मोदी सरकार के ये  सिपहसालार पहले भी अपने उल्टे—सीधे बयानों को लेकर रहे हैं खासा विवादित…

मुंबई, जनज्वार। मोदी सरकार के मंत्री कब, कहां, कौन सा बयान दे दें, कहना मुश्किल है। मोदीराज में विवादित बयानों और मंत्रियों का तो जैसे लगता है चोली—दामन का साथ हो गया है। ताजा मामला एक केंद्रीय मंत्री से जुड़ा है, जिन्होंने कहा है कि डॉक्टरों को नक्सली बन जाना चाहिए, ताकि हम उन्हें गोलियों से भून सकें।

गौरतलब है कि केंद्रीय गृहराज्य मंत्री हंसराज अहीर आज एक अस्पताल का उद्घाटन करने महाराष्ट्र के चंदरपुर जनपद में गए थे, जहां के डॉक्टर छुट्टी पर थे। डॉक्टरों का छुट्टी पर जाना मंत्री महोदय को इतना अखरा कि उन्होंने इसे अपनी नाक का सवाल बना लिया। तभी उन्होंने अस्पताल का उद्घाटन करने के बाद यह विवादित बयान दे दिया कि अगर डॉक्टर लोकतंत्र में आस्था नहीं रखते तो उन्हें नक्सली बन जाना चाहिए ताकि हम उन्हें गोलियों की भाषा में जवाब दे पाएं। ऐसे डॉक्टरों को हम गोली मार दें।

मीडिया में आ रही खबरों के मुताबिक केंद्रीय गृह राज्य मंत्री हंसराज अहीर जब चंदरपुर में एक अस्पताल का उदघाटन करने पहुंचे तो वहां डॉक्टर नदारद थे। जिससे वो इतना भड़क गए कि उन्होंने डॉक्टरों को नक्सली बन जाने की सलाह दे दी।

उनका अहम को डॉक्टरों के मौजूद न होने से किस हद तक चोट पहुंची इसका अंदाजा उनकी इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने कहा, मैं लोकतांत्रिक तरीके से चुना गया मंत्री हूं। इस बात की जानकारी होने के बावजूद कि मैं अस्पताल का उदघाटन करने आ रहा हूं डॉक्टरों ने क्यों छुट्टी ले ली।

गौरतलब है कि मोदी सरकार के ये  सिपहसालार पहले भी अपने उल्टे—सीधे बयानों को लेकर खासा विवादित रहे हैं। एक बयान में तो उन्होंने यहां तक कह दिया था कि पाकिस्तान के अलावा भारत का तथाकथित दोस्त बांग्लादेश भी भारत की सुरक्षा के लिए कम खतरा नहीं है।

अहीर पिछले दिनों तब भी विवादों में आए थे जब उन्होंने कहा था कि हम अगर चाहें तो हमें पाक अधिकृत की यानी पीओके लेने से रोकने का दम किसी में नहीं है। वे यहीं नहीं रूके, आगे उन्होंने कहा कि पीओके इसलिए पाकिस्तान के पास है क्योंकि हमारी पिछली सरकारों ने गलतियां कीं। पीओके हमारा अधिकार है, अगर हम इसे वापस लेना चाहें तो किसी के पास हमें रोकने का दम नहीं है।

डॉक्टरों को नक्सली बनकर गोली दागने वाले बयान के लिए हंसराज अहीर सोशल मीडिया पर काफी ट्रोल हो रहे हैं। लोग तरह—तरह से उनकी आलोचना कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर लोग इस बात पर लगातार चर्चा कर रहे हैं कि आखिर छुट्टी पर जाना कहां से अलोकतांत्रिक गतिविधियों में शामिल हो गया।


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