60 रिटायर्ड अधिकारियों ने पत्र लिखकर लगाया आरोप कैग मई 2019 के चुनाव के पहले नोटबंदी और राफेल सौदे पर अपनी ऑडिट रिपोर्ट में जान बूझकर देरी कर रहा है, ताकि मोदी सरकार की न हो किरकिरी….

वरिष्ठ पत्रकार जेपी सिंह की रिपोर्ट

जनज्वार। उच्चतम न्यायालय द्वारा राफेल मामले में दिए गए फैसले से मोदी सरकार का झूठ उजागर हो गया है और राफेल सौदे में उच्चतम न्यायालय के फैसले पर भी न्यायविद गंभीर प्रश्नचिन्ह लगा रहे हैं।

दरअसल उच्चतम न्यायालय ने राफेल के मूल्य के बारे में मोदी सरकार द्वारा सीएजी को जानकारी देने और पीएसी (लोक लेखा समिति) को इसकी जानकारी होने का जो दावा किया, उसे उच्चतम न्यायालय ने 25वें पैरे में लिख दिया। नतीजतन सरकार की गलतबयानी पकड़ी गयी। अब सीएजी रिपोर्ट मांगी जा रही है जो सरकार फिलवक्त नहीं दिखा पा रही है।

उच्चतम न्यायालय द्वारा मनोहर लाल शर्मा बनाम नरेंद्र दामोदर दास मोदी एवं अन्य (याचिका संख्या 225 /2018) सपठित याचिका संख्या 1205 /2018, 297 /2018 तथा 298 /2018 में आज सुनाये गए फैसले के पैरा 25 में कहा गया है कि हमारे सामने पेश दस्तावेजों में राफेल विमान के मूल्य का विस्तृत विवरण है, केवल विमान का आधार मूल्य दिया गया है और कहा गया है कि इससे देश की सुरक्षा को खतरा हो सकता है। इसे संसद में भी नहीं बताया गया है। ऐसा करने से दोनों देशों भारत और फ़्रांस के बीच हुए गोपनीयता के समझौते का भी उललंघन होगा।

दस्तावेजों में कहा गया है कि केंद्र सरकार ने सीएजी से लड़ाकू विमान की कीमतें साझा की, जिसके बाद सीएजी ने पीएसी (लोकलेखा समिति) को रिपोर्ट जमा कर दिया और फ़िर पीएसी ने संसद के समक्ष संक्षिप्त रिपोर्ट में राफेल सौदे की जानकारी दे दी है, जो अब सार्वजनिक है।

पीएसी के अध्यक्ष कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा है कि सीएजी के पास भी उनका कोई कमेंट नहीं है, कोई रिपोर्ट सीएजी की नहीं है। उन्होंने कहा कि आज ही पीएसी की बैठक थी, जिसके दौरान मैंने डिप्टी सीएजी से पूछा कि आखिर यह रिपोर्ट कैसे आ गई। उनके पास भी कोई जवाब नहीं था। खड़गे ने कहा यह रिपोर्ट अगर पीएसी के पास आती, उसे संसद में पेश किया जाता, लेकिन चूंकि यह रिपोर्ट पीएसी के पास आई ही नहीं, तो सार्वजनिक कैसे हो गई? उन्होंने बताया कि इस तरह की किसी भी रिपोर्ट को जब तक संसद में नहीं रखा जाता, तब तक कोई भी उसके बारे में नहीं बोल सकता।

अब कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने सरकार से राफेल की कीमत पर सीएजी की रिपोर्ट दिखाने की मांग की है। राहुल के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट के आज के फैसले का आधार है कि राफेल की कीमत की चर्चा सीएजी रिपोर्ट में की गई है, लेकिन पीएसी के चेयरमैन खड़गे को इसकी जानकारी नहीं है। उन्होंने इस तरह की कोई रिपोर्ट नहीं देखी है। यहां तक कि पीएसी के किसी सदस्य के पास इस तरह की कोई रिपोर्ट नहीं आई है।

राहुल गांधी ने कहा कि सरकार को हमें यह बताना होगा कि यह सीएजी रिपोर्ट कहां पर है। अगर है तो इसे सीएजी के चेयरमैन खड़गे को दिखाया जाए। कांग्रेस अध्यक्ष ने तंज कसते हुए कहा, ‘हो सकता है कि एक अलग संसद में पीएसी के समानांतर एक अलग पीएसी चल रही हो। हो सकता है कि यह पीएसी फ्रांस में हो और यह भी हो सकता है कि मोदी जी ने पीएमओ में अपनी एक अलग पीएसी बनाई हो।

याचिकाकर्ता यशवंत सिन्हा, अरुण शौरी और प्रशांत भूषण ने कहा है कि हमें यह नहीं पता सीएजी को कीमत का ब्यौरा मिला है या नहीं, लेकिन बाकी सारी बातें झूठ हैं। न ही सीएजी की तरफ से पीएसी को कोई रिपोर्ट दी गयी है, न ही पीएसी ने ऐसे किसी दस्तावेज़ का हिस्सा संसद के समक्ष प्रस्तुत किया और न ही राफेल सौदे के संबंध में ऐसी कोई सूचना या रिपोर्ट सार्वजनिक है, लेकिन सबसे हैरत की बात है कि उच्चतम न्यायालय ने सरकार के झूठ को सही मानकर राफेल पर फ़ैसला सुना दिया।

गौरतलब है कि 14 नवंबर 2018 को 60 रिटायर्ड नौकरशाहों ने सीएजी को लिख पत्र में कहा गया है, नोटबंदी और राफेल सौदे को लेकर समय पर ऑडिट रिपोर्ट पेश करने में कैग की नाकामी को पक्षपातपूर्ण कदम के तौर पर देखा जा सकता है और इस महत्वपूर्ण संस्था की साख पर संकट पैदा हो सकता है। 60 रिटायर्ड अधिकारियों ने नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (सीएजी) को पत्र लिखकर उस पर नोटबंदी और राफेल सौदे पर ऑडिट रिपोर्ट को जान बूझकर टालने का आरोप लगाया है, ताकि अगले साल चुनाव से पहले एनडीए सरकार की किरकिरी नहीं हो।

पूर्व अधिकारियों ने एक पत्र में कहा है कि नोटबंदी और राफेल लड़ाकू विमान सौदे पर ऑडिट रिपोर्ट लाने में अस्वाभाविक और अकारण देरी पर चिंता पैदा हो रही है और रिपोर्ट संसद के शीत सत्र में पटल पर रखी जानी चाहिए।

त्र पर हस्ताक्षर करने वाले सेवानिवृत्त अधिकारियों में पंजाब के पूर्व डीजीपी जूलियो रिबेरो, पूर्व भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारी से सोशल एक्टिविस्ट बनीं अरुणा रॉय, पुणे के पूर्व पुलिस आयुक्त मीरन बोरवंकर, प्रसार भारती के पूर्व सीईओ जवाहर सरकार, इटली में पूर्व दूत केपी फेबियन समेत अन्य पूर्व अधिकारी हैं।

पत्र में दावा किया गया है कि ऐसी खबरें थीं कि राफेल सौदे पर ऑडिट सितंबर 2018 तक हो जाएगा, लेकिन संबंधित फाइलों का कैग ने अब तक परीक्षण नहीं किया है। ऐसी धारणा बनाने का आधार बढ़ रहा है कि कैग मई 2019 के चुनाव के पहले नोटबंदी और राफेल सौदे पर अपनी ऑडिट रिपोर्ट में जान-बूझकर देरी कर रहा है, ताकि मौजूदा सरकार की किरकिरी नहीं हो।