Last Update On : 09 07 2018 12:26:24 PM
कानून तो बड़े सख्त हैं पर सच्चाई उससे भी कहीं जबर्दस्त है, कानून के हाथ तो लंबे नहीं होते पर इनकी गुरबत और मजबूरी के दिन लंबे होते जाते हैं फोटो — कुलदीप बौद्ध

आज भी पूर्व ग्राम प्रधान राजाबेटी पति संग मैला ढोकर और सीवरसफ़ाई कर जीवन गुजारने को मजबूर, जबकि दोनों पति—पत्नी हैं गंभीर बीमारियों की चपेट में…

जालौन, जनज्वार। शायद आपको यकीन न हो रहा हो लेकिन ये सच है कि हमारे जिले की एक पूर्व दलित महिला प्रधान राजाबेटी आज भी गांव में मानव मल (मैला ढोकर) उठाकर व उसका पति गांव के सीवर टैंकों की बिना किसी सुरक्षा उपकरण के सफाई कर अपने परिवार का भरण पोषण करने को मजबूर हैं?

जिले के कदौरा ब्लोक के गर्रेही ग्राम में पिछले 30 सालों से निवास करने वाले 50 वर्षीय पप्पू बाल्मीकि पुत्र श्यामा बाल्मीकि गांव के बाहर तालाब के किनारे झोपड़ पट्टी डालकर अपने 3 पुत्र, 4 पुत्रियाँ सहित 8 लोगों का परिवार रहता है, पप्पू बाल्मीकि की पत्नी राजाबेटी जो कि कठपुरवा पंचायत में 5 वर्ष तक ग्राम प्रधान रह चुकी हैं और आज आलम ये है कि राजाबेटी और उनके पति मानव मल उठाते हैं और सीवर टैंकों की सफाई करते हैं और उसके बदले में जो मिलता है उससे अपने बच्चों व अपने परिवार का भरण पोषण करते हैं।

आज न तो इनके पास रहने के लिए छत है और न ही आजीविका के लिए कोई सहारा। गांव में मैला उठाने के गन्दा काम करने से पूरा परिवार बीमारी का शिकार है, लेकिन कोई नहीं सुन रहा है और ये नारकीय जीवन जी रहे हैं।

उत्तर प्रदेश और बुंदेलखंड में मैला ढ़ोने की कुप्रथा को लेकार गांव से लेकर जिला और प्रदेश तक आवाज उठाने वाले सामजिक संगठन बुंदेलखंड_दलित अधिकार मंच की 5 सदस्यीय टीम कुलदीप कुमार बौद्ध, संजय बाल्मीकि, कल्पना बौद्ध, रिहाना मंसूरी व हरी किशान ने गर्रेही गांव, कदौरा का दौरा किया।

कुलदीप कुमार बौद्ध कहते हैं, ‘पूर्व प्रधान राजाबेटी एवं उनके पति पप्पू बाल्मीकि से बातचीत की तो उन्होंने बताया कि मैं इस गांव में 30 साल से रह रही हूँ मेरे पास न तो जमीन है, न घर है और न ही राशन है। मैं तो सिर्फ मैला उठाकर जीवन का गुजारा करती हूँ। मेरे पति बिना किसी सुरक्षा कवच के सीवर में घुसकर सफाई करते हैं और मैं मानव मल फैकने का काम करती हूँ, तब कहीं जाकर पैसे मिलते हैं और हमारी जिन्दगी का गुजारा चलता है।’

मैं 5 वर्ष तक प्रधान जरुर रही, लेकिन मुझसे सिर्फ अगूंठा लगवाये गए। उसके बाद मुझे नहीं पता कि आगे क्या हुआ। इस गंभीर मामले को लेकर बुंदेलखंड दलित अधिकार मंच की टीम का कहना है कि जिले में आज भी बड़े पैमाने पर मैला ढ़ोने एवं बिना सुरक्षा उपकरण के गटर/सीवर सफाई का काम होता है, लेकिन जिला प्रशासन पूरी तरह से अनजान बना रहता है।

फिलहाल मैला ढ़ोने वाले परिवारों को हक़ अधिकार और सम्मान के लिए लगातर संघर्ष जारी रहेगा। रिपोर्ट के साथ दिया गया वीडियो हकीकत बयां करने के लिए काफी है। हैं अगर जल्द ही सुनवाई नहीं हुई तो स्वयं राजाबेटी अपने पति पप्पू वाल्मीकि के साथ जिलाधिकारी के यहाँ दस्तक देंगी।

सामाजिक और राजनीतिक कार्यकर्ता हिमांशु कुमार सफाई कर्मचारी की एक वीडियो शेयर करते हुए लिखते हैं, यह भारतीय नागरिक आपकी नाली साफ करने के लिए जिस पानी के अंदर गोता मार रहा है उस पानी में आपकी टट्टी पेशाब थूक बलगम सबकुछ मिला हुआ है। यह काम करने के लिए इस व्यक्ति को एक महीने में सिर्फ रुपए 5000 मिलते हैं। यह इंदौर नगर निगम है, जहां भाजपा का शासन है आज तक इस काम के लिए इन लोगों को न तो मास्क दिया गया न दस्ताने न गमबूट, न कोई औजार यह काम सिर्फ दलित जातियों के जिम्मे है। इस काम में कोई दूसरी जाति आने के लिए तैयार नहीं है। वैसे सवर्ण जातियां आरक्षण के खिलाफ छाती पीटती हैं।

वैसे तो भाजपा हिंदू हिंदू करती है, लेकिन भाजपा को यह नागरिक दिखाई नहीं देते? यह देश एक भयानक दौर से गुजर रहा है। इस सब को बदले बिना भारत इंसानों के रहने लायक नहीं बन सकता।