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मुख्यमंत्री रहते हुए मायावती ने कई पार्कों और मूर्तियों का निर्माण करवाया था, इसमें उन्होंने लखनऊ और नोएडा में दो बड़े पार्क बनवाए थे, जिनमें मायावती, दलित नेता भीमराव अंबेडकर, कांशीराम और पार्टी के चुनाव चिन्ह हाथी की सैकड़ों मूर्तियां लगी हुई हैं….

वरिष्ठ पत्रकार जेपी सिंह की रिपोर्ट

जनज्वार। वर्ष 2007 से 2011 के बीच मायावती सरकार द्वारा लगाई गयी मूर्तियों के निर्माण में धन के दुरुपयोग के संबंध में लखनऊ में 6 स्थानों पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की छापेमारी की स्याही अभी सूखी भी नहीं थी कि उच्चतम न्यायालय ने मायावती के मुख्यमंत्री रहने के दौरान बनाये गये स्मारकों और मूर्तियों का पैसा लौटाने का आदेश देकर इसमें खर्च सार्वजनिक धन के औचित्य पर गम्भीर सवाल खड़ा कर दिया है।

उच्चतम न्यायालय ने बीएसपी सुप्रीमो मायावती से बड़ा तेज़ झटका दिया है। कोर्ट ने मायावती के मुख्यमंत्री रहने के दौरान बनाई गई स्मारकों और मूर्तियों का पैसा लौटाने को कहा है। 2009 में दायर की गई जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने यह सुझाव दिया है।

मामले की सुनवाई 2 अप्रैल को होगी। मूर्तियों पर जनता के पैसे खर्च होने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में 2009 में जनहित याचिका दी गई थी। लगभग 10 साल बाद इस पर सुनवाई करते हुए उच्चतम न्यायालय ने कहा है कि प्रथमदृष्टया तो बीएसपी प्रमुख को मूर्तियों पर खर्च किया गया जनता का पैसा लौटाना होगा।

गौरतलब है कि मायावती ने बतौर मुख्यमंत्री रहते हुए उत्तर प्रदेश के कई शहरों में हाथी और अपनी कई मूर्तियां लगवाई थीं। बीएसपी प्रमुख ने कई पार्क और स्मारक भी ऐसे बनवाए थे, जिसमें उनकी और हाथी की मूर्तियां थीं। इनके साथ कांशीराम और बाबा साहेब आंबेडकर की भी कई मूर्तियां उनके कार्यकाल में लगाई गईं।

उच्चतम न्यायालय ने 2009 में दायर रविकांत और अन्य लोगों द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि मायावती को मूर्तियों पर खर्च सभी पैसों को सरकारी खजाने में जमा कराना चाहिए। सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने मायावती के वकील को कहा कि अपने क्लाइंट को कह दीजिए कि सबसे वह मूर्तियों पर खर्च हुए पैसों को सरकारी खजाने में जमा कराएं।

उच्चतम न्यायालय ने इससे पहले भी 2015 में उत्तर प्रदेश की सरकार से पार्क और मूर्तियों पर खर्च हुए सरकारी पैसे की जानकारी मांगी थी। उच्चतम न्यायालय ने कहा कि हमारा प्रारंभिक विचार है कि मैडम मायावती को मूर्तियों का सारा पैसा अपनी जेब से सरकारी खजाने को भुगतान करना चाहिए। मायावती की ओर से सतीश मिश्रा ने कहा कि इस केस की सुनवाई मई के बाद हो, लेकिन चीफ जस्टिस ने कहा कि हमें कुछ और कहने के लिए मजबूर न करें। अब इस मामले में 2 अप्रैल को सुनवाई होगी।

खर्च वसूली की याचिका
उच्चतम न्यायालय इस मामले पर सुनवाई कर रहा है कि क्या मायावती और बसपा चुनाव चिन्ह की मूर्तिर्यों के निर्माण पर हुए खर्च को बसपा से वसूला जाए या नहीं। याचिकाकर्ता रविकांत ने मायावती और बसपा चुनाव चिन्ह की मूर्तिर्यों के निर्माण पर सरकारी खजाने खर्च करने को लेकर उच्चतम न्यायालय से मांग की मूर्ति निर्माण पर हुए करोड़ों के खर्च को बसपा से वसूला जाए।

याचिकाकर्ता रविकांत ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि सरकारी धन को इस तरह नहीं खर्च किया जा सकता। सरकार की कार्रवाई अनुचित थी और इस पर सुनवाई होनी चाहिए। रविकांत ने साल 2009 में सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल कर मूर्ति निर्माण पर हुए करोड़ों के खर्च को बसपा से वसूलने की मांग की थी।

ईडी की छापेमारी
इसके पहले 31 जनवरी 19 को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) 2007 से 2011 के बीच बनाए गए मूर्तियों के निर्माण के लिए धन के दुरुपयोग के संबंध में 6 स्थानों पर छापेमारी किया था। यह मामला पूर्व मुख्यमंत्री मायावती से जुड़ा है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 111 करोड़ रुपये के मूर्ति घोटाले में दर्ज किया है। ईडी द्वारा दर्ज मामले में सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया गया है।

यह मूर्ति घोटाला उसी समय हुआ था जब मायावती उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री थीं। इस घोटाले से सरकार को करीब 111 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था,जबकि मूर्ति बनाने की परियोजना की लागत 1,400 करोड़ रुपये से अधिक थी।पहले राज्य सतर्कता विभाग ने इस मामले में केस दर्ज किया था, जिसकी रिपोर्ट को आधार बनाते हुए ईडी ने मुकदमा दर्ज किया था।

उत्तर प्रदेश राज्य सतर्कता विभाग द्वारा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा के तहत दर्ज किए गए मामले को ईडी ने आधार बनाते हुए प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है। यह मामला प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत इसलिए दर्ज किया गया है। यह छापेमारी उन लोगों के ठिकाने पर हुई है, जिनके खाते में स्मारक स्कैम का पैसा गया है। आरोप है कि जगह के विकास के नाम पर पैसा लिया गया और निजी संपत्तियों में उसे निवेश किया गया।

पत्थर की 30 मूर्तियां और कांसे की 22 प्रतिमाएं
मुख्यमंत्री रहते हुए मायावती ने अपने कार्यकाल में कई पार्कों और मूर्तियों का निर्माण करवाया था, इसमें उन्होंने लखनऊ और नोएडा में दो बड़े पार्क बनवाए थे। इन पार्कों में अपनी, दलित नेता भीमराव अंबेडकर, कांशीराम और पार्टी के चुनाव चिन्ह हाथी की सैकड़ों मूर्तियां बनवाईं। मायावती ने उस दौरान नोएडा में हाथी की पत्थर की 30 मूर्तियां और कांसे की 22 प्रतिमाएं लगवाई गईं थीं, जिस पर 685 करोड़ रुपये खर्च हुए थे।

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