Last Update On : 15 03 2018 12:07:00 AM

अपनी तरफ से प्रशासन और भाजपा दोनों ने ही खूब की सपा को हराने की कोशिश, दर्जन भर राउंड की काउंटिंग होने के बाद भी नहीं दे रहे थे वोटों की गिनती की जानकारी

मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ के गढ़ में समाजवादी पार्टी प्रत्याशी प्रवीन निषाद ने भाजपा प्रत्याशी उपेंद्र दत्त शुक्ला को 21881 मतों से हराया, वहीं फूलपुर से सपा के नागेंद्र प्रताप सिंह पटेल ने बीजेपी के कौशलेंद्र पटेल को 59613 वोटों से हराया, दोनों ही लोकसभाओं से बीजेपी को सामना करना पड़ा भारी हार का 

वोटिंग का कम प्रतिशत देख भाजपा की सांस पहले से थी फूली हुई, सपा का गदगद था मन, क्योंकि शहरों के मुकाबले देहातों में हुई थी दुगुनी वोटिंग, लग रहे हैं बुआ—भतीजा जिंदाबाद के नारे

यूपी, जनज्वार। उत्तर प्रदेश दोनों उपचुनावों में भाजपा की न सिर्फ इज्जत दांव पर थी, बल्कि ये दोनों सीटें 2019 के लोकसभा का भविष्य भी बांचने वाली थीं और उन्होंने बांच दिया। दोनों ही सीटों गोरखपुर और फूलपुर में भाजपा हार चुकी है और सपा के दोनों प्रत्याशी गोरपुर से प्रवीण निषाद और फूलपुर से नागेंद्र सिंह पटेल जीत चुके हैं।

यूपी के 2017 विधानसभा चुनावों में भाजपी की बंपर जीत के बाद यह दोनों सीटें खाली हो गयीं थीं, क्योंकि गोरखपुर से सांसद रहे योगी आदित्यनाथ को भाजपा ने मुख्यमंत्री बनाया और फूलपुर के सांसद केशव प्रसाद मौर्या उपमुख्यमंत्री।

ऐसे में इन दोनों सीटों से क्रमश: प्रदेश के मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री की हार हुई है और चुनौती खड़ी हो गयी है कि क्या उत्तर प्रदेश में भाजपा 2019 के लोकसभा चुनावों में 73 सांसदों के जीत की गिनती बरकरार रख पाएगी। इन दोनों सीटों पर मुख्यमंत्री और उपमुख्यमी दोनों ने ही उपचुनाव के लिए जमकर प्रचार किया था।

सपा की जीत के बाद राज्य की योगी सरकार और केंद्र की मोदी सरकार पर सवाल उठने शुरू हो गए हैं। इन सीटों पर जीत हासिल करने के लिए भाजपा ने एड़ी—चोटी का जोर लगाया था। मुख्यमंत्री उपमुख्यमंत्री ही नहीं, इससे प्रधानमंत्री मोदी की साख पर भी तमाम सवाल उठने शुरू हो गए हैं।

समाजवादी पार्टी ने निषाद पार्टी और डॉ. अयूब की पीस पार्टी के साथ इस सीट के उपचुनाव में गठबंधन किया था।

गोरखपुर में सपा ने निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय निषाद के बेटे इंजीनियर प्रवीण कुमार निषाद को अपना उम्मीदवार बनाया था, जबकि कांग्रेस ने डॉ. सुरहिता करीम को चुनाव मैदान में उतारा। समाजवादी पार्टी ने निषाद पार्टी और डॉ. अयूब की पीस पार्टी के साथ इस सीट के उपचुनाव में गठबंधन किया था। बाद में बसपा ने भी दोनों सीटों पर सपा को समर्थन दिया और इस समर्थन के बाद न सिर्फ इन दोनों सीटों का जातीय गणित बदल गया, बल्कि पूरे प्रदेश में 2019 चुनावों के मद्देनजर नई संभावनाओं पर बहस होने लगी है।

2014 लोकसभा चुनाव में योगी आदित्यनाथ पांचवी बार 3 लाख 12 हजार वोटों से जीते थे और समाजवादी पार्टी की राजमति निषाद 2 लाख 26 हजार वोटों से दूसरे स्थान पर रहीं थीं। गोरखपुर सीट भाजपा की लगभग सल्तनत रही है, जो इस बार ढह गयी है। भाजपा 1991 से लगातार इस सीट को जीत रही है, जिसमें से योगी 1998 से चुनाव जीत रहे हैं। योगी ने लगातार यहां से पांच बार लोकसभा सीट जीती है, तो भाजपा यहां से अब तक लगातार 7 बार लोकसभा जीत चुकी है। लंबे समय के बाद भाजपा को यहां से हार का मुंह देखना पड़ा है।

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इस लोकसभा में करीब 19 लाख 50 वोट हैं, जिसमें से पुरुष वोटर लगभग 10 लाख 72 हजार हैं, जबकि महिला वोटरों की संख्या लगभग 8 लाख 77 हजार है।

सपा के महासचिव रामगोपाल यादव ने सपा को मिली सफलता पर कहा, ‘यूपी की जनता ने सरकार में अविश्वास व्यक्त कर दिया है स्पष्ट तौर पर। यूपी की जनता समझ चुकी है कि सारे देश की जनता को मूर्ख बना रहे हैं और स्वयं भगवान को धोखा दे रहे हैं।’

बड़बोले छोटे सीएम केशव प्रसाद मौर्य की जुबान लोकसभा परिणामों के बाद थम गई है। चुनाव से पहले उन्होंने कहा था कि 14 मार्च को रिजल्ट के दिन बुआ और भतीजे को अपने पास बुला लेना चाहिए क्योंकि हार का सदमा बर्दाश्त नहीं हो पाएगा।

वहीं बिहार के अररिया लोकसभा सीट के लिए हुए चुनाव में भी बीजेपी को बुरी तरह मुंह की खानी पड़ी है। अररिया से राजद के सांसद रहे मोहम्मद तस्लीमुद्दीन के निधन के बाद 11 मार्च को उपचुनाव कराए गए थे। राजद ने मोहम्मद तस्लीमुद्दीन के बेटे सरफराज आलम को अपना उम्मीदवार बनाया था, वहीं भाजपा की तरफ से प्रदीप सिंह चुनाव मैदान में थे।

वहीं जहानाबाद और भभुआ विधानसभा से भी विधायकों की मौत के बाद चुनाव कराए गए थे, जिसमें से भभुआ सीट पर बीजेपी की रिंकी यादव ने जीत हासिल की है। जहानाबाद से राजद ने भाजपा को भारी अंतर से हराया है। राजद ने दिवंगत विधायक मुंद्रिका सिंह यादव के पुत्र कुमार कृष्ण मोहन उर्फ सुदय यादव को तो सत्ताधीन पार्टी जदयू ने अभिराम शर्मा को उम्मीदवार बनाया था। इन दोनों सीटों पर मिली हार के बाद राजद के हौसले बुलंद हैं।