Last Update On : 30 07 2018 06:38:19 PM
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ममता बोलीं, मोदी सरकार चुनावी गेम प्लान के तहत लोगों को अलग-थलग कर रही है। लोग अपने ही देश में शरणार्थी की तरह जीने को मजबूर होंगे। इस ड्रॉफ्ट में पासपोर्ट, आधार कार्ड और पहचान पत्र धारकों के नाम शामिल नहीं किये गये हैं। क्या सरकार जबरदस्ती लोगों को यहां से बेदखल करना चाहती है…

जनज्वार। असम में आज से राष्ट्रीय नागरिक सिटिजन चार्ट NRCAssam जारी कर दिया गया है, जिसमें 40 लाख लोगों को अवैध को पाया गया है और 2.89 करोड़ का नाम इसमें शामिल किया गया है।

असम में जारी एनआरसी मसौदे पर सवाल उठाते हुए पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने तमाम सवाल उठाए हैं। केंद्र की भाजपा सरकार पर आरोप लगाया कि मोदी सरकार एक गेम प्लान के तहत लोगों को अलग—थलग कर रही है। लोग अपने ही देश में शरणार्थी की तरह जीने को मजबूर होंगे। इस ड्रॉफ्ट में पासपोर्ट, आधार कार्ड और पहचान पत्र धारकों के नाम शामिल नहीं किये गये हैं। क्या सरकार जबरदस्ती लोगों को यहां से बेदखल करना चाहती है।

ममता बनर्जी ने बीजेपी पर सवाल उठाते हुए कहा है कि हर राज्य में बाहर से आये लोग रहते हैं। असम में सरकार ने संवाद की सभी सेवाएं बंद कर दी हैं। महिलाओं और बच्चों तक को जेल भेज दिया गया है। यह सिर्फ भाजपा की एक चुनावी चाल है, क्या इस तरह से लोगों को अपने ही घर से बाहर निकाला जाना चाहिए।

मीडिया में आ रही रिपोर्टों के मुताबिक ममता बनर्जी ने कहा कि 1947 में जो लोग राज्य में आये हैं वे भारतीय हैं। कई परिवारों जिनकी 7 पुश्तें यहां रहती आई हैं सभी वैध दस्तावेज मौजूद होने के बावजूद उन्हें लिस्ट में शामिल नहीं किया गया। मोदी सरकार ने इन लोगों के लिये कोर्ट में आवाज क्यों नहीं उठाई, ऐसा इसलिए क्योंकि उन्हें एक गेम प्लान के तहत अलग-थलग किया जा रहा है।

गौरतलब है कि असम में आज राष्ट्रीय नागरिक सिटिजन चार्ट जारी कर दिया गया है, जिसमें 40 लाख लोगों को अवैध बताया गया है और 2.89 करोड़ का नाम इसमें शामिल किया गया है। इस लिस्ट के आने के बाद गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि यह मसौदा सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में बनवाया गया है, जिसका केंद्र या राज्य की भाजपा सरकार से कोई लेना-देना नहीं है। यह ड्राफ्ट सूची है, अंतिम सूची नहीं। अगर किसी नागरिक का नाम अंतिम सूची में भी नहीं आ पाता तो भी वह विदेशी न्यायाधिकरण में जा सकता है। सरकार द्वारा किसी के विरुद्ध बलपूर्वक कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी, इसलिए किसी को घबराने की ज़रूरत नहीं है।’

अंतिम मसौदे में 40 लाख आवेदकों के नाम शामिल नहीं किए जाने ‘वोट बैंक की राजनीति’ बताते हुए ममता ने कहा कि मैं उन लोगों के लिए परेशान हूं जो अपने ही देश में रिफ्यूजी बनने जा रहे हैं। यह एक षडयंत्र है जिसके जरिये बिहारियों और बंगालियों को यहां से निकाला जा रहा है। इसका परिणाम बंगाल पर भी पड़ेगा। सरकार ने जिन 40 लाख लोगों का नाम नागरिकों की सूची से हटाया है, क्या उनके पुनर्वास की कोई योजना भी बनाई गई है?

हालांकि जिन 40 लाख लोगों को लिस्ट में शामिल नहीं किया गया है, उन्हें बंगाल में शरण दिए जाने पर ममता बोलीं कि उनका अपना घर है, बावजूद उसके अगर जरूरत पड़ी तो हमारी सरकार कुछ न कुछ जरूर करेगी।