Last Update On : 28 06 2018 01:58:15 PM
फाइल फोटो

मोदी ने काल्पनिक खतरे पैदा किए, काल्पनिक घोटाले पैदा किए, कैराना को नया कश्मीर बताकर फर्जी पलायन का भय बाँटा, अब मोदी लोगों को अपनी हत्या का भय बाँट रहे हैं…

सुशील मानव का विश्लेषण

आज हम जिस हालत में हैं वो पोस्ट-ट्रुथ पोलिटिक्स की विडंबना है। वैश्विक राजनीति पर इस पोस्ट-ट्रुथ का बहुत ही गहरा और व्यापक असर दिख रहा है। भारत, अमेरिका, जापान, इजरायल तथा जर्मनी समेत पूरे यूरोप में नस्लवादी दक्षिणपंथी ताकतें या तो सत्तासीन हैं या ज्यादा प्रभावी होकर उभरी हैं।

पूँजीवाद जब स्वजनित संकटों से घिर जाता है तो पोस्ट ट्रुथ पोलिटिक्स का सहारा लेता है और राजनीति में गोयबल्स जैसे महाझुट्ठों और ट्रंप व मोदी जैसे नस्लवादियों को आगे बढ़ा देता है। पोस्ट ट्रुथ में काल्पनिक तथ्यों और वास्तविक तथ्यों के बीच के अंतर को मिटा दिया जाता है। पूँजीवादी मीडिया और सोशल मीडिया इसके प्रचार प्रसार में सबसे बड़े सहयोगी होते हैं।

मोदी को अधिकारियों-मंत्रियों से रिकॉर्डिंग का खतरा तो नहीं?

पोस्ट ट्रुथ में सच की प्रासंगिकता को ही संदिग्ध बना दिया जाता है। पोस्ट ट्रुथ पोलिटिक्स में सच का महत्व नहीं रह जाता, सिर्फ इंसान की भावनाएँ और विश्वास जिनका कोई यथार्थ नही होता ही सर्वोपरि हो जाते हैं। यूँ कहें कि झूठ को सच की तरह पेश किया जाता है।

विमुद्रीकरण (डिमनेजाइशन) एक ऐसा ही पोस्ट ट्रुथ था, जिस पर देश ने आँखें बंद करके मोदी सरकार की भ्रामक बातों पर भरोसा कर लिया था, जिसे मोदी ने ईमानदारी का उत्सव बताकर ग्लोरीफाई किया और लोग मगन होकर सच और अपने दुख भूल बैठे।

जबकि वास्तविकता में नोटबंदी के बाद मार्केट से पैसे गायब हो गए। छोटे—मझोले उद्योग बहुत बुरी तरह प्रभावित होकर बंद हो गए। लाखों कारोबारी देश छोड़कर विदेश भाग गए। देश की अर्थव्यवस्था पूरी तरह चौपट हो गई। मोदी की पूरी राजनीति ही काल्पनिक खतरों, काल्पनिक मुद्दों, काल्पनिक भ्रष्टाचार के पोपागैंडा पर टिकी हुई है।

2014 लोकसभा चुनाव के पहले मोदी ने हिंदुत्व को इस्लाम से खतरा, देश को पाकिस्तान से खतरा, पूर्वोत्तर के राज्यों को चीन से खतरा, व्यापारियों को एफडीआई से खतरा और नागरिकों को आधार कार्ड से खतरा बताकर लोगों के सामने पेश किया।

मोदी सत्ता में आये तो खतरा कम होने को कौन कहे, खतरा और अधिक बढ़ गया। ईमानदारी में देश की रेटिंग खराब हुई। ग्लोबल हंगर इंडेक्स में देश और नीचे गिरा, वैश्विक रेटिंग में देश की मीडिया की विश्वसनीयता और खराब हुई, देश में कारोबार करने की रेटिंग खराब हुई। देश में भुखमरी बढ़ी है, भ्रष्टाचार बढ़ा है, निजी कंपनियों द्वारा देश के खनिजों की लूट बढ़ी है।

