मोदी जी आप हारने लगते हैं तो विपक्ष की महिला नेता को गरियाते हैं। पर एक बात जान लीजिए कि लोग अब आपके जुमलों और झूठ को नहीं खरीदेंगे। काठ की हाँड़ी बार-बार नहीं चढ़ती मोदीजी….

सुशील मानव की रिपोर्ट

जनज्वार। राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में भाजपा और मोदी को मुंह की खानी पड़ी। लोगों ने मोदी के उस मुंह पर नकार मढ़ दी जिस मुंह से उन्होंने राजस्थान के चुनावी मंच से कांग्रेस नेता सोनिया गाँधी के लिए ‘कांग्रेस की विधवा’ कहकर प्रधानमंत्री पद की गरिमा को तार-तार कर दिया था।

पांच राज्यों की जनता ने सिर्फ मोदी और भाजपा को ही नहीं बल्कि उस गाली-गलौज, अली-बजरंग बली और हनुमान के दलितकरण को भी नकार दिया। जनता ने ‘मोदी मैजिक’, ‘मोदी लहर’ के साथ साथ जनता ने उत्तर प्रदेश के ‘खोटे सिक्के’ के भी नकार दिया है।

बता दें कि राज्सथान, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश की सत्ता भाजपा के पास तब से है जब मोदी की हैसियत गुजरात जैसे छोटे राज्य के मुख्यमंत्री से ज्यादा की नहीं थी। शिवराज सिंह चौहान के कद के आगे उनका कद भी कुछ नहीं था। बहरहाल राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ भाजपा की बंद मुट्ठी से रेत की तरह फिसलते नजर आ रहे हैं। तेलंगाना और मिजोरम में भी भाजपा की दाल नहीं गली। जनता ने भाजपा और मोदी के अच्छे दिनों से तौबा कर ली।

मंदसौर के किसान आंदोलन का क्रूर दमन मध्यप्रदेश की शिवराज चौहान सरकार को इस हालत में ले आई। मध्यप्रदेश की जनता ने शिवराज को लगभग नकार ये बताया है कि उन्हें कृषि का शवराज मॉडल नहीं चाहिए मोदी जी। जबकि छत्तीसगढ़ में रमन सिंह सरकार बर्बरतापूर्वक जंगल और जमीन छीनकर अडानी और अंबानी को सौंप देना और सलवा जुडूम के नाम पर आदिवासियों को आपस में एक दूजे को मारकर खत्म कर देने की उनकी षडयंत्र को आखिरकार छत्तीसगढ़ की जनता ने अपने वोट के बल पर ‘गो-टू-हेल’ कह दिया है।

राजस्थान में बेरोजगारी युवाओं के बीच एक बड़ा मुद्दा बनकर उभरा। ‘शाम ढली, वसुंधरा टल्ली’ का मुहावरा पाँच साल राजस्थान के लोगों के जबान पर चढ़कर बोला। सत्ता में आने के बाद वसुंधरा राजे सिंधिया ने जनता की ओर देखना तक मुनासिब नहीं समझा और लोकशाही को राजशाही बनाकर पूरे पांच साल भोगा।

राजस्थान में जनता के बीच इससे गहरा असंतोष और नाराजगी व्याप्त हो गई, जिसका जवाब भाजपा सरकार के पास नहीं थी। अगर इन राज्यों में भाजपा जीत जाती तो इसे 2019 के पहले मोदी को जनता का जनादेश बताकर मीडिया और संघ-भाजपा विपक्ष की छाती पर मूँग दल रहे होते। लेकिन अब इन 5 राज्यों की हार को मोदी की हार नहीं बताया जाएगा। इसे एंटी-इनकंबेंसी और और जाने क्या क्या बताया जाएगा।

जो गोदी-मीडिया कल तक इसे फाइनल के पहले का सेमीफाइनल बता रही थी आज वो कह रही है कि वसुंधरा राजे सिंधिया, शिवराज सिंह चौहान और रमन सिंह की नाकामी को मोदी की नाकामी कैसे कहा जा सकता है। आज मीडिया मोदी को बचाते हुए कह रही है कि ‘राजस्थान में सत्ता बदलने की परंपरा जारी’।

नोटबंदी करके आपने देश की अर्थव्यवस्था के पकौड़े लगा दिए हैं मोदीजी। नोटबंदी के बाद बेरोजगारी बेतहाशा बढ़ी है। तिस पर जीएसटी ने कोढ़ में खाज का काम किया। छोटे-मझोले उद्योग चौपट हो गए। लोग समझ गए हैं कि हिंदुत्व राष्ट्र का मतलब बेरोजगारी, हत्या, बलात्कार, असुरक्षा, मॉब लिंचिंग और भीड़तंत्र है। लोग समझ गए हैं कि राष्ट्रवाद से घर, मोहल्ले जलते हैं, चूल्हे नहीं।

लोग समझ गए हैं कि राममंदिर बनने से उनके सरों पर छत नहीं आ जाएगी। लोग ‘गुजरात मॉडल’ और ‘शवराज मॉडल’ की हक़ीक़त समझ गए हैं। लोगों ने ‘अच्छे दिन’ से तौबा कर ली है। लोगों ने विजय माल्या, नीरव मोदी, अडानी अंबानी को देखकर ‘विकास’ से तौबा कर ली है।चौकीदार ही चोर है ये बात लोगों के मन में घर करने लगी है।

अभी तक के रिजल्ट को देख तो यही लग रहा है कि लोगों ने समझ लिया है मोदी कि आपके समय में देश की जीडीपी नहीं बढ़ी तो आपने यूपीए के शासनकाल की जीडीपी घटाकर अपने शासनकाल में जीडीपी बढ़ाकर विकास कर लिया। लोग आपकी चालबाजियों को समझ गए हैं मोदी जी।

हाँ तो आप कांग्रेसमुक्त भारत की मुहिम में लगे हुए थे, कहाँ जनता ने भाजपा-मुक्त भारत का मूड़ बना लिया है। अब एक बात आप भी समझ लीजिए बिना, किसान, बिना मजदूर, बिना छात्रों के किसी भी भारत की तस्वीर नहीं बनती। पर आपके हिंदुत्ववादी तस्वीर में तो सिर्फ अडानी अंबानी और सवर्णवाद है।

मोदी जी आप हारने लगते हैं तो विपक्ष की महिला नेता को गरियाते हैं। पर एक बात जान लीजिए कि लोग अब आपके जुमलों और झूठ को नहीं खरीदेंगे। काठ की हाँड़ी बार-बार नहीं चढ़ती मोदीजी।