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राजनीतिक आकाओं को खुश करने के लिए सरकारी अधिकारी किस हद तक चले जाते हैं, इसका ज्वलंत उदाहरण सीबीआई के पूर्व अंतरिम चीफ नागेश्वर राव हैं, जिन्होंने आकाओं के लिए कोर्ट के आदेश तक की अवमानना की। अब तक सीबीआई के इतिहास में किसी अफ़सर की इतनी बेइज़्ज़ती नहीं हुई थी, जितनी सीबीआई के पूर्व अंतरिम चीफ नागेश्वर राव की हुई है…

वरिष्ठ पत्रकार जेपी सिंह की रिपोर्ट

मुजफ्फरपुर शेल्टर होम केस उच्चतम न्यायालय ने पूर्व सीबीआई अंतरिम चीफ नागेश्वर राव के खिलाफ नाराजगी जताते हुये राव पर एक लाख रुपये का जुर्माना और कोर्ट की कार्यवाही तक पीछे बैठने की सजा सुनाई गई है। उच्चतम न्यायालय की अवमानना मामले में सीबीआई के पूर्व अंतरिम निदेशक नागेश्वर राव की बिना शर्त माफी को उच्चतम न्यायालय ने नामंजूर करते हुए उन्हें सजा सुना दी।

उच्चतम न्यायालय ने निर्देश दिया कि मुजफ्फरपुर शेल्टर होम की जांच टीम में किसी तरह का बदलाव नहीं होगा। अरुण शर्मा ही इस जांच टीम की अगुवाई करेंगे। नागेश्वर राव के अलावा तबादला आदेश के मामले में कानूनी सलाह देने वाले सीबीआई अभियोग के प्रभारी निदेशक एस भासु राम को भी अदालत ने अवमानना का दोषी पाया और उन्हें भी वही सजा सुनाई।

राजनीतिक आकाओं को खुश करने के लिए सरकारी अधिकारी किस हद तक चले जाते हैं, इसका ज्वलंत उदाहरण सीबीआई के पूर्व अंतरिम चीफ नागेश्वर राव हैं। दोबारा उनके द्वारा पद सम्भालते ही किये गये तबादले में वे तमाम अधिकारी शामिल हैं जिन्हें तत्कालीन सीबीआई चीफ आलोक वर्मा का नजदीकी माना जाता था। इनमें एक नाम संयुक्त निदेशक एके शर्मा (अरुण शर्मा) का भी था, जो मुजफ्फरपुर शेल्टर होम केस की जाँच कर रहे थे।

दरअसल मुजफ्फरपुर शेल्टर होम केस में शामिल लोगों को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का निकटवर्ती माना जाता है और बिहार सरकार में भाजपा भी शामिल है, इसलिए अरुण शर्मा के तबादले को क़ानूनी हलके में जांच को कमजोर करने के रूप में देखा जा रहा था। सीबीआई के इतिहास में किसी अफ़सर की इतनी बेइज़्ज़ती नहीं हुई थी, जितनी न्यायालय की अवमानना में दंडित होने से सीबीआई के पूर्व अंतरिम चीफ नागेश्वर राव की हुई है।

दरअसल उच्चतम न्यायालय ने कहा था कि मुजफ्फरपुर शेल्टर होम मामले की सीबीआई जांच में उच्चतम न्यायालय की अनुमति के बिना जांच टीम में शामिल किसी भी अधिकारी का ट्रांसफर नहीं किया जाएगा। इसके बाद भी नागेश्वर राव ने जांच टीम के चीफ सीबीआई अधिकारी एके शर्मा का 17 जनवरी को सीबीआई से सीआरपीएफ में तबादला कर दिया था। इसके बाद सीबीआई के पूर्व अंतरिम निदेशक नागेश्वर राव ने सोमवार 11 फरवरी को उच्चतम न्यायालय में बिना शर्त माफीनामा दाखिल कर माफी मांग ली थी।

सुनवाई के वक्त अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा कि राव अपनी गलती स्वीकार कर रहे हैं, लेकिन उन्होंने यह जान—बूझकर नहीं किया था और सब अनजाने में हो गया। इस पर मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने कहा कि अवमानना के आरोपी का बचाव सरकार के पैसे से क्यों किया जा रहा है। मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने कहा कि पिछले 20 सालों में मैंने अवमानना के अधिकार का इस्तेमाल नहीं किया और किसी को भी सज़ा नहीं दी। लेकिन यह तो हद है।

