Last Update On : 05 03 2018 06:48:00 PM

शायद अब भारत की पहचान घोटालेबाज देश के बतौर होने लगी होगी, क्योंकि एक घोटाले की खबर ठंडी नहीं पड़ती कि दूसरा हैरतनाक घोटाला सामने आ जाता है, अब टीडीएस घोटाले में 447 कंपनियों ने कर्मचारियों के साथ किया 3200 करोड़ का गड़बड़झाला

मुंबई। अभी पीएनबी घोटाला सुर्खियों में ही है कि एक और नया घोटाला सामने आ गया है, वो भी पूरे 3200 करोड़ का।

मीडिया में आ रही खबरों के मुताबिक देश की 447 प्रतिष्ठित कंपनियों ने कर्मचारियों की सेलरी में से 3200 करोड़ का टीडीएस तो काटा, मगर उसे सरकार के खाते में जमा न कर अपने कारोबार में खर्च किया। कर्मचारियों को इस बात की भनक तक नहीं लग पाई कि उनकी सेलरी में से कटे टीडीएस के साथ उनके मालिकान क्या कर रहे हैं।

इस घोटाले का खुलासा आयकर विभाग ने किया है। आयकर विभाग के अधिकारियों के मुताबिक यह खुलासा एक सर्वे के माध्यम से हुआ है। 447 कंपनियों ने अपने मुलाजिमों की सेलरी में से तो टीडीएस के रूप में धनराशि काट ली, मगर उसे सरकारी खाते में जमा नहीं किया।

3200 करोड़ का यह घोटाला अप्रैल 2017 से मार्च 2018 के बीच का है। यानी एक साल के अंदर इन कंपनियों ने इस गड़बड़झाले को अंजाम दिया। कहा यह भी जा रहा है कि टीडीएस चोरी करने वालों में अभी तो कुछ का ही नाम सामने आया है, और भी कंपनियों का नाम आना शेष है।

मीडिया में आ रही खबरों के मुताबिक ही इस मामले में कंपनियों के खिलाफ वारंट जारी किए जा चुके हैं। गौरतलब है कि पहले ही भारत तकरीबन 13,000 करोड़ रुपए से भी ज्यादा के पीएनबी घोटाले से जूझ रहा है, इसमें भी अभी कुछ खुलासे होने शेष हैं।

आयकर विभाग के नियमों के मुताबिक कंपनियों द्वारा घपलेबाजी से टीडीएस चोरी करने पर 3 महीने से लेकर 7 साल तक की सजा दिए जाने का प्रावधान है। इस मसले पर यह भी खबरें आ रही हैं कि आयकर विभाग धोखाधड़ी से जुड़े आईपीसी के सेक्शन जोड़ने की तैयारी कर रहा है।

इस केस में बाजार की बड़ी—बड़ी मछलियां सामने आई हैं। हालांकि अभी नामों का खुलासा नहीं हो पाया है, मगर कहा जहा रहा है कि देश का एक बड़ा बिल्डर भी टीडीएस चोरी में शामिल है। इस बिल्डर ने अपने कर्मचारियों के वेतन से टीडीएस के बतौर 100 करोड़ रुपए काटे, मगर इसे सरकारी खाते में जमा न कर दोबारा अपने कारोबार में इस्तेमाल कर लिया।

टीडीएस चोरी में कई फिल्म प्रोडक्शन हाउस, इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी और स्टार्टअप का नाम भी सामने आ रहा है।

क्या है टीडीएस
टीडीएस वह रकम होती है जिसे कंपनियां अपने कर्मचारियों के वेतन में से बतौर टैक्स काटकर केंद्र सरकार के खाते में जमा करती हैं। चूंकि कर्मचारी इस रकम को कटवा चुके होते हैं तो आईटी रिटर्न भरते समय उन्हें इसकी चिंता नहीं होती कि टीडीएस कैसे भरा जाए। मगर इस घोटाले में कंपनियों ने कर्मचारियों का पैसा खुद इस्तेमाल कर लिया। इस मामले में कहा जा रहा है कि इन 447 कंपनियों के कर्मचारियों को टैक्स का पैसा एकमुश्त भरना पड़ सकता है।