Last Update On : 01 07 2017 11:53:00 AM

एक के बाद एक प्रकाश में आ रही अमानवीयता की घटनाओं के बीच एक पिता और चाचा द्वारा किया गया यह अपराध अक्षम्य तो है ही, औरत के प्रति असंवेदनशीलता का चरम भी है…

पंजाब के लुधियाना जिले के जान्डी में 28 जून को तीन महीने की एक गर्भवती महिला का उसके देवर और पति ने जबर्दस्ती पेट दबाकर भ्रूण गिरा दिया, क्योंकि उसके पेट में एक कन्या भ्रूण पल रहा है। महिला के साथ जबरन पेट दबाकर किए गए गर्भपात में महिला की जान चली गई। महिला को पहले से एक बेटी थी।

इंडियन एक्सप्रेस में छपी एक खबर के मुताबिक लुधिायाना के जान्डी में रहने वाले इरविंदर सिंह की पत्नी मनजीत कौर गर्भवती थी। यह बात जानने पर उसने भ्रूण का लिंग जानने के लिए मनजीत के न चाहने के बावजूद टेस्ट करवाया। जब उसे पता चला कि मनजीत के पित इरविंदर को पता चला कि गर्भ में लड़की पल रही है तो वो गुस्से में पागल हो गया।

उसने पहले तो पत्नी को गर्भपात के लिए गोलियां खिलाईं, पर जब गोलियों से भी मनजीत का गर्भपात नहीं हुआ तो इरविंदर ने अपने भाई निर्मल सिंह के साथ मिलकर उसका पेट इतनी तेजी से दबाया कि भ्रूण बाहर आ गया। जोर—जबर्दस्ती से हुई इस घटना में मनजीत की जान चली गई।

एक महिला जो यह जानने के बाद कि वह गर्भ से है, अपनी आने वाली औलाद को लेकर हजारों सपने देखने लगती है। मनजीत की आंखों में भी कुछ ऐसे ही सपने पल रहे थे। इसीलिए वह लिंग परीक्षण टेस्ट भी नहीं करवाना चाहती थी, क्योंकि वह जानती थी कि अगर गर्भ में पल रहा भ्रूण कन्या होगा तो ये लोग उसे इस दुनिया में आने ही नहीं देंगे। और हुआ भी कुछ ऐसा ही।

2011 में इरविंदर सिंह के साथ मनजीत की शादी हुई थी। पोस्ट ग्रेजुएट मनजीत के पिता के मुताबिक उनकी बेटी घरेलू हिंसा की शिकार थी। जब से मनजीत ने एक बेटी को जन्म दिया था इरविंदर उसके साथ खराब व्यवहार करने लगा था। पति—पत्नी के बीच काफी तनाव रहता था। ये जानने के बाद कि कोख में आया दूसरा भ्रूण भी लड़की है, वो पागल हो गया था, इसलिए उसने अपने भाई के साथ मिलकर मनजीत का पेट जबरन दबाया जिसमें गर्भपात के साथ—साथ मनजीत की भी मौत हो गई।

वहीं मनजीत के ससुरालियों ने उसके पिता के आरोपों को खारिज करते हुए पुलिस को बताया कि भ्रूण का टेस्ट हमने नहीं उसके पिता ने करवाया था। अभी यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि भ्रूण परीक्षण किसने करवाया था।

सवाल ये नहीं है कि भ्रूण का टेस्ट किसने करवाया, सवाल यह भी है कि प्रतिबंधित होने के बावजूद यह सब इतने धड़ल्ले से चल रहा है। अगर यह प्रतिबंधित होता, तो एक अजन्मे बच्चे और उसकी मां को इतनी दर्दनाक मौत नहीं मिलती।

पुलिस ने दोनों आरोपियों इरविंदर सिंह और निर्मल सिंह को गिरफ्तार कर लिया है। एसएसपी सुरजीत सिंह ने बताया कि आरोपी इरविंदर सिंह ने यह बात कबूल कर ली है कि उसने गर्भपात के लिए गोलियां खरीदी थीं। पर उनका कहना है कि भ्रूण की जांच तब हुई जब वह अपने मायके गयी थी।