Last Update On : 14 10 2018 11:47:24 AM
सभ्य समाज ने यूं किया इस जोड़े को सरेआम नंगा और रखा इसी हालत में 20 घंटे तक बंधक

यह खबर आपको देश के किसी हिस्से में नहीं दिखेगी, क्योंकि इस खबर को पुलिस, सरकार और मीडिया ने मिलकर दबाया है। पर पढ़िए और देखिए कि हम जिन महान गांवों की गाथा गाते रहते हैं वहां महिलाओं और अल्पसंख्यकों की क्या हालत है, एक स्त्री का जाति के बाहर चयन कितना भारी पड़ सकता है

जनज्वार। देश के बुद्धिजीवी विमर्श करते रह गए कि आदिवासी हिंदू नहीं हैं, संघी उन्हें लग्गी से हिंदू बना रहे हैं लेकिन यह घटना बताती है कि सेक्स को लेकर बहुत स्वाभाविक रहा आदिवासी समाज कैसे मध्यवर्गीय कुंठाओं में डूब चुका है और सांप्रदायिकता भी ठसमठस भर चुकी है।

झारखंड के साहेबगंज जिले के मिर्जा चौकी थाना क्षेत्र के अंतर्गत 20 वर्षीय आदिवासी युवती और 20 वर्ष के रेजाउल अंसारी के साथ यह घटना 2 अक्टूबर को गांधी जयंती के दिन हुई। उस दिन जब प्रधानमंत्री और झारखंड के मुख्यमंत्री देश को सत्य, अहिंसा और शांति का पाठ याद करा रहे थे, तब संघ के सांप्रदायिक जहर से भरे गए आदिवासी अपनी एक बेटी के मुस्लिम युवक के साथ चले जाने पर उसके साथ मानवीयता का गला घोंटने वाली वारदात को बड़े गर्व से अंजाम दे रहे थे।

देखिए समाज के ठेकेदारों का ये हाथ जो सरेआम दबा रहा है रस्सी में बंधी नंगी युवती का स्तन

यह घटना दो अक्टूबर को उस समय हुई जब आदिवासी युवती मिर्जाचौकी इलाके के मंडरो बाजार से अपने गांव बड़ा देवदाड़ के लिए पैदल आ रही थी। पुलिस को दी अपनी शिकायत में लड़की ने बताया है कि जब वह अपने गांव के रास्ते में थी तब उसे बंगलिया गांव का युवक रेजाउल अंसारी मिला, जिसने कहा कि चलो हम तुम्हें तुम्हारे गांव छोड़ देते हैं, लेकिन वह मुझे जबरदस्ती देवदांड गांव के नजदीक के स्वास्थ्य केंद्र में ले गया और मेरे साथ बलात्कार किया।

पर लड़की के इस बयान से पहले ग्रामीणों ने लड़के—लड़की को नंगा कर 20 घंटे तक देवदांड गांव में ही बंधक बनाए रखा। ग्रामीणों में इस घटना को लेकर इतना आक्रोश था कि पुलिस घटना के चंद घंटों में ही पहुंच गयी थी, लेकिन 20 घंटे मूकदर्शक बनी रही। आप तस्वीरों में भी पुलिस ​अधिकारियों को देख सकते हैं जो भीड़ के बाहर एक किनारे खड़े हैं। दूसरी बात अगर रेजाउल ने बलात्कार किया होता तो आदिवासी पीड़ित युवती के साथ आदिवासी ऐसा क्यों करते, जैसी वीभत्सता इन तस्वीरों में दिख रही है।

पीड़ित युवती जहां संथाली समाज से ताल्लुक रखती है, वहीं युवा मुस्लिम समुदाय का है। जातीय और सांप्रदायिक नफरत से भरे हमारे समाज की यह चंद तस्वीरें बताती हैं कि हम बर्बरता के कितने नजदीक और सभ्यता से कितने दूर हैं। सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस के कारण इन तस्वीरों को हम हू—ब—हू नहीं छाप पा रहे, अन्यथा जरूर लगाते, क्योंकि जिनके सामने उस नौजवान स्त्री और पुरुष को छिपना था उन्होंने तो सरेआम उसकी तस्वीरें और वीडियो बनाकर वाट्सअप पर डाले, जिनकी यह बेटी और बहन थी उन्होंने उसे सरेआम नंगा कर दिया।

बताया जाता है कुछ आदिवासी नौजवानों ने लड़की को बलात्कार के लिए खींचा भी, पर बीच में कुछ लोगों के आ जाने की वजह से लड़की बच गयी, पर जो आपको अभी तस्वीरों में दिख रहा है, वह सैकड़ों ग्रामीणों की मौजूदगी और सहमति से हुआ कि हमारे आदिवासी लड़के क्या कम थे जो ये मुसलमान के साथ गयी।

और पुलिस इस तरह बनी रही तमाशबीन

गौरतलब है कि 2 अक्टूबर को वारदात की सूचना मिलते ही स्थानीय मिर्जाचौकी की पुलिस मौके पर पहुंच गयी थी। लेकिन आक्रोशित ग्रामीणों के चंगुल से दोनों युवक—युव​ती को बंधक से मुक्त कराने में पुलिस असफल रही। इसके बाद बोरियो थाना, मुफस्सिल थाना और जिला मुख्यालय साहेबगंज से अतिरिक्त पुलिस बल मंगाया गया, जिसके बाद 2 अक्टूबर की देर शाम काफी मशक्कत से ग्रामीणों के चंगुल से दोनों को मुक्त कराकर अपने कब्जे में ले पाई। इस दौरान मौके पर डीएसपी ललन कुमार पुलिस इंस्पेक्टर तिवारी बोरियो थाना प्रभारी मिर्जाचौकी सहायक अवर निरीक्षक उपेंद्र सिंह,संतोष सिंह, हरे राम कुमार समेत अन्य उपस्थित थे।

वीभत्सता और अमानवीयता की कोई सीमा होती होगी तो वह तस्वीर उसका चरम है

गर वीभत्सता और अमानवीयता की कोई सीमा होती होगी तो वह तस्वीर उसका चरम है जिसमें एक अनजान हाथ रस्सी में बंधी लड़की के स्तन को दबा रहा है। दिमाग को भन्ना देने वाला यह सच देख जी सोचता है कि यह हाथ भी किसी औरत के गर्भ से पैदा हुए बेटे या किसी बहन के भाई का ही होगा।