वीरेंदर भाटिया, स्वतंत्र पत्रकार

4 डॉलर यानि तकरीबन ढाई सौ रुपए से चली एक e करेंसी बिटकॉइन 14 लाख तक पहुंच गई।  एक आम कहावत हमारे समाज मे प्रचलित है कि हाथी एक पैसे का था तो महंगा लगता था और 100 का हो गया तो इस जल्दी में की कहीं और महंगा ना हो जाये, हम खरीदने के लिए टूट पड़ते है।

निवेश के इतिहास में नजर डाली जाए तो किसी भी पुरानी या नई चीज को जब उठाया जाता है तो उसके पीछे एक कहानी रची जाती है। सिलवर यानी चांदी 2006 में 2100 rs किलो थी। 2011 में इसके पीछे सटोरिये सक्रिय हुए और एक ही साल में इसे 74000 तक ले गए। बहुत सारी कहानियां पृष्टभूमि में रची गयी।

एक तय रणनीति के तहत फिर सिल्वर गिरनी शुरू हो गयी। gann angle थ्योरी कहती है कि कोई कमोडिटी चार्ट में 90 डिग्री के एंगल से ऊपर जाती है तो तय मानिए की मुनाफा खोरो की डेड लाइन नज़दीक है। सिल्वर 55000 से 75000 मात्र 5 ट्रेडिंग डे में गयी लेकिन वहां से वापिस तीन ही दिन में आई। बहुत लोगो ने पूछा कि सिल्वर का यह रेट फिर कब आएगा। gann थ्योरी कहती है कि कम से पांच साल वह रेट फिर नही आएगा।

ग्वार जिसकी कभी खेती उपज में कोई चर्चा नही होती थी। उसे दिल्ली के 4 स्टेरियो ने उठाया। 2200 rs कविंटल का ग्वार 33000 तक गया। अनेक कहानियां रची गयी। अनेक कहानियां बाजार ने बताई। किसान मंच के एक कार्यक्रम में किसानो ने ही सवाल पूछ लिया कि ग्वार वापस उस रेट कब आएगा और मैंने तब भी कहा था कि आपकी और मेरी जिंदगी में दोबारा ये रेट नही दिखेगा। जबकि उस वक्त ग्वार 14000 rs क्विटल था।

बिटकॉइन के पास ग्वार या चांदी जैसी कोई फंडामेंटल वैल्यू नही है। जो हैं वह नेट पर ही है। तकनीक इसकी स्टोरी है जिसके बल पर मांग खड़ी की गई है लेकिन कोई यह बताने को राजी नही कि जब इसका जनक ही नही बाजार में उसका डिस्ट्रीब्यूटर चैनल कौन उपडेट कर रहा है। नित नई तकनीक जो add on हो रही है वह क्या है और वह ऐड करने की परमिशन कौन देता है।

कोई  भी कमोडिटी जब तक बाजार में भागती  है उसकी रोज नई सक्सेस स्टोरी बाजार में होती है। जिस दिन वह धराशायी होती है तब उसकी असल स्टोरी जनता को मालूम पड़ती है।

बिटकॉइन बिना फुट प्रिंट की e करेंसी है जिसे कोई भी इकॉनमी बर्दाश्त नही करेगी। बिटकॉइन जिंदगी भर का निवेश नही है। जब तक जिसकी चल रही है वह चला रहा है। पानी का बुलबुला जिस दिन फूटेगा बहुत सारे लोग एक दूसरे को blame देंगे और पुलिस पर्चे होंगे।
अमेरिका शेयर बाजार में एक आम उक्ति है कि जब टैक्सी वाला आपको टिप देना शुरू कर दे तो mkt से अपना पैसा निकाल लो।

सामान्य नियम है बाजार का कि जब माल ऑपरेटर के हाथ होता है तब mkt में डिमांड खड़ी कर दी जाती। उस डिमांड से रेट जम्प किया जाता है और फिर डिमांड वालो को माल चेप दिया जाता है। फिर जब माल ऑपरेटर से निकल कर आम निवेशक के हाथ आ जाता है तब वह लाइफ टाइम हाई रेट होता है।

बाजार में बिटकॉइन अपने अंतिम फेज में है जहां रेट accumulation के दौर से निकल कर दौड़ने की रेंज में आ गया है । अब जिसके पास माल है वह भाव appreciate कर रहा है। अंतिम भाव क्या हो अंदाज लगाना मुश्किल है लेकिन बिटकॉइन एक हाई रिस्की इन्वेस्टमेंट है जिसका डूबना निकट भविष्य में तय है। बिहाइंड स्टोरी क्या है यह डूबने पर पता चलती है। टैक्सी वाला टिप देने लगा है तो सम्भलने के दिन आपके हैं।

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