Last Update On : 27 08 2018 08:11:03 AM
प्रतीकात्मक फोटो

अक्सर आप सुनते होंगे कि गुरुकुल के जमाने में छात्र बड़े संस्कारवान होते थे, उसमें शिक्षकों और छात्रों का रिश्ता बड़ा ही पवित्र होता था और छात्र राम-लक्ष्मण की तरह रहते थे, यह उसी गुरुकुल का मामला है…

जनज्वार। सुनने में गुरुकुल की पढ़ाई भले ही परंपरागत हिंदू भारतीयों को अपनी ओर आकर्षित करती हो और गुरुकुल नाम सुनकर महाभारत—रामायण के किस्से याद आते हों, पर सचाई सभी स्कूलों की एक सी हो गयी है और बच्चों पर अपराध में कहीं कोई कोताही देखने को नहीं मिल रही।

दैनिक भास्कर में छपी खबर के मुताबिक हरियाणा के रोहतक जिले के गुरुकुल में पिछले 10 दिनों से 5 छात्रों का यौन शोषण हो रहा था, लेकिन जब छात्रों ने इसकी शिकायत गुरुकुल के प्राचार्य और डाइरेक्टर से की तो उल्टा यौन शोषण के शिकार छात्रों को ही सजा दी गयी।

पीड़ित छात्रों की शिकायत के आधार पर पाक्सो एक्ट के तहत सदर रोहतक थाने में मुकदमा दर्ज हुआ है। यौन शोषण के शिकार छात्रों में शामिल छठी में पढ़ने वाले एक छात्र द्वारा दी गयी शिकायत में बताया गया है कि छात्रावास में सोते वक्त 7 सिनियर छात्रों द्वारा उन 5 छात्रों के साथ रात में यौन दुराचार किया जाता था। यह सिलसिला पिछले 10 दिनों से चल रहा था। यौन दुराचार करने वाले भी सभी छात्र नाबालिग हैं।

इस जघन्य वारदात का कल परिजनों को पता तब चला जब वे रक्षाबंधन के त्योहार पर अपने बच्चों के साथ गुरुकुल में मिलने गए थे। पीड़ित छात्रों ने रोते हुए अपने परिजनों को यह पूरा मामला बताया, जिसके बाद रोहतक सदर थाने में मुकदमा दर्ज हुआ है।

गुरुकुल द्वारा एक सप्ताह से यह मामला दबाए जाने के अपराध में गुरुकुल पर धारा 202 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। घटना से साफ है कि संस्कारवानों की शिक्षा के नाम पर खुले गुरुकुल प्रबंधन ने अपराध को एक सप्ताह तक छुपाकर अपराध को बढ़ावा दिया है, बच्चों के बचपन को नष्ट करने में प्राचार्य और डाइरेक्टर ने अपराधी की भूमिका निभाई है।