरेंडर कर दें जहां वो सजा काट रहा है।

गौरतलब है कि पिछली सुनवाई में उच्चतम न्यायालय ने डीपी यादव को गाजियाबाद के एक अस्पताल में 19 अक्तूबर को सर्जरी कराने की इजाजत दी थी। पीठ ने अस्पताल से 22 अक्तूबर तक रिपोर्ट दाखिल करने के लिए कहा था।सुनवाई में कोर्ट ने डॉक्टरों से रिपोर्ट मांगी थी कि वो सर्जरी के लिए फिट हैं या नहीं।

दरअसल डीपी यादव ने अंतरिम जमानत का वक्त बढाने के लिए उच्चतम न्यायालय में अर्जी दाखिल की थी। यादव ने कहा है कि वायरल बुखार होने की वजह से उनकी सर्जरी नहीं हो पाई। लिहाजा उन्हें जमानत के 15 दिन और चाहिए।इससे पहले डीपी यादव को 18 सितंबर को उच्चतम न्यायालय ने बड़ी राहत देते हुए स्वास्थ्य के आधार पर 15 दिनों के लिए अंतरिम जमानत दी थी।

उच्चतम न्यायालय ने शर्त लगाई थी कि निचली अदालत में एक करोड रुपये और इतने की ही दो जमानत जमा कराएं।निचली अदालत ने डीपी यादव को 1992 में गाजियाबाद के विधायक की हत्या की साजिश में दोषी ठहराते हुए उम्र कैद की सजा सुनाई है और वो देहरादून जेल में बंद सजा काट रहा है।

इससे पहले, उत्तराखंड हाईकोर्ट ने यादव को सर्जरी के लिए अंतरिम जमानत देने से इनकार कर दिया था, जिसके बाद उसने उच्चतम न्यायालय में अपील दाखिल की थी। पिछली सुनवाई में उच्चतम न्यायालय ने यादव को सर्जरी के लिए 15 दिन की अंतरिम जमानत दी थी।

विधायक महेंद्र सिंह भाटी की दिसंबर 1992 में दादरी रेलवे क्रासिंग पर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस हत्याकांड में डीपी यादव समेत पाल सिंह, करन यादव और प्रनीत भाटी को भी सजा हुई थी। महेंद्र सिंह भाटी उस वक्त गाजियाबाद के दादरी क्षेत्र से विधायक थे। अब दादरी का ये इलाका गौतमबुद्धनगर जिले में आता है और ग्रेटर नोएडा से सटा हुआ है। दादरी रेलवे क्रासिंग पर ही 13 सितंबर 1992 को उनकी गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।पश्चिमी उत्तर प्रदेश में डीपी यादव का काफी दबदबा है। ऐसे में उत्तर प्रदेश में वह आसानी से जांच प्रभावित कर सकता था। वह पश्चिमी उत्तर प्रदेश में ही राजनीति भी करता था। इसलिए वर्ष 2000 में सुप्रीम कोर्ट ने इस हत्याकांड की जांच देहरादून सीबीआइ को सौंप दी थी।इस सनसनीखेज हत्याकांड में कुल सात लोगों को आरोपी बनाया गया था। इनमें से तीन लोगों की केस की सुनवाई के दौरान मौत हो चुकी है। वर्ष 1992 में हुए इस हत्याकांड में उत्तर प्रदेश में राजनीतिक बवंडर खड़ा कर दिया था।

एके-47 से की गई थी हत्या
गाजियाबाद के राजनगर में रहने वाला डीपी यादव चार बार विधायक और दो बार सांसद रह चुका है। 1989 के बाद से वह कई बार उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री रहा है। 13 सितंबर 1992 को दादरी क्षेत्र के विधायक महेंद्र भाटी और उनके दोस्त उदय प्रकाश आर्या को दादरी रेलवे क्रॉसिंग पर एके-47 से भूनकर हत्या कर दी थी। मामले में चारों आरोपितों में डीपी यादव के अलावा करन यादव, परनीत भट्टी और पाल सिंह ऊर्फ लक्कड़ को सीबीआइ कोर्ट ने उम्र कैद की सजा सुनाई थी। इन्हें आइपीसी की धारा 302 (हत्या), 307 (हत्या की कोशिश), 326 (खतरनाक हथियार से गंभीर चोट) और 120-बी (आपराधिक षणयंत्र) के तहत दोषी पाया गया था।

नीतीश कटारा हत्याकांड में बेटा विकास यादव जेल में
डीपी यादव 2004 में भाजपा में शामिल हुआ और राज्यसभा से सांसद बन गया। हालांकि, कुछ दिन बाद ही उसे पार्टी से निकाल दिया गया। वर्ष 2007 में उसने राष्ट्रीय परिवर्तन दल बनाया। 2009 में वह मायावती की बहुजन समाज पार्टी में शामिल हो गया और लोकसभा का चुनाव लड़ा। इस चुनाव में उसे हार का सामना करना पड़ा। उसने 2012 में यूपी विधानसभा चुनाव से ठीक पहले बसपा छोड़ दी। उसे उम्मीद थी कि सपा से उसे टिकट मिल जाएगा। सपा में जगह नहीं मिलने के कारण डीपी यादव अपनी पार्टी से चुनाव लड़ा, लेकिन फिर हार गया।

डीपी के खिलाफ 1979 में पहली एफआइआर
डीपी यादव के खिलाफ पहला आपराधिक मामला 1979 में गाजियाबाद के कविनगर थाने में दर्ज किया गया था। उसके खिलाफ हत्या के नौ, हत्या के प्रयास के तीन, डकैती के दो, अपहरण और फिरौती के कई आपराधिक मामले दर्ज हैं। गाजियाबाद, गौतमबुद्धनगर, मोदीनगर, बुलंदशहर, मुरादाबाद, बदायूं समेत पश्चिमी यूपी के कई जिलों में डीपी यादव के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं।