Last Update On : 10 07 2018 01:38:53 PM

अंबानी की न यूनिवर्सिटी का पता न कैंपस का, मगर मोदी सरकार ने दे दिया जियो यूनिवर्सिटी को उत्कृष्ट संस्थान का तमगा…

जनज्वार। मोदी सरकार ने देश की 6 यूनिवर्सिटी को उत्कृष्ट संस्थानों का दर्जा दिया है। अच्छी बात है कि सरकार ने अच्छे संस्थानों को टॉप लिस्ट में शामिल किया है, मगर इस पर सवाल तब उठने शुरू हुए जबकि इनमें से एक ऐसा नाम भी शामिल है जो सिर्फ कागजों में बनी है। जी हां, यह कागजी यूनिवर्सिटी है मोदी सरकार के खासमखास अंबानी की जियो यूनिवर्सिटी।

जियो यूनिवर्सिटी जो कि अभी तक सिर्फ कागजों में बनी है उसको देश के टॉप 6 संस्थानों में शामिल करने से मोदी सरकार एक बार फिर सवालों के घेरे में है।

गौरतलब है कि मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने देश के 6 शिक्षण संस्थानों को उत्कृष्ट संस्थानों का दर्जा दिया है। इनमें 3 सरकारी और 3 निजी संस्थान शामिल किए गए हैं। प्राइवेट इंस्टीट्यूट में एक नाम से सभी को चौंकाकर रख दिया है, क्योंकि जियो इंस्टीट्यूट का टॉप लेवल में शामिल होना तो दूर किसी ने इसका नाम तक नहीं सुना था।

और तो और टॉप इंस्टीट्यूट की बात साझा करते हुए मोदी के मंत्री महोदय प्रकाश जावड़ेकर को इस टॉप लिस्ट में शामिल जियो इंस्टीट्यूट का ट्वीटर हैंडल तक नहीं दिखा। और तो और इंटरनेट पर सर्च करने पर भी इसका अस्तित्व नजर नहीं आया।

मीडिया में आई खबरों के मुताबिक जियो इंस्टीट्यूट रिलायंस का एक संस्थान है, लेकिन अभी तक इस संस्थान ने काम करना शुरू नहीं किया है, ट्विटर पर भी इस संस्थान का कोई उल्लेख नहीं मिलता।

जिन संस्थानों को मोदी सरकार ने टॉप 6 में शामिल किया है उनमें IIT दिल्ली, IIT बाम्बे, IISC बंगलोर, मनिपाल एकेडमी ऑफ हायर एजुकेशन ओर बिट्स पिलानी शामिल हैं। इन पांचों को उत्कृष्ट मानने में किसी का ऐतराज नहीं हो सकता, मगर छठा नाम जियो इंस्टीट्यूट सुनकर सभी जरूर चौंके। क्योंकि जियो इंस्टीट्यूट का नाम भी सबके लिए नया है।

राजनीतिक विश्लेषक गिरीश मालवीय लिखते हैं, वैसे पिछले साल ऐसी खबर आई थी कि रिलायंस फाउंडेशन कोई इंस्टीट्यूट बनाने जा रहा है, लेकिन इस बारे में इंटरनेट पर भी किसी भी तरह की कोई जानकारी नहीं है। बिल्डिंग की फ़ोटो तो छोड़िए प्रस्तावित प्लान तक की कोई फ़ोटो नही है, वास्तविकता की तो बात ही क्या की जाए? कमाल की बात तो यह है कि मानव संसाधन विकास मंत्रालय देशभर के इंस्टीट्यूट की रैंकिंग भी कराता है।

गिरीश मालवीय आगे कहते हैं, सार्वजनिक क्षेत्र के जिन संस्थानों को उत्कृष्ट संस्थान का दर्जा दिया गया है, उन्हें अगले 5 साल के दौरान 1000 करोड़ रुपये का सरकारी अनुदान देने की बात की जा रही है, हो सकता है निजी क्षेत्र के संस्थानों को भी प्रत्यक्ष या परोक्ष से किसी न किसी तरह से फायदा पहुंचाने की बात हो और वह बाद में सामने आए।

जियो को टॉप संस्थानों में शामिल करने पर यूजीसी का कहना है कि जब कुछ साल बाद जियो यूनिवर्सिटी अस्तित्व में आएगी तो इसके पास अधिक एटोनॉमी होगी। जियो यूनिवर्सिटी को टॉप लेबल पर ग्रीन फील्ड कैटेगरी के अंतर्गत चुना गया है।

सरकार या यूजीसी की तरफ से कागजी जियो यूनिवर्सिटी को टॉप लिस्ट में शामिल करने के चाहे जो बहाने दिए जाएं मगर राजनीतिक विश्लेषकों और विपक्ष ने भी आरोप लगाना शुरू कर दिया है कि मोदी प्रेम के पुरस्कारस्वरूप जियो को टॉप लिस्ट में शामिल किया गया है।