पहली बार नोटा की व्यवस्था होने पर आधी-अधूरी जानकारी होने के बाद भी 2014 के लोकसभा चुनाव में देश के साठ लाख से अधिक लोगों ने नोटा का प्रयोग करते हुये अपना आक्रोश व्यक्त किया था…

रामनगर से सलीम मलिक की रिपोर्ट

बीते लोकसभा चुनाव में चुनाव आयोग द्वारा बड़े जोर-शोर से शुरू की गई नोटा की व्यवस्था को लेकर चुनाव आयोग पांच साल भी शायद कोई गाइड लाइन तय नहीं कर पाया है। यही वजह है कि निर्वाचन प्रक्रिया में जुटे उसके अधिकारी ही नोटा को लेकर भ्रम का शिकार बने हुये हैं।

चुनावी मत पत्र में चुनाव आयोग की दी गई व्यवस्था ‘उपरोक्त में से कोई नहीं’ (नोटा) पर चुनाव आयोग की भ्रम की स्थिति का पता समाजवादी लोक मंच द्वारा ‘नोटा’ के प्रचार-प्रसार की इजाजत मांगने के बाद चुनाव आयोग के दिये गये जवाब से हुआ है।

गौरतलब है कि बीते लोकसभा चुनाव में देश के चुनाव आयोग ने किसी भी प्रत्याशी के पसंद न आने की स्थिति में ‘नोटा’ यानी उपरोक्त प्रत्याशियों में से कोई नहीं का विकल्प दे रखा है। नोटा के वजूद में आने के बाद देश की कई विधानसभाओं के चुनाव में नोटा को विजयी व पराजित प्रत्याशियों का कारण भी माना गया था।

नोटा की व्यवस्था दिये जाने के बाद से चुनाव आयोग द्वारा नोटा के प्रति कोई गाइडलाईन न बनाने के कारण निर्वाचन आयोग के सामने समाजवादी लोक मंच द्वारा नोटा का प्रचार-प्रसार की अनुमति मांगे जाने के कारण उहापोह की स्थिति पैदा हो गई।

आदर्श चुनावी आचार संहिता लागू होने के बाद किसी भी प्रचार आदि के लिये निर्वाचन आयोग की अनुमति आवश्यक होने की वजह से समाजवादी लोक मंच ने दो अप्रेल को माइक-बैनर के साथ वाहन से नोटा का प्रचार-प्रसार करने की अनुमति के लिये अपना आवेदन सहायक चुनाव अधिकारी कार्यालय में दिया था।

नोटा के प्रचार की अनुमति का अटपटा आवेदन देख असमंजस में पड़े एईओ ने यह आवेदन अपने उच्चाधिकारियों को भेज दिया। छह अप्रैल को समाजवादी लोक मंच की ओर से इस बाबत चुनाव आयोग के शिकायती पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई गई, तो वहां से सूचना मिली कि दो दिन में आपका आवेदन निस्तारण कर दिया जायेगा। लेकिन इसी दिन शाम को पोर्टल पर इस शिकायत का स्टेटस ‘रिजोलव्ड’ दिखाया गया।

पोर्टल पर बताया गया कि आपने नोटा के लिये अनुमति मांगी थी, आप न तो नोटा के एजेन्ट हैं और न ही कन्डीडेट हैं। इसलिये आपका आवेदन उच्चाधिकारियों से दिशा-निर्देश प्राप्त करने के लिये भेज दिया गया है। सात अप्रैल को समाजवादी लोकमंच ने मुख्य चुनाव आयोग को इस बाबत मेल भेजा तथा आठ अप्रैल को राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी से इस बारे में दूरभाष से सम्पर्क भी किया, लेकिन कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिला।

आज 8 अप्रैल को आयोजित पत्रकार वार्ता में समाजवादी लोकमंच के मुनीष कुमार ने इस प्रकरण को साझा करते हुये बताया कि पहली बार नोटा की व्यवस्था होने पर आधी-अधूरी जानकारी होने के बाद भी 2014 के लोकसभा चुनाव में देश के साठ लाख से अधिक लोगो ने नोटा का प्रयोग करते हुये अपना आक्रोश व्यक्त किया था।

चुनाव आयोग व बड़े राष्ट्रीय राजनीतिक दल नोटा को लेकर घबराये हुये हैं। चुनाव के दौरान हर प्रत्याशी को अपना प्रचार-प्रसार करने की अनुमति होती है, उसी तर्ज पर देश के किसी भी मतदाता को नोटा का प्रचार-प्रसार करने की भी अनुमति देनी चाहिये।

नोटा के प्रचार-प्रसार की अनुमति न देकर चुनाव आयोग देश के संविधान के अनुच्छेद 19 का खुला उल्लंघन कर रहा है। इस मौके पर पत्रकार वार्ता में ललिता रावत, सरस्वती जोशी, कौशल्या, किशन शर्मा, मनमोहन अग्रवाल, आनन्द नेगी, केसर राणा आदि मौजूद रहे।


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