Last Update On : 11 04 2018 08:58:00 PM

नोटबंदी के समय में सबसे ज्यादा पैसा उगाहने वाली पार्टी बनी भाजपा, राष्ट्रीय पार्टियों में सबसे कम पैसा भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के खाते में, देश के सभी 7 राष्ट्रीय दलों की 75 फीसदी कमाई का जरिया है चंदा

लगातार सामने आ रहे घपलों—घोटालों के बाद अब साबित होने लगा है कि नोटबंदी किसके लिए की गयी थी और कौन सा भ्रष्टाचार रोक रहे थे मोदी

जनज्वार, दिल्ली। 2016 के अंत में भाजपा के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नोटबंदी जैसा कदम उठाया और उसके बाद जीएसटी लागू हुई। इससे आम लोगों की जान जहां सांसत में आई, मगर भाजपा की तो जैसे पौ—बारह हुई है।

नोटबंदी पर गाल बजाते बीत गए मोदी के 12 महीने

बीते एक साल के दौरान भाजपा की कमाई में जबर्दस्त बढ़ोत्तरी हुई है। एक सरकारी रिपोर्ट  के मुताबिक एक साल के अंदर भाजपा की कमाई 81 प्रतिशत बढ़ी है।

कांग्रेस को छोड़ अन्य 7 पार्टियों की कमाई में भी 51 फीसदी की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है। वहीं कांग्रेस की कमाई बीते एक साल के दौरान कम हुई है। यह आंकड़ा चुनाव आयोग को दी गई रिपोर्ट में सामने आई है।

पूंजीपतियों में अडानी ने 2017 में कमाये सबसे ज्यादा पैसे

गौरतलब है कि सालाना हर दल को अपने आय—व्यय का ब्यौरा चुनाव आयोग के सामने रखना होता है। भाजपा द्वारा चुनाव आयोग को दी गई रिपोर्ट से ही खुलासा हुआ है कि उसकी आय में सालभर के अंदर 81 फीसदी इजाफा हुआ है। वहीं कांग्रेस ने जो रिपोर्ट पेश की है उसके मुताबिक पिछले सालभर में पार्टी की कमाई में 14 फीसदी की गिरावट आई है।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि भाजपा की बढ़ती इनकम से साफ हो रहा है कि भाजपा किसके लिए नोटबंदी कर रही थी। जिस तरह से देश में घपले—घोटाले सामने आ रहे हैं उससे साफ हो गया है कि मोदी कौन सा भ्रष्टाचार रोक रहे थे। भ्रष्टाचार न रुकने का एक बड़ा कारण पार्टी चंदे में दिनोंदिन होती वृद्धि है। कांग्रेस के मुताबिक भ्रष्टाचारियों ने ही भाजपा को इतनी भारी मात्रा में चंदा दिया है, जिससे कि उनके कुकर्म सामने न आ पाएं।

तो पूंजीपतियों के फायदे के लिए थी नोटबंदी

वित्त वर्ष 2016-17 के दौरान भाजपा की कमाई और खर्च पर एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रैटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) संस्था ने एक रिपोर्ट तैयार की है। एडीआर के मुताबिक दोनों बीजेपी और कांग्रेस ने अपनी ऑडिट रिपोर्ट जमा कराने का काम 30 अगस्त 2017 की अंतिम तारीख के बाद किया, जिसमें दोनों प्रमुख दलों भाजपा और कांग्रेस ने चंदे को अपनी पार्टी की कमाई का प्रमुख जरिया बताया है।

एडीआर की रिपोर्ट के मुताबिक बीजेपी की कमाई में एक वर्ष के दौरान 463.41 करोड़ रुपये की बढ़ोत्तरी हुई है। जहां वित्त पर्ष 2015 में भाजपा की कमाई 570.86 करोड़ रुपये थी, वहीं 2016-17 में यह बढ़कर 1,034.27 करोड़ रुपये हो गई। दूसरी तरफ कांग्रेस की कमाई पिछले साल के मुकाबले 36.20 करोड़ रुपये कम आंकी गई है। वित्त वर्ष 2015-16 के दौरान कांग्रेस ने 261.56 करोड़ रुपये की कमाई की, वहीं 2016-17 के दौरान पार्टी खाते में मात्र 225.36 करोड़ रुपये आए, जो बीजेपी के सामने कहीं भी नहीं टिकती।

पूंजीपतियों का मुंशी निकला जनता के खजाने का चौकीदार

सवाल उठता है कि जहां देश एक तरफ मंदी की मार से जूझ रहा है, वहीं बीजेपी की आय में दिन दूनी रात चौगुनी प्रगति कहां से हो रही है। इस बढ़ती कमाई ने उसे कटघरे में भी खड़ा किया है।

बीजेपी के मुताबिक उसे 1000 करोड़ रुपये का चंदा मिला है, तो कांग्रेस को मात्र 50 करोड़ रुपये बतौर चंदा दिया गया है। कौन हैं बीजेपी को इतनी भारी मात्रा में चंदा देने वाले दानदाता, क्या उनका नाम सामने नहीं आना चाहिए। या ये भी एक रहस्य ही बनकर रह जाएगा।

एडीआर की रिपोर्ट के मुताबिक ही वित्त वर्ष 2016-17 के दौरान भाजपा ने चुनाव और प्रचार के लिए कुल 606.64 करोड़ रुपये खर्चे, और इसी दौरान तकरीबन 70 करोड़ रुपये प्रशासनिक कार्यों में खर्चे।

एडीआर ने जो रिपोर्ट तैयार की है उसके मुताबिक देश की सात राष्ट्रीय पार्टियों की कमाई में कुल 525.99 करोड़ रुपये की बढ़ोत्तरी हुई है। राजनीतिक दलों ने कहा है कि उनकी यह कमाई मुख्य रूप से राजनीतिक चंदों के कारण बढ़ी है। जहां 2015-16 में पार्टियों को लगभग 1,033 करोड़ रुपये मिले, वहीं 2016-17 में कुल 7 पार्टियों की कमाई बढ़कर लगभग 1559 करोड़ रुपये हो गई है।