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पवित्रा लामा, चर्चित नेपाली कवियत्री

छोटे शहर की लड़कियाँ
जैसे रजनीगन्धा की खुशबूदार लड़ियाँ
जैसे हरे गीले पत्तों पर बारिश की थोपलें
दादी की कहानियाँ या गुलाब की कोपलें

छोटे शहर की लड़कियाँ
जब मुस्कुराती हैं,
धानी सी चुनर लहराती है अनछुई हवाओं में
कुछ मचल जाता है अनजाने धड़कनों में
लहलहाती हैं सपनों की बालियाँ बड़ी—बड़ी आँखों में
खिंच जाती हैं इन्द्रधनुषी लकीरें भींगे आसमानों में

छोटे शहर की लड़कियाँ
हर बात का एक ही मतलब जानती हैं
जैसे दिन का मतलब दिन
रात का मतलब रात
ख्वाब का मतलब ख्वाब
लाज का मतलब लाज
और प्यार का मतलब सिर्फ प्यार।

इसलिए और सिर्फ इसलिए
ये ठगी ठगाई जाती हैं
बहकाई और रूलाई जाती हैं
कभी जलाईं भी जाती हैं।
या छली जाती हैं प्यार की बेदी पर
या मसली जाती हैं भोग के बिस्तर पर
या फेंकी जाती हैं गहरी नाली या खाइयों पर

काश, कि छोटे शहर की लड़कियाँ जान पातीं
ये हरी नीली सी रंगीन दुनिया
ये इन्सानों से भरी दुनिया,
ये अरमानों से भरी दुनिया,
जिसे हम प्यार से ‘संसार’ कहते हैं
और कुछ इसे ‘बाजार’ भी कहते हैं
यहाँ इन्द्रधनुषों को तोड़ा जाता है
यहाँ धड़कनों को झिझोंड़ा जाता है
खुली हवाओं को निचोड़ा जाता है
और उगते सपनों को मरोड़ा जाता है

काश कि छोटे शहर की लड़कियाँ समझ पातीं
गोल से चपटी हो रही इस दुनिया में
बदल रहे हैं हर घड़ी बदस्तूर
लफ्जों के मायने
और हर बात का
एक ही मतलब नहीं होता।

(दार्जीलिंग में राजस्व भूमि अधिकारी पवित्रा नेपाली भाषा की चर्चित कवि हैं।)