Last Update On : 21 08 2018 05:09:24 PM

नीतीश बाबू के राज में बिहार की 35 साल की एक महिला को नंगा कर भीड़ पूरे शहर में घुमाती रही, मगर दो-दो पुलिस टीम मौके पर होते हुए भी बनी रहीं तमाशबीन

सुशील मानव की रिपोर्ट

वो कौन सी मनोदशा है जो हर कोई इस मौके की ताक में बैठा हुआ है कि कैसे भी कहीं एक मौका मिल जाए तो वो भी किसी औरत को नंगा कर दे? ये कौन सी संस्कृति है जो औरत की देह से लत्ता लत्ता नोचकर उसे नंगी परेड करवाकर गौरवान्वित महसूस करता है? ये कौन सा समाज है जो किसी औरत को सड़क और बाजार में नंगी नुमाइश करके अपनी सभ्यता का इतिहास लिखता है? क्यों नहीं कोई विरोध करता है ऐसे समाज का, ऐसी संस्कृति का, ऐसे लोगों का, ऐसे बदले की भावना का जो औरत को नंगी करके पूरा होता है?

किसी स्त्री को नंगी करके घुमाना क्या यही वो महान सनातन संस्कृति है। क्योंकि किसी स्त्री को नंगा होने से बचाने वाले कृष्ण की संस्कृति के उदाहरण तो समाज में कहीं नहीं दिखती। जबकि स्त्री को सार्वजनिक नंगी करने की घटनाओं से अक्सर ही दिखती हैं।

कल सोमवार 20 अगस्त को बिहार के भोजपुर जिले के बिहिया शहर के रेड लाइट एरिया में एक महिला को नंगा घुमाने का मामला सामने आया है।

घटनाक्रम के मुताबिक रेड लाइट एरिया से लगे वार्ड नंबर 13 के एक घर के पास रेलवे की पटरी पर विमलेश शाह का शव रेलवे लाइन के बीचोंबीच पड़ा हुआ मिला। बीस वर्षीय विमलेश शाह बहोरनपुर ओपी के दामोदपुर गांव का रहने वाला था। सूचना मिलने पर रेलवे की पुलिस मौका-ए-वारदात पर पहुंची, तो सूचना पाकर स्थानीय पुलिस भी पहुँच गई।

मगर सीमा-विवाद के चलते शव कौन उठाए, इस बात को लेकर दोनों दुविधा में पड़ गए, जिसके चलते मौके पर मौजूद भीड़ उन्मादित और हिंसक होकर रेड लाइट एरिया पर हमला कर दिये। तीन घरों में आग, दुकानों और एक गाड़ी को आग के हवाले कर दिया गया। तभी रेलवे ट्रैक से गुजरने वाली जनसाधारण एक्सप्रेस, सिकंदराबाद-दानापुर एक्सप्रेस और एक पैसेंजर ट्रेन पर पथराव किया गया, जिससे ट्रेनों में यात्रा कर रहे छह लोग गंभीर रूप से जख्मी हो गए। उपद्रवी भीड़ पर कार्रवाई करने इन्हें रोकने के बजाय पुलिस तब तक अपने ही सीमा विवाद में उलझी रही।

हद तो तब हो गई जब उन्मादित भीड़ रेड लाइट एरिया के एक घर से 35 साल की एक महिला को बाहर निकाल लाई और उस औरत को नंगा करके वे लोग पूरे शहर में घुमाते रहे। दो-दो पुलिस टीम के मौके पर होते हुए भी ये सब होता रहा!

पुलिस की असंवेदनशीलता का आलम ये था कि वो भी किंकर्तव्यविमूढ़ होकर खड़ी तमाशा देखती रही। जबकि वो निरपराध महिला लगातार भीड़ द्वारा शहर में घुमाई जाती रही। ये सब कहीं और नहीं सुशासन बाबू की सरकार और गठबंधनधारी बीजेपी के रामराज्य में हो रहा था।

शाम के सात बजे जब पुलिस प्रशासन होश में आया तो पुलिस लाइंस से फोर्स, फायर ब्रिगेड और आसपास के थानों की फोर्स घटनास्थल पर पहुंची और तब जाकर पगलाई भीड़ से उस पीड़ित महिला को मुक्त कराया जा सका। जिस औरत के नंगे किए जाने का तमाशा पुलिस घंटों देखती रही, उसको आखिरकार पुलिस ने अपनी कस्टडी में लेकर कपड़े पहना अपनी प्रशासनिक जिम्मेदारी निभा दी।

भीड़ को खदेड़ने के लिए गर पुलिस द्वारा पहले ही हवाई फायरिंग कर दी गई होती, तो इतना सब नहीं होता। न ही उक्त महिला को इतनी बर्बरतम यातना से गुजरना पड़ता।

इसके बाद पुलिस ने डेड बॉडी को अपने कब्जे में लिया और पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया। खौफ का आलम अब ये है कि जिस रेड लाइट एरिया पर भीड़ ने हमला किया था, वहां के लोग अपने घर-बार छोड़कर भागे खड़े हुए हैं।