चीफ जस्टिस ने जताई नाराजगी
केके वेणुगोपाल की दलील पर मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने नाराजगी जताई और कहा कि राव को उच्चतम न्यायालय के पुराने आदेश का पता था तब भी उन्होंने कानूनी विभाग से राय मांगी और लीगल एडवाइजर ने कहा था कि एके शर्मा का ट्रांसफर करने से पहले उच्चतम न्यायालय में हलफनामा दायर कर इजाजत मांगी जाए, लेकिन ऐसा क्यों नहीं किया गया? इसपर अटॉर्नी जनरल ने कहा कि राव ने गलती स्वीकारी है उन्होंने माफी मांगी है। इसपर मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने कहा कि संतुष्ट हुए बगैर और कोर्ट से पूछे बगैर अधिकारी का रिलीव आर्डर साइन करना अवमानना नहीं तो क्या है?

माई लार्ड, प्लीज इनको माफ कर दीजिए
सुनवाई में मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि नागेश्वर राव ने आरके शर्मा को जांच से हटाने का फैसला लेने के बाद उच्चतम न्यायालय को बताने की जरूरत तक नहीं समझी और उनका रवैया रहा है कि मुझे जो करना था कर दिया। इस पर के के वेणुगोपाल ने मुख्य न्यायाधीश से कहा, ‘माई लार्ड, प्लीज इनको (नागेश्वर राव) माफ कर दीजिए।’ इस पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि वो नागेश्वर राव की माफी को नहीं स्वीकार कर रहे और उन्हें अवमानना का दोषी करार देने वाले हैं। मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने सवाल किया कि सीबीआई का एक अंतरिम निदेशक अगर इतने सारे ट्रांसफर नहीं करता तो क्या आसमान गिर जाता?

कोर्ट ने पूछा-क्या सजा पर भी बहस करेंगे?
इसके बाद मुख्य न्यायाधीश ने वेणुगोपाल से पूछा कि अगर हम नागेश्वर राव को दोषी करार देते हैं तो क्या आप सजा को लेकर जिरह करेंगे? इस पर वेणुगोपाल ने कहा कि जब तक कोर्ट ये तय न कर ले कि नागेश्वर राव ने ये जानबूझकर कर किया, उन्हें दोषी नहीं करार दिया जाना चाहिए। राव ने गलती स्वीकारी है उन्होंने माफी मांगी है। माई लार्ड, प्लीज इनको माफ कर दीजिए। राव का 30 साल का बेदाग करियर है और वह अपनी गलती के लिए माफी मांग चुके हैं। इस पर कोर्ट ने कहा कि वह राव के माफीनामे को अस्वीकार करते हैं। मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की सख्त टिप्पणियों के बाद अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा कि अगर आप नागेश्वर राव को कोई सजा सुनाते हैं, तो उनका करियर खराब हो सकता है। वह पिछले 32 साल से काम कर रहे हैं।

क्या है मामला?
मुजफ्फरपुर मामले में कोर्ट का आदेश था कि जांच कर रहे सीबीआई अधिकारी एके शर्मा का ट्रांसफर बिना न्यायालय की इजाजत के नहीं किया जाए। लेकिन सीबीआई के दो शीर्ष अधिकारी आलोक वर्मा और राकेश अस्थाना के बीच मचे घमासान के बाद केंद्र की मोदी सरकार ने सीवीसीकी सिफारिश पर दोनों अधिकारियों को छु्ट्टी पर भेज दिया और रातोंरात नागेश्वर राव को सीबीआई का अंतरिम निदेशक नियुक्त कर दिया। एके शर्मा सीबीआई में संयुक्त निदेशक पद पर थे और उनका कार्यकाल अभी सीबीआई में बचा हुआ था, लेकिन नागेश्वसर राव के सीबीआई का अंतरिम निदेशक बनते ही एके शर्मा का तबादला सीबीआई से सीआरपीएफ़ में कर दिया। 17 जनवरी को तबादले का आदेश दिया, जिसमें उनको सीआरपीएफ़ के अतिरिक्त महानिदेशक पद पर भेज दिया गया।

इस पूरे प्रकरण पर उच्चतम न्यायालय ने नागेश्वर राव को फटकार लगाई थी, जिस पर आज सुनवाई होनी थी। लेकिन सुनवाई से एक दिन पहले ही यानी सोमवार 11 फरवरी को नागेश्वर राव ने उच्चतम न्यायालय में माफीनामा देकर माफी मांग ली थी। उन्होंने अपने माफीनामे में कहा था कि ये भूल उनसे अनजाने में हुई है।

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