Last Update On : 01 07 2018 09:38:42 AM
सरकारी नीतियों के आलोचक युवा पत्रकार विश्वदीपक को ट्रैप करने में लगी पुलिस, इस बार बहाना बना माओवाद

जी न्यूज छोड़ने के मामले में चर्चित हुए पत्रकार विश्वदीपक की तलाश में महाराष्ट्र पुलिस पहुंची दिल्ली के प्रेस क्लब, पूछा किसने बुक कराया था माओवादी होने के आरोप में गिरफ्तार ​साईं बाबा के पक्ष में होने वाली मीटिंग का हॉल, बुक कराने वाले पत्रकार विश्वदीपक का डिटेल पुलिस ले गयी साथ

जनज्वार, दिल्ली। शहरी माओवादी नेटवर्क की तलाश में दिल्ली पहुंची महाराष्ट्र पुलिस के खोजबीन के तरीकों को लेकर पत्रकारों में सवाल उठने लगे हैं और पत्रकारों का साफ तौर पर कहना है कि तलाशी में आई पुलिस का रवैया पत्रकारों और उसकी सबसे बड़ी संस्था प्रेस क्लब आॅफ इंडिया को डराने वाला है। हांलाकि प्रेस क्लब ने इस मामले में कुछ भी कहने से इनकार किया है।

पुलि​सिया पूछताछ के बाद बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि किसी कार्यक्रम के लिए हॉल बुक कराना कौन सा अपराध है? आखिर हॉल बुक कराने वाले नेशनल हेराल्ड के पत्रकार विश्व​दीपक के बारे में संदिग्ध तरीके से पूछताछ का क्या मतलब है? कहीं ऐसा तो नहीं कि जज लोया मामले से लेकर लगातार सरकार की असलियत उजागर करने वाली खबरों को प्रमुखता से करने वाले पत्रकार विश्व​​दीपक और उन जैसे पत्रकारों को सरकार इस बहाने डराना चाहती है?

आज दिन के करीब 4 बजे महाराष्ट्र पुलिस दिल्ली के रायसीना रोड स्थित प्रेस क्लब आॅफ ​इंडिया ​पहुंची। महाराष्ट्र पुलिस से आए एक इंस्पेक्टर ने जानना चाहा कि पिछले वर्ष मार्च—अप्रैल 2017 में दिल्ली विश्वविद्यालय के शिक्षक और माओवादी होने के आरोप में गिरफ्तार साईंबाबा के पक्ष में जो मीटिंग हुई थी, उस हॉल को किसने बुक कराया था, उसमें कौन—कौन लोग आए थे, किस संस्था ने बुक कराया आदि। प्रेस क्लब के अधिकारियों को पुलिस ने बताया कि हमें यह जानकारी इसलिए चाहिए कि कार्यक्रम में कुछ नक्सली शामिल थे।

टेलीग्राफ में प्रकाशित खबर के प्रेस क्लब के सेक्रेटरी जनरल विनय कुमार ने जानकारी दी कि महाराष्ट्र की पुणे पुलिस के सब इंस्पेक्टर जीआर सोनावणे साईंबाबा मामले में हुए कार्यक्रम के बारे में प्रेस क्लब में पूछताछ के लिए पहुंचे थे। विनय कुमार कहते हैं हमने सब इंस्पेक्टर से कहा कि केस की डिटेल के साथ एक एप्लिकेशन दें, उसके बाद जानकारी लें। सब इंस्पेक्टर द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक विश्रामगढ़ पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर संख्या 04/18 के मुताबिक यह पूछताछ की जा रही थी।

यह वैसी ही एफआईआर है जिसके तहत कई सामाजिक कार्यकर्ताओं को हिंसा भड़काने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था, जिसमें हिंदुत्व कार्यकर्ताओं ने 1 जनवरी को भीमा कोरेगांव की लड़ाई की दूसरी शताब्दी में पुणे के पास अंबेडकर के अनुयायियों के साथ संघर्ष किया था। गिरफ्तार लोगों में साईंबाबा के वकील सुरेंद्र गडलिंग, ​कमिटी फॉर द रिलीज पॉलिटिकल प्रिजनर के प्रवक्ता रोना विल्सन और प्रोफेसर शोमा सेन शामिल हैं।

