समाज के ठेकेदारों के निशाने पर सबरीमाला मंदिर में सबसे पहले प्रवेश करने वाली कनकदुर्गा और बिंदु

मंदिर में प्रवेश करने वाली कनकदुर्गा पर उसकी सास ने किया था जानलेवा हमला, जिसके बाद मंदिर में प्रवेश करने वाली दोनों महिलाओं ने याचिका दायर कर की थी सुरक्षा की मांग…

वरिष्ठ पत्रकार जेपी सिंह की रिपोर्ट

जनज्वार। उच्चतम न्यायालय ने केरल पुलिस को 18 जनवरी 2019 को आदेश दिया कि सबरीमाला मंदिर में प्रवेश करने वाली दो महिलाओं को चौबीस घंटे सुरक्षा मुहैया कराई जाए। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति एल एन राव और न्यायमूर्ति दिनेश माहेश्वरी की पीठ ने कहा कि वह केवल दो महिलाओं की सुरक्षा के पहलू पर विचार करेगी और याचिका में किए गए किसी अन्य अनुरोध की सुनवाई नहीं करेगी।

पीठ ने इस मामले को सबरीमाला मामले की लंबित याचिकाओं से साथ जोड़ने से भी इनकार कर दिया। सदियों पुरानी परंपरा तोड़ते हुए मंदिर में दो जनवरी सबरीमाला मंदिर में को प्रवेश करने वाली 40 वर्षीय बिंदु और 39 साल की कनकदुर्गा ने याचिका दाखिल की थी।

पीठ ने कहा कि हम इस रिट याचिका पर सुनवाई को उचित मानते हुए केरल पुलिस को याचिकाकर्ता संख्या 1 (बिंदु) और याचिकाकर्ता संख्या दो (कनकदुर्गा) को 24 घंटे पर्याप्त सुरक्षा मुहैया कराने का आदेश देते हैं। इसके अलावा हम याचिका में उल्लिखित किसी मामले पर विचार नहीं करेंगे।

केरल सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील विजय हंसारिया ने कहा कि सरकार इन महिलाओं को और मंदिर में प्रवेश करने वाले अन्य श्रद्धालुओं को पहले ही पर्याप्त सुरक्षा मुहैया करा रही है। अब तक 51 महिला श्रद्धालु मंदिर में प्रवेश कर चुकी हैं। महिलाओं को मंदिर में प्रवेश की अनुमति देने के कोर्ट के फैसले की समीक्षा संबंधी याचिका दायर करने वाले याचिकाकर्ताओं के वकील मैथ्यू जे नेदुम्पारा ने कहा कि मंदिर में किसी भी महिला श्रद्धालु ने प्रवेश नहीं किया है।

महिला याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह ने कहा कि अदालत को याचिकाओं को सबरीमाला मंदिर संबंधी लंबित मामलों से सीधे जोड़ने का आदेश देना चाहिए। पीठ ने इस अनुरोध को खारिज कर दिया।

हालांकि पीठ ने इन सब मामलों पर विचार करने से इनकार कर दिया और कहा कि यदि केरल सरकार अदालत के आदेश के बिना ही महिला श्रद्धालुओं को सुरक्षा मुहैया करा रही है तो अदालती आदेश के बाद भी पर्याप्त सुरक्षा मुहैया कराने में कोई नुकसान नहीं है।

गौरतलब है कि कनकदुर्गा और बिंदु ने इस महीने की शुरुआत में पुलिस सुरक्षा के बीच मंदिर में प्रवेश किया था। इससे करीब तीन महीने पहले शीर्ष अदालत ने भगवान अयप्पा के मंदिर में 10 वर्ष से 50 वर्ष तक की महिलाओं के प्रवेश पर लगा प्रतिबंध हटाने का ऐतिहासिक फैसला सुनाया था। मंदिर में प्रवेश करने वाली एक महिला कनकदुर्गा पर उसकी सास ने हमला किया था। इसके बाद महिलाओं ने याचिका दायर करके सुरक्षा की मांग की थी।

याचिका में मंदिर कमेटी को यह निर्देश दिए जाने का अनुरोध किया गया था कि सभी आयुवर्ग की महिलाओं को बिना किसी रुकावट के मंदिर में प्रवेश की अनुमति दी जाए और भविष्य में मंदिर में दर्शन की इच्छा रखने वाली महिलाओं को पुलिस सुरक्षा दिए जाने समेत उनका सुरक्षित प्रवेश का आदेश जारी किया जाये। इसमें महिला के जीवन एवं स्वतंत्रता को खतरे का भी जिक्र किया गया था।

याचिका में कहा गया था कि मंदिर कमेटी को मंदिर में प्रवेश करने वाली दो महिलाओं को चौबीस घंटे सुरक्षा दी जाए और उनके खिलाफ सोशल मीडिया पर या किसी अन्य तरीके से शारीरिक या मौखिक हिंसा करने में शामिल प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई करने का आदेश दिया जाए।

याचिका में यह आदेश दिए जाने की मांग की गई थी कि 10 वर्ष से 50 वर्ष तक के आयुवर्ग की किसी भी महिला के प्रवेश के कारण शुद्धीकरण न किया जाए या मंदिर के कपाट बंद नहीं किए जाएं। याचिका में यह घोषणा करने को कहा गया है कि 10 वर्ष से 50 वर्ष तक की आयु की महिलाओं को मंदिर में प्रवेश से किसी भी प्रकार से रोकना कोर्ट के 28 सितंबर, 2018 के आदेश के खिलाफ है। याचिका में यह भी कहा गया था कि उच्चतम न्यायालय ये घोषित करे कि शुद्धीकरण करना, महिलाओं की लगरिमा और उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट में 28 सितंबर 2018 के पांच जजों की संविधान पीठ के फैसले को लेकर 49 पुनर्विचार याचिकाएं दाखिल की गई हैं। फैसले में 4:1 के बहुमत से कहा गया कि सभी उम्र की महिलाएं केरल के सबरीमाला मंदिर में प्रवेश कर सकती हैं। पीठ ने 10 से 50 साल की उम्र की महिलाओं के प्रवेश पर रोक की परंपरा को अंसवैधानिक करार दिया है। इससे पहले संविधान पीठ में शामिल चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा रिटायर हो चुके हैं और उनकी जगह चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने ली है।

Facebook Comments