Last Update On : 12 04 2018 10:23:00 AM

यह वही निजी स्कूल है, जिसकी गुरुग्राम शाखा में 7 साल के बच्चे की हुई थी सनसनीखेज हत्या और स्कूल के खिलाफ अब तक नहीं उठाया गया है कोई सख्त कदम

मोदी जी के गृहराज्य गुजरात के सूरत में है रेयान इंटरनेशनल स्कूल

सूरत। दिन—ब—दिन प्राइवेट स्कूलों की मनमानी किसी न किसी रूप में सामने आ रही है। कभी फीस वृद्धि के रूप में तो कभी कोर्स की किताबों को लेकेर। यहां होने वाली हिंसक वारदातों में भी बढ़ोत्तरी हो रही है। ऐसे में अगर आपने अपने बच्चे के स्कूल के खिलाफ कोई बात मीडिया को बताई तो खैर नहीं। स्कूल प्रबंधन बच्चे को बिना कारण बताओ नोटिस दिए स्कूल से चलता कर देगा।

ऐसी ही एक सर्कुलर जारी हुआ है मोदी के गृहराज्य गुजरात के सूरत स्थित अडाजन तारवाड़ी में। वहां के रेयान इंटरनेशल स्कूल ने बच्चों की डायरी में एक प्रिंटेड शपथ पत्र का फॉर्मेट दिया है, जिसे पैरेंट्स को भरकर जमा कराना है। उसमें आदेश है कि अभिभावक इस बात की शपथ लें कि वह स्कूल के खिलाफ कोई भी बात मीडिया में नहीं बताएंगे। अगर किसी अभिभावक ने ये गलती की तो उसके बच्चे को बिना कारण बताओ नोटिस स्कूल से निकाल दिया जाएगा, जिसके लिए वह खुद जिम्मेदार होगा।

यह है प्रिंटेड शपथ पत्र का फॉर्मेट जिसे भरना है अभिभावकों को

यह वही रेयान इंटरनेशनल पब्लिक स्कूल है, जिसके गुरुग्राम स्थित शाखा में सात वर्षीय मासूम छात्र की सनसनीखेज तरीके से हत्या कर दी गई थी और स्कूल पर अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो पाई है।

दैनिक भास्कर में प्रकाशित खबर के मुताबिक जब अभिभावकों के लिए जारी किए गए इस आदेश के संबंध में प्रिंसिपल सुनीता से बात की गई तो वह बिल्कुल अंजान बन गईं। उन्होंने कहा कि उन्हें ऐसे किसी आदेश के बारे में जानकारी नहीं है, स्कूल प्रबंधन से इस संबंध में बात कर वह कुछ कह सकती हैं।

यानी स्कूल एक तरह से धमका ही रहे हैं कि अगर अभिभावक स्कूल के खिलाफ किसी भी मामले में कम्प्लेंट मीडिया के पास करेंगे तो हम तुम्हारे बच्चों का कैरियर बर्बाद कर देंगे।

अभिभावकों में स्कूल के इस आदेश के खिलाफ जबर्दस्त रोष है। पैरेंट्स का कहना है मीडिया ही एक ऐसा माध्यम है जिससे इन स्कूलों की मनमानी पर नकेल कसी जा सकती है और उसी का हस्तक्षेप नहीं होगा तो इनका मनमानीपूर्ण रवैया दिन—ब—दिन और बढ़ता जाएगा। आज ये डायरी में शपथ पत्र पब्लिश करवा रहे हैं, कल को कुछ और करवाएंगे।

पैरेंट्स रोष व्यक्त करते हुए कह रहे हैं कि हम अपने बच्चों को अपनी औकात से भी ज्यादा पैसे देकर पढ़ने के लिए भेजते हैं, ताकि वह सफल हो सके। स्कूल का गुलाम बनाने के लिए पढ़ाई नहीं करवा रहे। गौरतलब है कि रेयान इंटरनेशनल स्कूल में पीने का पानी तक बच्चों को शुद्ध नहीं मिलता, अन्य सुविधाएं कैसी होंगी समझा जा सकता है। ऐसे में पैरेंटस मीडिया के पास समस्याएं लेकर नहीं जाएंगे तो कहां जाएंगे।

रेयान इंटरनेशल स्कूल की डायरी में जो फरमान या एक तरह से फतवा जारी किया है उसमें वर्ष 2018 की डायरी में साफ—साफ लिखा गया है कि अगर बच्चे को किसी भी तरह की कोई समस्या स्कूल में हो तो वह इसकी शिकायत मीडिया में न करें, नहीं तो परिणाम भुगतने को तैयार रहें।

इस फतवे के मुताबिक अगर अभिभावक स्कूल के खिलाफ किसी भी तरह की शिकायत लेकर मीडिया में गये तो इसे स्कूल के खिलाफ कार्य अथवा अभिभावक किसी से मिला हुआ है माना जाएगा। अगर कोई अभिभावक इस तरह की किसी भी गतिविधि में संलिप्त पाया गया तो उसके बच्चे को स्कूल से निकाल दिया जाएगा और उसका प्रवेश निरस्त कर दिया जाएगा।

स्कूलों की इस तरह की मनमानियां फीस निर्धारण एक्ट के विरोध के बाद स्कूलों की तमाम तरह की मनमानियां दिखने को मिल रही हैं।

अभिभावक कह रहे हैं कि मोदी के गृह राज्य का यह रेयान इंटरनेशनल स्कूल क्या कश्मीर में आता है? अभिव्यक्ति की आजादी के तहत हर किसी को है अपनी बात कहीं भी कहने का अधिकार। सवाल है कि क्या स्कूल इस नियम से भी उपर हैं। देशभर में सिर्फ कश्मीर ही एकमात्र ऐसा राज्य है जहां 370 एक्ट लागू है और इस नियम को नहीं माना जाता।