Last Update On : 25 10 2018 08:59:02 AM
फाइल फोटो

झूठा शपथ पत्र देने के मामले में उत्तराखण्ड में होने वाले नगर निकाय चुनावों के बाद भविष्य में ऐसे प्रत्याशियों के खिलाफ भी महज एक शिकायत के आधार पर कार्यवाही हो सकती है, जो चुनाव में भले ही अपनी जमानत जब्त करा चुके हों…

रामनगर, जनज्वार। नगर निकाय चुनाव की सरगर्मियों के बीच निकाय चुनाव में अध्यक्ष व सभासद पदों पर चुनाव लड़ने की इच्छा के सामने ‘नजूल’ का भूत मुंह बाये खड़ा होने से दावेदारों को मुश्किलों का सामना कर पड़ सकता है।

नजूल के इस करंट से बचने के लिये यदि प्रत्याशी ने झूठ का सहारा लेने की कोशिश भी की तो ऐसी कोई भी कोशिश चुनाव हारने-जीतने के बाद भी महज एक शिकायत पर प्रत्याशी को जेल की चौखट पर ले जाकर खड़ा कर सकती है।

बताते चलें कि उत्तराखण्ड के निकाय चुनाव में बतौर प्रत्याशी शिरकत करने वाले प्रत्याशी का नगर पालिका अधिनियम के अनुसार नगर पालिका के मालिकाना हक या प्रबंधन वाली भूमि, भवन, सार्वजनिक सड़क, नाला-नाली या पटरी पर किसी भी प्रकार का अनाधिकृत कब्जा नहीं होना चाहिये। इस प्रकार को कोई कब्जा न होने का अनापत्ति प्रमाणपत्र चुनाव लड़ रहे सभी प्रत्याशियों को अपने नामांकन पत्र के साथ दाखिल करना है।

इसके साथ ही सभी प्रत्याशियों को इस आशय का शपथ पत्र भी देना होगा कि उनके अथवा उनके कानूनी वारिस का नगर पालिका की उपरोक्त श्रेणी में आने वाली किसी भी जगह कोई कब्जा नहीं है। इस मामले में नगर पालिकाएं अपने स्तर से प्रत्याशी को अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी करने में कड़ी एहतियात बरत रहीं हैं।

नजूल भूमि पर कब्जेधारक प्रत्याशी अपने आशियाने कागजों में दूसरी जगह दिखाकर अनापत्ति प्रमाण पत्र बनवा रहे हैं। लेकिन समस्या वहां पर है जहां पूरे के पूरे मुहल्ले नजूल पर ही बसे हैं। इन क्षेत्रों से सभासद पद का चुनाव लड़ने वाले कई प्रत्याशी नजूल भूमि के करंट से अपने को बचाने के लिये नगर पालिका को गुमराह कर अनापत्ति प्रमाण पत्र बनवाने का भी प्रयास कर रहे हैं।

आम तौर पर ऐसे प्रत्याशियों का मानना है कि नजूल भूमि की गाज उन पर चुनाव जीतने के बाद ही गिरेगी, लेकिन यहां बताना जरूरी है कि प्रत्याशी द्वारा दिये गये शपथ पत्र में कोई भी तथ्य गलत होने पर कार्यवाही के लिये प्रत्याशी का चुनाव जीतना पर्याप्त नहीं होगा।

झूठा शपथ पत्र देने के मामले में चुनाव के बाद भविष्य में ऐसे प्रत्याशियों के खिलाफ भी महज एक शिकायत के आधार पर कार्यवाही हो सकती है, जो चुनाव में भले ही अपनी जमानत जब्त करा चुके हों।

गलत शपथ पत्र के आधार पर चुनाव लड़कर जीतने वाले प्रत्याशियों का चुनाव अवैध घोषित करके उनका निर्वाचन तो रदद होगा ही, इसके अलावा कूटरचित दस्तावेज तैयार करने व चुनाव आयोग को गलत जानकारी देकर धोखाधड़ी करने के प्रयास में मुकदमा दर्ज होने की अवस्था में जेल भी जाना पड़ सकता है।