पीएम मोदी को अब अपने मंत्रियों—अधिकारियों से जान को खतरा

मोदी सत्ता में सत्ता में आए तो अपने साथ लव-जेहाद का फर्जी डर ले आए। मॉब लिचिंग लाए, तालिबान की तरह सच लिखने वाले पत्रकारों की हत्याओं का सिलसिला ले आए। फर्जी एनकाउंटर लाए जिसमें सबसे ज्यादा दलित व आदिवासी व मुस्लिम समुदाय के लोगो को निशाना बनाया गया। कॉरपोरेट मीडिया के समानांतर जनपत्रकारिता और भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने वाले टुटपुँजिए मीडिया संस्थानों के खिलाफ भारी भरकम राशि की मानहानि का आतंक ले आए।

सीबीआई जज लोया के बहाने लोगों ने देखा न्याय और न्यायतंत्र मोदी के आगे बौनी चीज है। मौत का भय यूँ कि पिता की हत्या पर खामोशी ओढ़े परिवार ने कैरवन पत्रिका द्वार हत्या का मुद्दा उठाये जाने पर जज लोया का बेटा अनुज लोया प्रेस कान्फेंस करके कहा कि नहीं साहेब मेरे पिता की मौत स्वाभाविक ही हुई है, हमें कोई जाँच—वाँच नहीं चाहिए।

इतिहास में पहली बार न्यायपालिका के चार वरिष्ठतम जज प्रेस कान्फ्रेंस करके कहते हैं जनता से कि बचा लीजिए लोकतंत्र को। देश और न्यायपालिका में सबकुछ ठीक नहीं चला रहा। मोदीराज में स्वायत्त संस्थाओं की औकात ये कि है कि चुनाव आयोग से पहले भाजपा आईटी सेल चुनावी तारीख की घोषणा कर देती है!

आरबीआई के गवर्नर और देश के वित्तमंत्री को नोटबंदी की सूचना टीवी पर मोदी के भाषण से मिलती है! सरकार खरीददारी पर इस कदर आमादा है कि गुजरात राज्यसभा सीट के चुनाव और कर्नाटक विधानसभा में सरकार गठन से पहले विपक्षी विधायकों को रिसार्ट में ताला बंद करके रख जाता है।

मोदी ने काल्पनिक खतरे पैदा किए, काल्पनिक घोटाले पैदा किए, कैराना को नया कश्मीर बताकर फर्जी पलायन काभय बाँटा, अब मोदी लोगों को अपनी हत्या का भय बाँट रहे हैं। 2G को देश का सबसे बड़ा घोटाला बताकर बहुप्रचारित किया गया। कैग के अध्यक्ष ने अपनी भूमिका निभाई और बिना किसी आधार के 1.76 लाख करोड़ का घोटाला बता दिया। किस आधार पर कैग ने इतना बड़ा आँकड़ा निकाला पता नहीं। जबकि सुप्रीम कोर्ट ने इस पूरे घोटाले को ही आधारहीन और हवा हवाई बताकर खारिज कर दिया।

नोटबंदी को फेल मत कहिए, यह मोदी शासन का सबसे बड़ा घोटाला है साहब

गाँव में एक कहावत है कि काठ की हांड़ी दोबारा नहीं चढ़ती। अतः अपनी हत्या का भय बाँटकर मोदी लोगों के सामने खुद को पीड़ित की तरह पेश कर रहे हैं। याद कीजिए कैसे मणि शंकर अय्यर द्वार नीच कहे जाने को मोदी ने तमाम चुनावी मंचों से कैश करता हुए खुद को पीड़ित की तरह पेश किया और सरकार के प्रति वोटरों के गुस्से को सहानुभूतिक वोट में तब्दील करने में कामयाबी पाई थी।

तो तय रहा 2019 के चुनाव में अब मोदी की मैस्कुलिनिटी (मजबूत नेता और 56 इंच का सीना) वाली इमेज से नहीं, बल्कि उनकी पीड़ित की इमेज से जनता के मन में सहानुभूति की भावना व विश्वास उपजाया जाएगा और एक बार फिर से इसे वोट में तब्दील किया जाएगा। यही रणनीति है।

2002 से लेकर अब तक हत्या और हत्या की साजिशें ही मोदी की राजनीति’ की धुरी रही है। कल तक सांप्रदायिक हत्याएं उनकी सांप्रदायिक राजनीति को खाद—पानी दे रही थीं, अब अपनी हत्या का भय उनकी राजनीति को खाद पानी देगी। सांप्रदायिक दंगे, सांप्रदायिक धुवीकरण, काल्पनिक खतरों का भय, और राष्ट्रवाद के प्रतीकों का फर्जी प्रयोग ही मोदी की पहचान रही हैं।

