Last Update On : 02 08 2017 02:26:00 PM

डूब क्षेत्र में आते हैं 40 हजार परिवार, लेकिन सरकार की गिनती में 8 गुने घटकर हो जाते हैं 5 हजार

नर्मदा घाटी के विस्थापितों के सम्पूर्ण और न्यायपूर्ण पुनर्वास के समर्थन में कल 3 अगस्त से जंतर मंतर पर सामूहिक उपवास। समर्थन में योगेन्द्र यादव, संदीप पाण्डेय, डॉ. सुनीलम, आलोक अग्रवाल व अन्य बैठेंगे उपवास पर। जस्टिस राजिंदर सच्चर, अरुणा रॉय, एनी राजा, निखिल डे, कविता श्रीवास्तव, सौम्या दत्ता, फैजल खान, भूपेंद्र सिंह रावत, राजेन्द्र रवि व कई अन्य होंगे शामिल। 

मध्य प्रदेश के बड़वानी इलाके नर्मदा घाटी में अनिश्चितकालीन उपवास का आज सातवां दिन है। सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर कर रही हैं लगभग 40 हजार डूब प्रभावित परिवारों के उचित पुनर्वास के लिए उपवास, लेकिन सरकार नहीं कर रही सुनवाई। उपवास में साथ बैठे हैं नर्मदा घाटी के 12 और लोग।

बड़वानी, मध्यप्रदेश। नर्मदा बचाओ आंदोलन की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ती में कहा गया है कि विस्थापितों के बारे में नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण के अधिकारी रजनीश वैश्य ने गलत और झूठे वक्तव्य जारी किये हैं। वैश्य का यह कहना कि अब मात्र लगभग 5000 परिवार पुनर्वास के लिए बाकी रह गए हैं, जो कि एक झूठा व पीड़ितों को भ्रमित और रोष में लाने वाला वक्तव्य है।

प्रेस विज्ञप्ती के मुताबिक 25 मई को जारी हुए गजट नोटीफिकेशन में सरकार की ओर से बताया गया है कि 141 गाँव के 18386 परिवार डूब क्षेत्र में निवासरत हैं। हालांकि यह संख्या भी कम थी लेकिन अब वैश्य ने उसको चार गुना घटाकर सरकार की मंशा को जाहिर कर दी है कि सरकार और उसके अधिकारी उचित पुनर्वास की बजाय हजारों परिवारों के साथ पुनर्वास का खेल—खेलना चाहते हैं।

नर्मदा बचाओ आंदोलन का कहना है कि आज वैश्य जिस संख्या को 5 हजार बता रहे हैं, उसे की कुछ दिन पहले नर्मदा विकास प्राधिकरण और जिलाधिशों ने 8700 बताया था और कहा था 9300 परिवार पुनर्वासित हो निकल गए हैं। परंतु यह बात भी झूठी थी, क्योंकि 100 परिवार भी नहीं हटें हैं मूलगाँव से और अभी 40000 से ज्यादा परिवार डूब क्षेत्र में रह रहे हैं।

पुनर्वास के मसले पर वैश्य ने एक और भयावह झूठ बोला है। उनका कहना है कि नर्मदा बचाओ आन्दोलन ने मात्र 25 लाख मुआवजे की बात कोर्ट के सामने रखी थी, जबकि सुप्रीम कोर्ट ने खुद 60 लाख रुपये मंजूर किया है। सरकारी गाइडलाइन के अनुसार ही 60 लाख रुपये मंजूर किया गया है।

विस्थापन का दर्द झेल रहे नर्मदा घाटी के लोगों के संघर्ष के साथ एकजुटता दिखाते हुए इंदौर के सामाजिक कार्यकर्ता विनित तिवारी कहते हैं, ‘छत्तीसगढ़ में सुनते हैं कि गायों के लिए रमन सिंह सरकार ने राजयव्यापी एम्बुलेंस योजना शुरू की है पर नर्मदा में न कोर्ट को 40 हज़ार परिवार दिख रहे हैं न सरकार को। वो उन्हें डुबोकर या खदेड़कर ज़मीन पर अपना कब्ज़ा जमा लेना चाहते हैं।’

31 जुलाई 2017 को अलग अलग समूहों के लोग, गांधीवादी, सर्वोदयी, समाजवादी, कम्युनिस्ट, कांग्रेसी, संवेदनशील स्वतंत्र मनुष्य और अन्य सामाजिक संस्थाओं से जुड़े लोग इंदौर में दोपहर 3 बजे से करीब 4 बजे तक महात्मा गाँधी मार्ग पर नर्मदा घाटी में अन्यायपूर्ण डूब के खिलाफ लड़ रहे लोगों, अनशनरत आंदोलनकारियों के समर्थन में बनी मानव श्रृंखला में जुटे।