Last Update On : 16 05 2018 02:34:00 PM

पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बदले रिम्स कर्मचारी ने की पैसे की मांग, कहा बिना पैसे के नहीं होता है काम….

रांची। सरकारी अस्पतालों वो भी नामी अस्पतालों में स्वास्थ्य सुविधाओं का कितना बुरा हाल है इसे मरीजों के परिजनों से बेहतर कोई नहीं बता सकता, क्योंकि वही असल भुक्तभोगी होते हैं। एक तो इलाज ठीक नहीं मिलता, उस पर भी हर काम के लिए घूस लेना यहां आम हो गया है। सरकारें अपनी उपलब्धियों में यह गिनाते फूले नहीं समाती कि हमने रिम्स जैसे अस्पताल इसलिए खोले हैं कि आम लोगों को स्वास्थ्य सुविधाएं बेहतर और आसानी से उपलब्ध होंगी, मगर असलियत कुछ और ही होती है।

ताजा मामला है रिम्स रांची का, जहां एक मृतक की पोस्टमार्टम रिपोर्ट के लिए उसके परिजनों को कई दिन से क्लर्कियल विभाग ने लटका कर रखा हुआ था।

प्रभात खबर में छपी एक खबर के मुताबिक रिम्स रांची के फॉरेंसिक विभाग के कर्मचारी ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट के लिए मृतक के परिजनों से घूस मांगी। मंगलवार 15 मई को कर्मचारी वीरेंद्र कुमार ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट देने के एवज में एक मृतक के परिजन से एक हजार रुपये घूस के रूप में मांगी। हालांकि, मामला 200 रुपये में ही रफा—दफा हो गया। जब इस संबंध में आरोपी क्लर्क से बात की गई तो उन्होंने आरोप को सिरे से खारिज कर दिया, मगर पूरे घटनाक्रम का वीडियो फुटेज सच्चाई को खुद—ब—खुद बयां कर देता है।

रिम्स में पहले भी गरीब मरीजों और उनके परिजन को यहां के स्टाफ द्वारा कदम-कदम पर प्रताड़ित करने की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं। कभी खून दिलाने के नाम पर, जांच कराने के नाम पर, महंगी दवाएं खपाने के एवज में, सरकारी एंबुलेंस दिलाने के नाम पर गरीब मरीजों के शोषण की खबरें अखबारों की सुर्खियां बनी रहती हैं। बाहरी दलाल तो इन सब कामों में संलिप्त रहते ही हैं, रिम्स के कर्मचारी भी इन दलालों का पूरा—पूरा साथ देते हैं। ऐसा ही एक्सीडेंट में जान गंवा चुके छोटन राम के परिवार के साथ हुआ, जिसमें पोस्टमार्टम रिपोर्ट की एवज में उनसे घूस की मांग की गई।

घटनाक्रम के मुताबिक तकरीबन एक महीने पहले कांके ग्राम निवासी छोटन राम की एक सड़क हादसे में मौत हो गयी थी। उनके शव का पोस्टमार्टम रिम्स में हुआ था। पोस्टमार्टम की रिपोर्ट लेने के लिए मृतक छोटन राम का बेटा अजय उरांव तीन दिनों से रिम्स के फॉरेंसिक विभाग के चक्कर लगा रहा था, लेकिन रिपोर्ट नहीं मिल रही थी। आखिरकार 15 मई को फॉरेंसिक विभाग के क्लर्क वीरेंद्र कुमार ने दया दिखाने का ढोंग किया और 200 रुपये लेकर पोस्टमार्टम रिपोर्ट मृतक के परिजन को सौंप दी।

जिस क्लर्क वीरेंद्र कुमार घूस लेकर पोस्टमार्टम रिपोर्ट देने के मामले में संलिप्त पाया गया है, उस पर पहले भी इस तरह के कई आरोप लगते रहे हैं। बावजूद इसके रिम्स प्रबंधन वीरेंद्र कुमार पर काफी मेहरबान रहता आया है। पोस्टमार्टम, किचेन, टेंडर सहित रिम्स के कई महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी वीरेंद्र कुमार को सौंपी जा चुकी है, जो कि भ्रष्टाचार में लिप्त है। ऐसे में पूरे रिम्स प्रबंधन पर ही सवाल उठते हैं कि कैसे भ्रष्टाचार में संलिप्त कर्मचारी को बड़ी—बड़ी जिम्मेदारियां सौंप दी जाती हैं। हो न हो घूस का हिस्सा उपर तक जाता होगा।

वीरेंद्र कुमार का नाम लगभग तीन महीने पहले भी सामने आया था जब स्वास्थ्य मंत्री के क्षेत्र के एक मृतक को वाहन दिलाने में देरी हुई थी। वाहन के संचालन के लिए ईंधन का लेखाजोखा रखने का जिम्मा भी वीरेंद्र कुमार के पास था, काफी कोशिशों के बाद स्वास्थ्य मंत्री के क्षेत्र के मृतक को शव वाहन उपलब्ध हो पाया था।

मगर यहां भी वाहन के चालक ने मृतक के परिजन से पैसे ले लिए थे, जबकि यह वाहन मंत्री की सिफारिश पर परिजन को नि:शुल्क उपलब्ध कराया गया था। मामला सामने आने के बाद मंत्री ने वीरेंद्र कुमार के खिलाफ जांच के आदेश दिये थे, जिसके बाद वीरेंद्र कुमार को ई-टेंडर से जुड़े कार्य से हटाया गया था।

छोटन राम का बेटा अजय उरांव 15 मई को अपने पिता की पोस्टमार्टम रिपोर्ट लेने के लिए रिम्स के फॉरेंसिक विभाग में पहुंचा। यहां क्लर्क वीरेंद्र कुमार था। अजय ने अपने पिता की पोस्टमार्टम रिपोर्ट मांगी, तो वीरेंद्र कुमार ने उससे 1000 रुपये की मांग की। इस पर मृतक के बेटे ने कहा, सर! मेरे पास इतने पैसे नहीं हैं।

इस पर क्लर्क ने कहा, अच्छा 500 रुपये ही दे दो। मृतक के बेटे ने 100 रुपये की पेशकश की, तो क्लर्क ने कहा, 100 रुपये में कुछ भी नहीं मिलता है और तुम 100-200 की बात कर रहे हो। इसके बाद क्लर्क उठकर बॉडी डिसेक्शन रूम की ओर चल दिया अौर मृतक के बेटे को अपने पीछे आने को कहा। बॉडी डिसेक्शन रूम में मृतक के बेटे ने क्लर्क को 200 रुपये का नोट दिया। इसके बाद क्लर्क अपने कार्यालय पहुंचा, यहां रिपोर्ट जारी करने से पहले की प्रक्रिया पूरी की और पोस्टमार्टम रिपोर्ट निकाल कर मृतक के बेटे को सौंप दी।

हालांकि यह वाकया वीडियो फुटेज में कैद हो चुका है मगर आरोपी फॉरेंसिक विभाग, रिम्स के क्लर्क अपनी सफाई में कहता है, मैंने किसी व्यक्ति से घूस नहीं लिया है। जो वीडियाे अपको मिला है, वह पूरी तरह से झूठा है। (फोटो प्रभात खबर से)