Last Update On : 22 06 2018 08:11:08 AM

मौत की घोषणा करते हुए 8 जून को तमाम मित्रों को धन्यवाद देते हुए कहा था खत्म हो चुकी है अब मेरी लड़ाई

दिल्ली। सुप्रसिद्ध पुलित्जर विजेता लेखक चार्ल्स क्राउथमर की 68 वर्ष की उम्र में कैंसर की बीमारी के बाद निधन हो गया। चार्ल्स की लेखकीय धूम का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उनका साप्ताहिक कॉलम दुनियाभर के तकरीबन 400 पब्लिकेशन में प्रकाशित होता था।

गौरतलब है कि पेट के कैंसर से जूझ रहे चार्ल्स ने 2 सप्ताह पहले 8 जून को ही अपनी मौत की घोषणा करते हुए कहा था कि डॉक्टरों ने उन्हें अब जीने के लिए सिर्फ दो हफ्ते का समय दिया है। यही आखिरी फैसला है, अब मेरी लड़ाई खत्म हो चुकी है।

चार्ल्स ने अपनी मौत की घोषणा करते हुए कहा था कि वह पिछले एक साल से पेट में कैंसर से जूझ रहे हैं। साथ ही उन्होंने जिजीविषा बनाए रखने और कैंसर से लड़ने की कोशिश की, ताकि स्वास्थ्य में सुधार आ सके। मगर डॉक्टरों के मुताबिक कैंसर एक बार फिर वापस आ गया है और बड़ी तेजी से मुझे अपनी गिरफ्त में ले रहा है, इतनी तेजी से कि 2 हफ्ते में यह मुझे लील लेगा।

गौरतलब है कि मशहूर कॉलमनिस्ट चार्ल्स का पिछले वर्ष कैंसर का ऑपरेशन हुआ था। अपनी मौत की घोषणा करते पत्र में उन्होंने लिखा था मेरा इलाज कर रहे अपने डॉक्टर का मैं तहेदिल से शुक्रिया अदा करना चाहता हूं, जिन्होंने मुझे बचाने की हरसंभव कोशिश की। साथ ही उन दोस्तों को भी थैंक्स बोलना चाहता हूं जिन्होंने जिंदगीभर हर हाल में मेरा साथ दिया, खासकर कैंसर की लड़ाई यानी बुरे वक्त में।

चार्ल्स ने वॉशिंगटन पोस्ट, पोस्ट फॉक्स, फॉक्स न्यूजस, क्राउन पब्लिशिग के अपने सहयोगियों का भी अपने पत्र में धन्यवाद दिया है।

13 मार्च 1950 को न्यूयॉर्क शहर में जन्मे चार्ल्स का युवावस्था में भयानक एक्सीडेंट हुआ था। जब वे किशोरावस्था में थे तभी उनका पूरा परिवार मॉटरीयल चला गया था। चार्ल्स ने मैकगिल विश्वविद्यालय से अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से मेडिकल की डिग्री हासिल की।

हार्वर्ड मेडिकल यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के दौरान चार्ल्स का भयानक एक्सीडेंट हुआ था जिसके बाद उनके कमर के नीचे शरीर को लकवे ने अपनी गिरफ्त में ले लिया था। दुनियाभर के ख्यात पॉलिटिकल कॉलमनिस्ट में शुमार चार्ल्स ने 1980 से बतौर राजनीतिक कॉलमनिस्ट अपना कैरियर शुरू किया।

जल्द ही वे इतने पढ़े जाने लगे कि कई बड़े पब्लिशिंग हाउस उनसे लेख मंगवाने लगे। कैंसर से जूझने के दौरान तकरीबन 1 साल से उन्होंने लिखना बंद कर दिया था। फिलहाल वे फॉक्स न्यूज में बतौर कॉट्रिब्यूटर वह अपनी सेवाएं दे रहे थे।