प्रेस क्लब ने पुलिस से एक लिखित पत्र लेने के बाद हॉल बुक कराने की जानकारी पुलिस को दे दी। प्रेस क्लब के अधिकारियों का कहना है कि पुलिस उसके बाद लौट गयी। प्रेस क्लब ने इस मामले में ज्यादा कुछ कहने से इनकार किया। क्लब के अधिकारी का कहना है कि यह एक रूटीन जांच थी और अगर पुलिस विश्वदीपक के मामले में ज्यादती करती है तो प्रेस क्लब उनके साथ खड़ा है। हालांकि अभी क्लब आधिकारिक तौर पर प्रेस विज्ञप्ती देने से इनकार कर रहा है।

पत्रकार विश्वदीपक ने बताया कि उन्होंने पिछले वर्ष मार्च या अप्रैल में अपने मित्र अंजनी कुमार के कहने पर प्रेस क्लब बुक कराया था। ऐसा विश्वदीपक ने इसलिए किया, क्योंकि बुकिंग किसी ने किसी प्रेस क्लब के सदस्य के हस्ताक्षर पर ही होती है।

विश्वदीपक कहते हैं, ‘मुझे नहीं लगता कि मैंने ऐसा कुछ किया जिसकी पुलिस जांच होनी चाहिए। सामाजिक कार्यकर्ता अंजनी कुमार मेरे मित्र हैं, इसलिए मैंने हॉल बुक कराया। इसमें कुछ भी संदिग्ध नहीं है। अगर पुलिस को कार्यक्रम में कोई संदिग्ध आने का पता चला है तो वह संदिग्धों का पता करे, मेरे बारे में सनसनी खेज तरीके से जांच क्यों कर रही है। क्या कार्यक्रम के लिए हॉल बुक कराना भी अपराध हो गया है?’

टेलीग्राफ में प्रकाशित खबर से पता चल रहा है कि कोई नई एफआईआर अभी सीधे तौर पर विश्वदीपक के खिलाफ नहीं दर्ज हुई है, पुरानी एफआईआर पर ही प्रेस क्लब में महाराष्ट्र की पुणे पुलिस द्वारा पूछताछ हुई है।

टेलीग्राफ में प्रकाशित खबर

गौरतलब है कि विश्वदीपक देश के उन पत्रकारों में हैं जो साहसपूर्वक पत्रकारिता के मुल्यों के साथ खड़े हैं, जब मीडिया का बहुतायत अपनी रीढ़ खो चुका है। उसी का परिणाम था कि उन्होंने जी न्यूज की यह कहते हुए अच्छी खासी नौकरी छोड़ दी कि ऐसी झूठी पत्रकारिता से बेहतर में बेरोजगार रहूं और समाज के लिए बेहतर लिखूं।’

इस बीच विश्वदीपक ने नेशनल हेराल्ड में रहते हुए जज लोया के संदिग्ध मौत के मामले में कई खबरें कीं जिससे सरकार की किरकिरी बढ़ती रही। देश के प्रमुख मानवाधिकार संगठन पीयूसीएल की पदाधिकारी कविता श्रीवास्तव कहती हैं, ‘मैं विश्वदीपक के कामों को बखूबी जानती हूं, वह सत्ताधारियों की निगाह में उसी समय से खल रहे हैं जबसे उन्होंने जी न्यूज छोड़ा है। देश में जिस तरह के हालात होते जा रहे हैं उसमें एक स्वतंत्र चेतना वाले पत्रकार का बने रहना मुश्किल हो गया है। मैं इस पुलिसिया तौर तरीके और डराने के ढंग का विरोध करती हूं।’