Last Update On : 03 07 2018 09:55:41 AM

आंगनबाड़ी में व्याप्त अनियमतितता और घोटाले को कर रहे थे उजागर, कई अन्य बड़े घोटालों में भी की थी आरटीआई दाखिल इसलिए बने हुए थे कई लोगों के आंखों की किरकिरी…

पटना, जनज्वार। आरटीआई कार्यकर्ताओं पर हमेशा मौत का संकट मंडराता रहता है, क्योंकि इनके माध्यम से शासन—प्रशासन में हो रही तमाम अनियमितताओं का खुलासा और कई चेहरों से नकाब हट जाते हैं, मगर इसकी कीमत उन्हें कई बार अपनी जान देकर भी चुकानी पड़ती है। इनके जीवन पर हर समय खतरा मंडराता रहता है, मगर सरकार इनके मामले में उदासीन बनी रहती है जैसे सच को उजागर करने वाले ये लोग उसके लिए कोई मायने ही नहीं रखते।

1 महीने के दौरान 2 आरटीआई कार्यकर्ताओं की हत्या से पता चलता है कि सुशासन बाबू नीतीश कुमार के राज में ये हमले बिहार में और ज्यादा बढ़े हैं।

आरटीआई कार्यकर्ताओं की हत्याओं का हमारे देश में एक लंबा सिलसिला रहा है। हाल में सच उजागर करने की कीमत चुकानी पड़ी है बिहार के वाल्मिकी यादव को। बिहार में एक महीने के दौरान यह दूसरे आरटीआई कार्यकर्ता की हत्या है, जिससे लोगों में भारी रोष व्याप्त है।

हालिया घटना बिहार के जमुई जिले स्थित थाना क्षेत्र की है, जहां रविवार 1 जुलाई की देर रात आरटीआई कार्यकर्ता वाल्मिकी यादव और उनके साथी की उस समय हत्या कर दी गई, जब वे बाइक से अपने गांव बिछवे लौट रहे थे।

शुरुआती जांच के बाद सामने आया है कि वाल्मिकी यादव आंगनबाड़ी में बड़े स्तर पर हो रही गड़बड़ियों, अनियमितताओं और घोटालों को उजागर करने के लिए जी जान से जुटे हुए थे इसीलिए उन्हें घोटालेबाजों के इशारे पर गोलियों से छलनी कर दिया गया। शक के आधार पर पुलिस ने इस दोहरे हत्याकांड के मामले में सिकंदरा प्रखंड के जदयू प्रखंड अध्यक्ष सुरेश महतो को हिरासत में लिया है।

पुलिस ने शुरुआती जांच के बाद बताया कि जमुई के बिछवे गांव के रहने वाले 35 वर्षीय आरटीआई कार्यकर्ता वाल्मीकी यादव और उनके एक साथी 30 साल के धर्मेद्र यादव की 1 जुलाई की रात उस समय हत्या कर दी गई जब वे दोनों बाइक से सिकंदरा से गांव लौट रहे थे। गांव के पास ही कुछ अज्ञात हमलावरों ने दोनों को गोलियों से छलनी कर दिया। मामले की जांच कर रहे पुलिस अधिकारियों के मुताबिक गोली लगने से वाल्मीकी यादव की घटनास्थल पर ही मौत हो गई, जबकि धर्मेद्र ने इलाज के दौरान दम तोड़ा।

पुलिसिया जांच में वाल्मिकी यादव के परिजनों ने बताया कि वाल्मिकी इन दिनों आंगनबाड़ी में व्याप्त अनिय​मितताओं और घोटालों को उजागर कर रहे थे, इसलिए उनकी हत्या कर दी गई। परिजनों के शक के आधार पर ही पुलिस ने बिछवे ग्राम पंचायत मुखिया कृष्णदेव रविदास और जदयू नेता सुरेश महतो को गिरफ्तार किया है और उनसे पूछताछ की जा रही है।

पुलिस ने भी मीडिया के सामने स्वीकारा है कि वाल्मिकी की हत्या पूर्व सुनियोजित लगती है। जमुई पुलिस उपाधीक्षक रामपुकार सिंह कहते हैं, “मृतक के परिजनों के बयान पर हत्या की प्राथमिकी सिकंदरा थाने में दर्ज की गई है। वाल्मिकी के परिजनों ने उनकी हत्या के मामले में नौ लोगों को नामजद आारोपी बनाया है। इसी आधार पर हमने नामजद आरोपी बिछवे ग्राम पंचायत के मुखिया कृष्णदेव रविदास तथा सुरेश महतो को गिरफ्तार कर पूछताछ शुरू कर दी है, ताकि अपराधी जल्द से जल्द पुलिस की पकड़ में आ सकें।

आंगनबाड़ी में व्याप्त अनिय​मितताओं के अलावा वाल्मिकी यादव कुछ अन्य बड़े घोटालों की भी जड़ तक पहुंच चुके थे, इसलिए उन्हें दबंगों ने अपने रास्ते से हटा दिया। गौरतलब है कि अभी थोड़े दिन पहले ही पूर्वी चंपारण जिले के पिपराकोठी थाना क्षेत्र में कुछ अज्ञात हमलावरों ने इसी तरह आरटीआई कार्यकर्ता राजेंद्र सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी थी।