Last Update On : 13 12 2017 05:05:00 PM

सरकारी सिस्टम के कारण गांव में ही विकलांग बेटे का नहीं बना आधार कार्ड तो मजबूरन आधार कार्ड बनवाने के लिए आना पड़ा जिला मुख्यालय

रुद्रप्रयाग, जनज्वार। बुढ़ापे में बेटा ही बाप के कंधों का सहारा होता है, मगर एक बाप ऐसा है जो अपने बेटे को कंधे पर ढोने के लिए मजबूर है। सरकारी सिस्टम की लापरवाही के कारण जब उसके पुत्र का आधार कार्ड नहीं बना तो वह अपने पुत्र को कंधे पर ढोकर जिला मुख्यालय पहुंचा और आधार कार्ड बनवाया।

दरअसल, विकासखण्ड जखोली के सुदूरवर्ती गांव घंघासू-बांगर निवासी श्याम सिंह राणा के 35 वर्षीय विकलांग पुत्र लूला सिंह राणा का आधार कार्ड नहीं बना तो वे अपने पुत्र को लेकर मुख्यालय पहुंचे और अपनी आपबीती मीडिया के सामने रखी।

श्याम सिंह राणा कहते हैं, कुछ दिन पहले आधार कार्ड बनाने के लिए गांव में टीम पहुंची थी, लेकिन टीम द्वारा विकलांग लोगों का आधार कार्ड नहीं बनाया गया। पूछे जाने पर बताया गया कि विकलांग लोगों का आधार बनाने के लिए दूसरी टीम गांव में आयेगी, मगर कई दिन बीत जाने के बाद भी गांव में कोई टीम नहीं पहुंची। ऐसे में 70 साल के बुजुर्ग श्याम सिंह 80 किमी की दूरी नापते हुए मुख्यालय पहुंचे।

बुजुर्ग श्याम सिंह कहते हैं, सरकारी सिस्टम की लापरवाही का खामियाजा ग्रामीण जनता को भुगतना पड़ रहा है। आधार कार्ड की टीम के गांव में न पहुंचने के कारण 35 साल के पुत्र लालू सिंह को कंधे में लादकर मुख्यालय लेकर आया हूॅं। समाज कल्याण विभाग से पुत्र को विकलांग पेंशन मिलती है, जो आधार कार्ड के लिंक न होने से बंद हो गई। कुछ दिनों के इंतजार के बाद विकलांग पुत्र को लेकर आधार कार्ड बनवाने पहले मुख्यालय पहुंचा और उसके बाद फिर खाते से आधार नम्बर को लिंक करवाया।

यदि प्रशासन की टीम गांव में पहुंचकर आधार कार्ड बनवा देती तो इतनी फजीयत नहीं उठानी पड़ती। उन्होंने बताया कि क्षेत्र में अन्य कई ऐसे विकलांग हैं, जिनका आधार लिंक नहीं हुआ है और उनके परिजन उन्हें मुख्यालय लाने में असमर्थ है। प्रशासन को क्षेत्र में टीम भेजकर विकलांग लोगों का आधार कार्ड बनाया जाना चाहिए, जिससे उन्हें कोई परेशानी न उठानी पड़े।

वहीं जिलाधिकारी मंगेश घिल्डियाल ने कहा कि मीडिया के माध्यम से मामला उनके संज्ञान में आया है। प्रशासन की ओर से क्षेत्र में टीम भेजी जायेगी और विकलांग लोगों का आधार कार्ड बनवाया जायेगा।