पिछले चार साल में मोदी ने देश को दिया क्या है? मोदी ने देश को मॉब लिचिंग दी है, सहारनपुर, कासगंज और भीमा कोरेगाँव, ऊना दिए हैं, नोटबंदी दी है जिसने देश की अर्थव्यवस्था को चौपट करके बेरोजगारी पैदा की। मोदी ने देश को फर्जी एनकाउंटर दिए जिसमें आदिवासियों, दलितों गरीबों पिछड़ों को विशेष रूप से निशाना बनाकर उनकी प्रशासनिक हत्याएं की गई। कितने कारोबारी देश छोड़कर भागने पर मजबूर हुए।

अब माओवादी खतरे से राजनीतिक संजीवनी की आस में मोदी जी

पूँजीपतियों के कर्जमाफी से सरकारी बैंकों पर एनपीए का दबाव बढ़ा। मोदी ने सरकारी संस्थाओं को औने-पौने दामों में अपने कार्पोरेट यारों को बेंच दिया। लालकिला जैसे ऐतिहासिक धरोहरों को चंद रुपयों में लीज पर देकर डालमिया के होटल बना दिया।

फर्जी राष्ट्रवाद की आँड़ में मोदी सरकार द्वारा JNU,AMU,BHU, जाधवपुर यूनिवर्सिटी जैसे तमाम विश्वविद्यालयों के वैज्ञानिक ढाँचे को तहस नहस कर दिया गया। इन्हें स्वायत्त बनाकर न सिर्फ इनके वैचारिक पर कतरे बल्कि निजी हाथों में जाने और फीस बढ़वाकर दलित,वंचित, गरीब तबके को उच्च शिक्षा से महरूम रखने की पूरी साजिश भी रची।

स्वास्थ्य सेवाओं के बजट में साल दर साल कटौती कर करके सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं को बद से बदतर बना दिया। चुनाव आयोग, रिजर्व बैंक, न्यायपालिका, जैसी स्वायत्त संस्थाओं को गरिमा का हनन देश के संविधान और कानून पर से लोगों के भरोसे को खत्म कर दिया।

मोदी का 4 साल का सबसे चर्चित काम, पेट्रोल हुआ 80 के दाम

जाँच एजेंसियों के बल पर असीमानंद, साध्वी प्रज्ञा व कर्नल पुरोहित जैसे भगवा आतंकियों को कानून की चंगुल से निकालकर तमाम आतंकवादी बम विस्फोटों में मारे गए लोगों के परिजनों को न्याय से महरूम कर दिया।

घृणा और नफ़रत का जहर घोलकर दलितों के खिलाफ सवर्णों व अल्पसंख्यकों के खिलाफ बहुसंख्यकों खो खड़ा करके समाज से सहिष्णुता, आपसी सौहाद्र आपसी भरोसा भाईचारा को पूरी तरह से खत्म कर दिया।

कभी हिटलर को भी अपनी मौत का इतना भय रहता था कि उसका खाना चखने के लिए 20 जवान लड़कियों को रखा गया था। विशेष सुरक्षा दस्ता (SPG) अब मोदी की सुरक्षा करेगा। गृह मंत्रालय द्वारा मोदी की सुरक्षा की समीक्षा करने के बाद उनकी जान को खतरा बताया गया है।

खतरा किससे है, ये नहीं बताया गया है माने पूरे देश से ही मोदी की जान को खतरा मान लिया गया है। आम आदमी क्या औकात अब खुद मोदी सरकार के मंत्री भी बिना परमिशन और तलाशी के मोदी से नहीं मिल सकते। मोदी कोई व्यक्ति नहीं बीमारू सोच है, जो अपने झूठ को सच मनवाने की, अपने हिसाब की एकरूप दुनिया बनाने की, और मनचाहे की आंड़ में अमानवता की हद तक गुजर जाने की जिद पाले हुए है। आज देश से मोदी को खतरा नहीं बल्कि मोदी से देश को खतरा है।