Last Update On : 20 06 2018 10:38:46 AM
फोटो : हिंदुस्तान टाइम्स

पिछले वर्ष 6 जून को जो 6 किसान मध्य प्रदेश के मंदसौर में पुलिस की गोली और मार से अपनी जान गवां बैठे थे, उनकी हत्या के लिए नहीं है कोई पुलिस अधिकारी जिम्मेदार, न मिलेगी किसी को इस अपराध की कोई सजा

जांच के लिए बनी जज के नेतृत्व वाली कमेटी ने कहा कि जान बचाने के लिए पुलिसवालों ने मारी थी गोली, नहीं मारते तो किसान कर देते उनकी हत्या, डीएम और एसएसपी का भी नहीं है कोई दोष

जनज्वार, भोपाल। मध्यप्रदेश के मंदसौर में पिछले वर्ष 6 जून को किसान अपनी फसलों की उचित कीमत और कर्जमाफी को लेकर सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे थे। किसानों के शांतिपूर्ण प्रदर्शन को पुलिस ने रोकने की कोशिश की और बल का प्रयोग किया, जिसके बाद प्रदर्शन हिंसक हुआ और पुलिस की गोली और मार से 6 किसानों की मौत हो गयी।

5 किसान मौके पर मारे गए थे, जबकि एक की अस्पताल में पुलिस की पिटाई से मौत हो गयी।

मंदसौर किसान आंदोलन के प्रदर्शन का असर इतना व्यापक और गहरा था कि राष्ट्रीय स्तर पर किसानों के इस आंदोलन की चर्चा रही। राज्य के मुख्यमंत्री उर्फ मामा शिवराज सिंह चौहान को कुछ बोलते नहीं बना तो वह मौन व्रत पर चले गए और भाजपा बताती रही कि यह प्रदर्शन किसानों का नहीं कांग्रेस का था, प्रदर्शनकारी किसान नहीं कांग्रेस के कार्यकर्ता थे।

मध्यप्रदेश भाजपा सरकार और राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा की किसान विरोधी रवैयों के कारण बहुत फजीहत हुई तो आनन—फानन में भाजपा सरकार ने न्यायधीश जेके जैन जांच समिति बना दी।

उस जेके जैन कमीशन की रिपोर्ट आ गयी है, जो भाजपा नेताओं के स्टैंड से कुछ अलग नहीं है, क्योंकि जो बात कमीशन ने इतने लंबे समय बाद कहा है, वह बात राज्य के मामा और भाजपाई किसानों को गोली दागे जाने के दिन से कह रहे थे।

ऐसे में जांच समिती में लगा पैसा भी एक तरह से देश पर नया भार ही रहा! खैर जैन साहब जज हैं तो कौन कुछ कहेगा, पर सवाल तो बनता है।

मंदसौर किसान हत्याकांड पर न्यायधीश जेके जैन की रिपोर्ट में जो कहा गया —

1. 6 जून 2017 को सीआरपीएफ और पुलिस की गोली से जो 6 किसान मारे गए, उसमें पुलिस और सीआरपीएफ के जवान दोषी नहीं हैं, क्योंकि उन्होंने गोली आत्मरक्षा में चलाई।

2. बही पार्श्वनाथ और पिपलियामांडी में जहां सबसे पहले फायरिंग हुई, वहां सीआरपीएफ वालों को किसानों ने घेर लिया था। करीब 2 हजार किसानों की लाठी, डंडे और पेट्रोल बम से लैस भीड़ ने पिपलियामांडी थाने को घे​र लिया था। किसानों की पूरी तैयारी थी कि वह थाने और पुलिस वालों फूंक दें।

3. तत्कालीन डीएम स्वतंत्र कुमार सिंह और एसएसपी ओपी त्रिपाठी भी इस गोलीकांड के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार नहीं हैं, हां पुलिस और प्रशासन के बीच तालमेल ठीक नहीं था, कमजोर था।

4. किसानों की मांग कि फसलों का उचित दाम मिले और कर्जमाफी हो, इसके लिए जिला स्तर पर मांग जायज नहीं थी, क्योंकि जिले स्तर के ​अधिकारी इस मांग को पूरा नहीं कर सकते थे।

जेके जैन समिति की आई रिपोर्ट की जानकारी देते हुए हिंदुस्तान टाइम्स लिखता है कि जैन की रिपोर्ट से किसानों के वकील आनंद मोहन माथुर बड़े नाखुश हैं और आलोचना करते हैं। माथुर के अनुसार, ‘यह रिपोर्ट साबित करती है कि रिपोर्ट कितने ​तिकड़तों से बनाई जाती है। मुझे आजतक थानाध्यक्ष अनिल ठाकुर से सवाल नहीं करने दिया गया, आखिर क्यों?’