Last Update On : 13 10 2018 07:08:13 PM

किसी भी तरह के लैंगिक भेदभाव या यौन उत्पीड़न का सामना कर रहे लोगों को है एसोसिएशन का पूर्ण सहयोग, गठित की एक शिकायतें सुनने के लिए एक कमिटी….

जनज्वार। #MeToo अभियान के तहत हो रहे खुलासों को लेकर स्क्रीनराइटर्स एसोसिएशन ने भी पीड़ितों के प्रति अपना समर्थन जताया है और ऐसी स्थिति से अपने सदस्यों को बचाने, उनकी शिकायतों को सुनने के लिए राइटर्स एसोसिएशन ने एक कमिटी का भी गठन किया है।

राइटर्स एसोसिएशन का कहना है कि हमें हमारी सदस्य विन्ता नंदा से एक औपचारिक शिकायत प्राप्त हुई है, और हम न्याय सुनिश्चित करने के लिए मामले की निष्पक्ष जांच के लिए कटिबद्ध हैं। हम यौन उत्पीड़न (सेक्सुअल हैरसमेंट) के सभी पीड़ितों के साथ एकजुट हैं और उन्हें अपनी आवाज़ उठाने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।

इक्कीस हज़ार से ज़्यादा सदस्यों वाली एक ट्रेड यूनियन होने के नाते, ये हमारा दृढ़ विश्वास है कि यौन/लैंगिक हिंसा या भेदभाव भारतीय संविधान के आर्टिकल 21 की मूल भावना के विरुद्ध है, जिसमें सभी नागरिकों के लिए समान रूप से जीवन जीने के अधिकार का प्रावधान है।

एसडब्ल्यूए इस तरह के व्यवहार के विरुद्ध ‘शून्य सहनशीलता नीति’ (ज़ीरो टोलरेंस पॉलिसी) अपनाने के लिए प्रतिबद्ध है। ट्रेड यूनियन होने के नाते हम श्रमिक क़ानून और हमारी एसोसिएशन के संविधान के अधीन हैं।

उपरोक्त आधारभूत ढांचे और इसके इतर भी, एसडब्ल्यूए की इंटरनल कमिटी लैंगिक निरपेक्षता के साथ इस तरह के उत्पीड़न/भेदभाव से पीड़ित सभी सदस्यों को पूरा समर्थन देती है।

हमारी इंटरनल कमेटी इस मुद्दे पर एक सार्थक पॉलिसी अजेंडा तैयार करने की दिशा में काम कर रही है। हम फ़िल्म इंडस्ट्री में लैंगिक समानता और लैंगिक संवेदीकरण को बढ़ावा देने के लिए प्रभावी कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार कर रहे हैं।

राइटर्स एसोसिएशन ने अपील की है कि अगर आप एसडबल्यूए सदस्य हैं और अपने कार्यक्षेत्र में लैंगिक भेदभाव या यौन उत्पीड़न का सामना कर रहे हैं तो कृपया, ic@swaindia.org पर ईमेल भेजकर हमसे सम्पर्क करें। हम विश्वास दिलाते हैं कि हम आपकी समस्या को पूरी संवेदना और गोपनीयता से सुनेंगे और तुरंत प्रभाव से ज़रूरी कार्यवाही करेंगे।