यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर अरविंद अग्रवाल के इशारे पर हुआ उन पर जानलेवा हमला, घसीटकर ले जाने के बाद मारने पीटने से भी नहीं भरा मन तो पेट्रोल छिड़ककर आग लगाने की की कोशिश, लगातार खराब हो रही है हालत मोतिहारी के डॉक्टरों ने किया पटना एम्स के लिए रेफर….

जनज्वार। मोदी सरकार आने के बाद मॉब लिंचिंग की घटनाओं में जिस तरह दिन—ब—दिन बढ़ोत्तरी हो रही है, वह खौफ पैदा करती है। मॉब लिंचिंग का हालिया शिकार मोतिहारी स्थित महात्मा गांधी सेंट्रल यूनिवर्सिटी में सोशलॉजी विभाग में अस्सिटेंट प्रोफेसर संजय कुमार हुए हैं। हद तो यह हो गई कि उनकी हत्या करने के इरादे से उन पर हमला करने वाले 25—30 लोगों का झुंड आज दिन में तकरीबन 12.30 बजे उन्हें उनके घर से मारते—मारते ले गया और उन पर पेट्रोल छिड़कर उनकी जान लेने की कोशिश की।

उनकी हालत अभी बहुत सीरियस है। उनके साथी शिक्षकों के मुताबिक मोतिहारी के हॉस्पिटल से उन्हें उनकी नाजुक हालत को देखते हुए पटना एम्स के लिए रेफर कर दिया है, जहां उन्हें इलाज के लिए ले जाया जा रहा है। मगर हालत के बारे में कुछ नहीं बताया जा सकता।

लोकतांत्रिक मूल्यों पर विश्वास रखने वालों के लिए मॉब लिंचिंग जैसी घटनाएं भय पैदा करती हैं, कि वो भी कभी ऐसी घटना का शिकार हो सकते हैं, ताकि उनकी आवाज का गला घोटा जा सके।

जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे सहायक प्रोफेसर संजय कुमार

फिलहाल संजय कुमार जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं। उनके साथी प्रोफेसरों के मुताबिक यह हमला उन पर एक सुनियोजित साजिश के तहत किया गया है। यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर अरविंद अग्रवाल के इशारे पर इस घटना को अंजाम दिया गया है।

पीड़ित संजय कुमार की तरफ से पुलिस को दिए गए शिकायती पत्र में राहुल आर पांडेय, पत्रकार संजय कुमार सिंह, अमन बिहार वाजपेयी, सन्नी मिश्रा, पुरुषोत्तम मिश्रा, मीडियाकर्मी ज्ञानेश्वर गौतम, डीन पवनेश कुमार, दिनेश व्यास, सहायक प्राध्यापक जितेंद्र गिरी, संजय कुमार, समाजशास्त्र विभाग के राकेश पांडेय के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की गई है।

कहा गया है कि पुलिस इन अपराधियों के खिलाफ जल्द से जल्द कार्रवाई करे, क्योंकि इन्हीं लोगों द्वारा संजय कुमार को जान से मारने के लिए अपराधी तत्वों को उकसाया गया और ये लोग फेसबुक, वाट्सअप पर खुद भी संजय कुमार को लगातार जान से मारने के लिए धमका रहे थे।

घटनाक्रम के मुताबिक ये गुंडा तत्व संजय कुमार की एक टिप्पणी से भड़के हुए थे जो कल उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की मौत के बाद सोशल मीडिया पर की थी। यह कारण तो तात्कालिक था, मगर असल वजह कुछ और थी।

विश्वविद्यालय शिक्षक एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रमोद ​मीणा ने बताया, कल संजय कुमार के घर पर धावा बोलकर कुछ लोग उन्हें घर से ही घसीटते और मारते पीटते हुए हुए ले गए। उनके घर के बाहर से वो लोग गाली—गलौच करते हुए बोल रहे थे कि हम इसे जिंदा गाड़ देंगे। 20—25 लोगों के झुंड द्वारा उन्हें मरणासन्न की हालत तक खूब मारा—पीटा गया। उनके शरीर पर अंडरवियर बनियान भी सही हालत में नहीं बचे। जब खूब पीट लिया तो उन पर पेट्रोल छिड़ककर आग लगाने की कोशिश की गई। मौके पर मौजूद कुछ साथियों की मदद से बमुश्किल उन्हें गुंडा तत्वों की भीड़ से बचाया जा सका।

शिक्षक एसोसिएशन के शिक्षकों का कहना है कि इन गुंडों को संजय कुमार की सारी इंफोरमेशन और फोटो के साथ उनकी जान लेने के इरादे से भेजा गया था।

पुलिस को मॉब लिंचिंग के ​शिकार प्रोफेसर संजय कुमार की तरफ एफआईआर दर्ज करने के लिए दिया गया शिकायती पत्र

संजय कुमार के सा​थी शिक्षक जो कि एसोसिएशन से जुड़े हैं, बताते हैं यहां की शिक्षक एसोसिएशन बहुत दिनों से हड़ताल पर थी वाइस चांसलर अरविंद अग्रवाल के खिलाफ, क्योंकि उनके राज में यहां भ्रष्टाचार बुरी तरह व्याप्त है। यहां रोज शिक्षकों को प्रताड़ित किया जाता है, उनसे जबरन रेजिग्नेशनल लिखवाया जाता है, जिसका हम लोग विरोध कर रहे थे।

इस हमले की कड़ी भी वहीं से जुड़ती है। वाइस चांसलर अरविंद अग्रवाल ने यहां के कुछ गुंडा—आपराधिक तत्वों को पैसा खिलाकर ​शिक्षकों के खिलाफ किया है। ये गुंडा तत्व एक मौके की तलाश में थे कि कैसे हम लोगों को निशाना बनाएं और कल फेसबुक पर ​की गई असिस्टेंट संजय कुमार की टिप्पणी से उन्हें यह मौका मिल गया। यहां के डीन पवनेश कुमार ने भी संजय कुमार को धमकी दी थी, अन्य शिक्षकों को भी धमकाया था।

हड़ताल पर गए शिक्षकों के मुताबिक वाइस चांसलर और उनके मैनेजमेंट के लोगों ने यहां के कुछ आपराधिक छवि के पत्रकारों को भी पैसा खिलाकर अपने पक्ष में किया हुआ है जो शिक्षकों को धमकाते हैं। यही लोग वाट्सअप पर संजय कुमार को धमका रहे थे कि तुमने अटल बिहारी वाजपेयी के मरने पर जो टिप्पणी की है हम तुम्हें देख लेंगे, जान से मार देंगे, जिसका रिकॉर्ड भी उनकी मोबाइल में मौजूद है।

संजय कुमार को जान से मारने के इरादे से किए गए हमले से पहले उनके पास एक अननॉन नंबर से कॉल भी आया था, उस पर भी उन्हें जान से मारने की धमकी दी गई थी।

उनके शिक्षक साथियों के मुताबिक अभी भी उनकी हालत ​खतरे से बाहर नहीं है। थोड़ा होश में आने के बाद उन्होंने जो नाम बताए हैं उसके आधार पर प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है।


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