पुलिस की जानकारी के मुताबिक विमलेश कुमार शाह 20 अगस्त को आरा के कौशल विकास केंद्र में नामांकन करवाने के लिए गया था। वहां पर उसकी घरवालों से बात भी हुई थी। लौटते वक्त वो बिहिया पहुंचा और फिर थोड़ी ही देर बाद संदेहास्पद परिस्थियों में उसकी लाश रेलवे लाइन के किनारे मिली। लोगों को जब इस बात की भनक लगी तो उन्होंने रेड लाइट एरिया में रहने वाली एक महिला पर हत्या का शक जताया और फिर रेड लाइट एरिया पर हमला कर दिया। उधर विमलेश की मौत की खबर सुनकर उसकी 16 साल की बहन शोभा की भी सदमे से मौत हो गई।

वहीं अपनी नाकामी पर पानी डालते हुए जगदीशपुर के एसडीएम अरुण कुमार कहते हैं कि पूरे मामले की जांच की जा रही है। मौके पर मौजूद रहे पुलिस के आला अधिकारी समेत किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। प्रशासन के एसपी अवकाश कुमार ने आगजनी, पत्थरबाजी और महिला को नंगा कर घुमाने से रोकने में नाकाम रहे बिहिया के थानेदार कुंवर गुप्ता समेत 8 पुलिसवालों को सस्पेंड कर दिया है, जबकि रेलवे पुलिस ने भी कार्रवाई करते हुए जीआरपी आरा के थानाध्यक्ष अशोक कुमार सिंह, बिहिया जीआरपी के एसआई तपेश्वर सिंह, एक हवलदार और चार पुलिसवालों को निलंबित कर दिया है।

पटना जोन के आइजी नैय्यर हसनैन खान के मुताबिक आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही है। इस मामले में पुलिस ने अभी तक एक स्थानीय आरजेडी नेता समेत कुल 13 लोगों को हिरासत में लिया है और उनसे पूछताछ की जा रही है।

गौरतलब है कि हमारे देश में किसी महिला को नंगा करके घुमाने का यह कोई पहला मामला नहीं है। ऐसे कीर्तिमान हमारे देश में गढ़े जाते रहे हैं। इससे पहले 9 जुलाई 2018 को उदयपुर राजस्थान के सुखेर थाना क्षेत्र में अपने प्रेमी से मिलने के लिए आई एक महिला को उसके पूर्व पति और गाँववालों ने जमकर पीटने के बाद प्रेमी-प्रेमिका को नंगा करके पूरे गांव में घुमाया गया था, जबकि लगभग एक साल पहले राजस्थान के ही बांसवाड़ा जिले के कलिंजरा थाना क्षेत्र के शंभुपुरा गांव में 19 अप्रैल 2017 को भी एक प्रेमी-प्रेमिका निर्वस्त्र कर के पूरे गांव भर घुमाया गया था।

उड़ीसा और झारखंड में भी औरतों को डायन बताकर उन्हें नंगा करके पूरे गाँव में घुमाने और फिर उनकी हत्या कर देने की कई घटनाएं हर साल सामने आती हैं।

सबसे बड़ा सवाल उठता है कि इस तरह की बर्बर घटनाओं पर सरकार और प्रशासन द्वारा रोकथाम क्यों नहीं की जाती है। पिछले साल या इस साल राजस्थान में प्रेमी युगल को नंगा करके घुमाने की घटना के बाद ही क्यों अन्य के राज्यों की सरकारों ने अपने राज्यों में इसे लेकर कोई एडवाइजरी जारी क्यों नहीं किया कि इस तरह की चीजें बर्दाश्त नहीं की जाएंगी।

क्या विडंबना है चरित्रहीनता के मसले महाभारत के दुशासन का जिक्र करने वाला समाज स्त्रियों के प्रति इस तरह की अमानवीयता और बर्बरता को मान्यता देता है। किसी कथित अपराध या आरोप के आधार किसी स्त्री को नंगा करके घुमाना या उसका बलात्कार करना वो भी पूरे समाज पूरे गाँव के सामने पूरे के पूरे समाज के अपराधी हो जाने की शिनाख्त करता है।

ऐसे अपराधों को रोकने को कौन कहे, उलटा उक्त अमानवीय घटना का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर देना समाज के लगातार असंवेदनशील होते जाने का चरम है। इस तरह की किसी भी घटना पर उक्त स्थान की महिलाओं या महिला संगठनों द्वारा विरोध प्रदर्शन न करना ये तो और भी हैरानी और शर्मिंदगी का सबब है।

क्या जिन जिन घरों परिवारों के लोग इन शर्मनाक घटनाओं में शामिल थे, उस घर की महिलाओं को कपड़े उतारकर उनका और उस समाज का विरोध नहीं करना चाहिए। शायद ऐसा होने लगे तो इन घटनाओं पर कुछ हद तक लगाम लगे।