Last Update On : 03 06 2018 08:56:00 PM

रेलवे मंत्री की धमकी से क्या टाइम पर चलने लगेंगी ट्रेनें या यह भी एक शिगूफा ही साबित होगा…

जनज्वार, दिल्ली। ट्रेनों की लेटलतीफी को हम—आप सभी झेल रहे हैं, और कई बार तो यह इतना बोझिल हो जाता है कि लगता है इससे बेहतर तो बस ही है। यात्रियों को तमाम दुश्वारियों के साथ ट्रेन यात्रा करनी पड़ी है, मगर शासन—प्रशासन इस दिशा में कदम उठाने के सिर्फ मुंह ताकता रहता है। ट्रेनों की लेट—लतीफी के साथ—साथ दुर्घटनाएं भी भारी तादाद में हो रही हैं।

इन सभी बातों को मद्देनजर रखते हुए केंद्रीय रेल मंत्री पीयूष गोयल ने रेलवे के जोनल प्रमुखों की क्लास ली है। जोनल प्रमुख को आगाह करते हुए रेलवे मिनिस्टर ने कहा कि ट्रेनों की देरी का असर उनके प्रमोशन पर पड़ेगा। कहा कि जिस स्पीड से ट्रेनें लेट होती हैं, उसी स्पीड से उनका प्रमोशन भी आंशिक देरी से हो सकता है।

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रेलमंत्री पीयूष गोयल ने रेलवे के जोनल प्रमुखों को ट्रेनों की लेटलतीफी में सुधार के लिए एक महीने का वक्त दिया है। मीडिया में आ रही खबरों के मुताबिक उन्होंने पिछले सप्ताह हुई एक विभागीय बैठक में इस मुद्दे को लेकर जोनल महाप्रबंधकों की जमकर क्लास ली थी।

गौरतलब है कि ट्रेनों की लेटलतीफी का मुद्दा मीडिया भी उठाता रहता है, जिस कारण मंत्री महोदय पर कुछ दबाव बना है और इसी दबाव में उन्होंने जोनल प्रमुखों को ताकीद किया है।

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मीडिया में आई खबरों के मुताबिक रेल मंत्री ने जोनल प्रमुखों से कहा कि रेल सेवाओं में देरी के लिए अधिकारी रखरखाव और काम का बहाना नहीं बना सकते। रेल मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक पीयूष गोयल ने स्पष्ट निर्देश दिया कि, 30 जून तक अगर रेलवे सेवाओं में उन्हें कोई सुधार नजर नहीं आया तो सम्बद्ध महाप्रबंधक को पदोन्नति के लिए विचार नहीं किया जाएगा। साथ ही यह भी कहा कि अधिकारियों के कार्य निष्पादन देरी सूची में उनके स्थान पर निर्भर करेगा।

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गौरतलब है कि वित्त वर्ष 2017-18 में भारतीय रेलवे नेटवर्क की 30 प्रतिशत गाड़ियां लेटलतीफ चल रही हैं। इस संख्या में इन गर्मियों के छुट्टियों में भी कोई सुधार नहीं हुआ है।

रेलवे सूत्रों की मानें तो मंत्री महोदय के गुस्से का सबसे ज्यादा शिकार उत्तरी रेलवे के महाप्रबंधक को होना पड़ा, क्योंकि एक रिपोर्ट के मुताबिक इस जोन में गाड़ियों के समय पर चलने यानी सेवा अनुशासन का आंकड़ा 29 मई तक बहुत ही खराब 49.59 प्रतिशत है, जो पिछले साल की तुलना में 32.74 प्रतिशत से भी ज्यादा बुरा है।